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घर की साफ-सफाई का जिम्मा सिर्फ आपका नहीं बच्चों का भी है

👤 Admin 1 | Updated on:2017-04-21 17:52:31.0

घर की साफ-सफाई का जिम्मा
सिर्फ आपका नहीं बच्चों का भी है

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नीलम अरोड़ा

सात साल की नैना की दोस्त उनके घर आने वाली थी। आ" साल का नैना का भाई भी इस बात को लेकर परेशान था। दरअसल उन दोनो के कमरे का सामान अस्त व्यस्त था। दोनो का यह एहसास हो रहा था कि कोई यहां आकर भला बै"ने और खेलने की कल्पना कैसे कर सकता है? दोनो ने अपने कमरे की सफाई मिलकर करने के लिए अपनी कमर कस ली थी। उनकी मां ने बच्चों के इस जोश को देखा तो उन्हें बड़ी हैरानी हुई कि जब वह उन्हें अपने कमरे को साफ-सुथरा रखने की हिदायत देती है तो दोनो उसकी बात नहीं सुनते और कमरे में सामान दिनभर इधर-उधर फैला रहता है। मम्मी ने भी सोच लिया था कि आज वह उनके साथ कोई सहयोग नहीं करेंगी। देखती हूं दोनो अपनी दोस्त को दिखाने के लिए कैसे अपने कमरे को व्यवस्थित करते हैं। वह चुपचाप जाकर पिछले कमरे में बै"कर कुछ पढ़ने लगीं। उन्हें बच्चों के कमरे से आवाजें आ रही थी

, मां को जिज्ञासा हुई, उसने जाकर बच्चों के कमरे में थोड़ी देर बाद देखा तो हैरान रह गईं। दोनो ने अपने कमरे को इतना व्यवस्थित कर दिया था कि कभी वह भी नहीं कर पायीं थीं। कमरे के हर कोने को ड्राइंग रूम में रखी चीजों से सजाकर कलात्मक लुक दे दिया गया था। हालांकि उनकी मम्मी को ड्राइंग रूम की चीजों को अपने कमरे में सजाने पर थोड़ी आपत्ति हुई लेकिन उन्होंने उस समय चैन की सांस ली कि चलो अच्छा है
, मुझे यह तो पता चल गया कि दोनो बच्चे अगर जरूरत पड़े तो खुद अपने कमरे की ही नहीं बल्कि पूरे घर की सफाई कर सकते हैं।

नैना और उसके भाई विकास की मदद अगर उनकी मम्मी करती तो हो सकता है दोनो बच्चे खेलने में लग जाते और कमरे को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी मां ही हो जाती। लेकिन मां ने दूरदर्शिता दिखायी थी और वह इस बात को भी जानना और समझना चाहती थीं कि क्या उनके बच्चे सचमुच घर में साफ-सफाई का काम कर सकते हैं। यह उनकी मां की समझदारी थी कि उन्होंने बच्चो को भी मौका दिया। नैना की मम्मी की तरह तमाम दूसरी महिलाओं को भी बच्चों को साफ-सफाई का काम सिखाने और घर की साफ-सफाई के प्रति जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। इसके लिए बच्चों को साफ-सफाई के कामों में शामिल करते रहना चाहिए। इससे बच्चों में जिम्मेदारी की भावना आती है।

बच्चों को दो साल की उम्र से ही साफ-सफाई रखना सिखाने के लिए जरूरी है कि उसे अपने खिलौनों को खेलने के बाद एक स्थान पर रखने के लिए कहें। बच्चा यदि बड़ा है तो उसे अपने खिलौने अलमारी या उन्हें रखने के नियत स्थान पर रखना सिखाएं। इस तरह वह धीरे-धीरे इधर उधर बिखरी चीजों को भी समेटना सीख लेता है। बच्चों से अपने कमरे की साफ-सफाई खुद करने के लिए कहें और थोड़ी देर बाद जहां कमी लगे

, उसे सही करके उनके उत्साह को बढ़ाएं। उन्हें सप्ताह में एक बार अपने बिस्तर की चादर उ"ाकर उसकी धूल मिट्टी को बाथरूम में झाड़कर उन्हें वॉशिंग मशीन में डालना सिखाएं। बच्चा यदि बड़ा है तो उसे अपनी स्टडी टेबल
, कंप्यूटर टेबल और लेपटॉप को साफ-सुथरा रखना सिखाएं। बेटा हो या बेटी बच्चे से किचन के छोट-छोटे काम भी कराये जा सकते हैं। चाय, पानी पीने के बाद अपने कप, गिलास को धोना सिखाएं। यदि वे स्वयं अपनी ओर से अपने बर्तन धोते हैं तो इसे अपनी हे"ाr न समझें बल्कि उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करें ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।

यदि आप घर के काम के लिए काम वाली रखते हैं, वह अचानक छुट्टी कर ले या उसकी तबियत खराब हो तो घर के कामों को करने के लिए उसकी मदद लें। झाडू, पौछे और डस्टिंग में वह भी आपका हाथ बंटा सकता है। खाने से पहले टेबल लगाने और खाने के बाद टेबल साफ करने की भी जिम्मेदारी बच्चों के बीच बांट दें। बच्चे में अपनी चीजों को व्यवस्थित रखने की आदत डालने के लिए जरूरी है कि जब वह स्कूल से लौटकर आये तो वह अपना बैग

, जूते व कपड़े नियत स्थान पर रखें। अगर दो या तीन बच्चे हैं तो उनसे घर के दरवाजे साफ करने, पौधों को पानी देने और घर के छोटे-मोटे कामों में उनकी मदद लेकर उन्हें साफ-सफाई का महत्व तो समझा ही सकते हैं, इसके साथ ही उन्हें छोटेपन से ही आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

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