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क्या वंदना विद्युत लिमिटेड से पभावित किसानों की जमीन भी वापस होगी?

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2018-12-26T21:11:22+05:30
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कोरबा (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। जिले के छुरी में स्थापित वंदना विद्युत लिमिटेड का विद्युत संयंत्र चालू होने के पहले ही बंद हो गया। लेकिन संयंत्र के लिए ली गई जमीन के कारण किसान सड़क पर आ गए है। आलम यह है कि जमीन भी चली गई और रोजगार भी नहीं मिला। छुरी व पभावित गांव के लोगों में इस बात की अब चर्चा होने लगी है कि बस्तर के नगरनार में स्थापित होने वाले टाटा के संयंत्र के चालू नहीं होने के कारण पदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने वहां के किसानें की जमीन वापस करने का एलान किया है। इससे यहां के किसान भी आशा लगाए बैठे है कि उनकी भी जमीन वापस हो जाए तो कम से कम कृषि कार्य तो करने से जीवन यापन किया जा सकेगा।

सन् 2008 में वदंना विद्युत लिमिटेड के 540 मेगावाट विद्युत संयंत्र और एक अन्य संयंत्र के लिए पांच गांवों की जमीन किसानों की अधिग्रहित की गई। छुरी, गांगपुर, सलोरा, दर्राभाठा और झोरा की 260.899 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। विद्युत संयंत्र लगाने के लिए भी शासन द्वारा दी गई पूरी सुविधा का लाभ पबंधको द्वारा उठाया गया और संयंत्र खड़ा कर लिया गया। यहां 363 किसानों की भूमि चली गई। किसानों ने रोजगार के साधन मिलने के उद्देश्य से अपनी जमीन उद्योग लगाने के लिए दे दी। लेकिन शायद उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उद्योग चालू होने के पहले ही बंद हो जाएगा। आज आलम यह है कि मुआवजा राशि तो मिली लेकिन रोजगार के साधन छिन गए। चूंकि सारी भूमि खेतिहर थी और यहां सिंचाई का पर्याप्त साधन होने के कारण पर्याप्त मात्रा में अच्छी किस्म का धान किसानों द्वारा पैदा किया जाता था। भूमि चले जाने के कारण अब किसानें के हाथों में कुछ नहीं रह गया है। एक तरह से सड़क पर आ गए है। कुछ लागों को संयंत्र में नौकरी भी ठेका मजदूरों के रूप में दी गई थी लेकिन पांच साल पहले उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और कईयों को तो छः छः माह की पगार भी नहीं मिली।

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