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प्रद्युम्न को न्याय मिलने में सात दिनों का है इंतजार, जानिए क्‍यों

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:16 Sep 2017 9:39 AM GMT

प्रद्युम्न को न्याय मिलने में सात दिनों का है इंतजार, जानिए क्‍यों

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गुरुग्राम । प्रद्युम्न हत्याकांड की सीबीआइ जांच शुरू होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। सबसे पहले प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जांच की सिफारिश के लिए ड्राफ्ट तैयार करेंगे। ड्राफ्ट प्रदेश के गृह सचिव के माध्यम से केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के पास जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद सीबीआइ मामले को अपने हाथ में लेगी। पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाता है। यह जानकारी अपने कार्यकाल में सीबीआइ जांच की सिफारिश के लिए कई ड्राफ्ट तैयार कर चुके प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरएस दलाल ने दैनिक जागरण से बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि सीबीआइ जांच की घोषणा करने के साथ ही जांच नहीं शुरू हो जाती है।

इसके लिए पूरी प्रक्रिया है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक की ओर से ड्राफ्ट तैयार करके प्रदेश के गृह सचिव के पास भेजा जाता है। इसके बाद ड्राफ्ट मुख्यमंत्री के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। मुख्यमंत्री से स्वीकृति मिलने के बाद ड्राफ्ट फिर से गृह सचिव के पास आता है। गृह सचिव द्वारा आगे ड्राफ्ट को डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के पास भेजा जाता है। वहां से सीबीआइ को जांच के लिए भेजा जाता है। यह डिपार्टमेंट प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत है न कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत। कोई जरूरी नहीं कि हर सिफारिश को डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एवं ट्रेनिंग स्वीकार ही कर ले। स्वीकार करने से कई स्तर पर छानबीन की जाती है। जब सीबीआइ जांच के लायक मामले को समझा जाता है फिर स्वीकृति दी जाती है। प्रद्युम्न हत्याकांड बहुत पेचीदा मामला नहीं है। इस मामले को गुरुग्राम पुलिस बेहतर तरीके से जांच कर सकती थी।

पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार सीबीआइ में थे। उन्हें वहां की जांच प्रक्रिया पूरी तरह पता है। वे अपने स्तर पर बेहतर कर सकते थे लेकिन परिजनों एवं देश भर के लोगों की भावना को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सीबीआइ जांच की घोषणा कर दी है। सीबीआइ जांच से यह लाभ होगा कि पूरे देश में सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से लापरवाही करने वाले स्कूल रास्ते पर आ जाएंगे। सभी के भीतर डर पैदा होगा। जब डर पैदा होगा फिर आपराधिक लापरवाही नहीं होगी। सभी स्कूलों का काम केवल पैसा कमाना रह गया है। शिक्षा के मंदिर कारोबार के केंद्र में बदल चुके हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो प्रद्युम्न की हत्या नहीं होती। सीबीआइ जांच केवल एक बिंदु को ध्यान में रखकर नहीं होती है। जब जांच शुरू होती है तो संबंधित सभी विषय सामने आ जाते हैं।

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