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राहुल जिन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उठा रहे हैं उन्हें खारिज नहीं किया जा सकता

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:2018-08-31 14:41:55.0

राहुल जिन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उठा रहे हैं उन्हें खारिज नहीं किया जा सकता

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  1. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेशक प्रधानमंत्री बनें या न बनें, साझा विपक्ष के 2019 में नेता बनें या न बनें पर जो सवाल वह उठा रहे हैं उन्हें खारिज नहीं किया जा सकता और उनके जवाब नहीं मिल रहे। इधर-उधर के आरोप लगाए जा रहे हैं पर असल मुद्दों पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल रहा। हाल ही में राहुल ने अपने जर्मनी और लंदन यात्रा में उन्होंने मोदी सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने राष्ट्र स्वयंसेवक संघ, 1984 के सिख विरोधी दंगों और मोदी सरकार पर तीखे हमले किए और बेबाकी से अपने विचार व्यक्त किए। राहुल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में न्यायपालिका और चुनाव आयोग को बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के समक्ष उठ रहे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं और किसी भी मुद्दे का जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज में आयोजित एक कार्यक्रम में संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की, जिस पर भाजपा और संघ के भीतर तीखी प्रतिक्रिया हुई। मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में मिस्र में हुई थी। पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस संघ के खिलाफ भगवा आतंकवाद जैसे कठोर और आक्रामक शब्दों का इस्तेमाल करती आ रही है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए राहुल ने संघ के साथ मुस्लिम ब्रदरहुड की तुलना की है। दोनों संगठनों में हालांकि कुछ समानताएं भी हैं। मसलन संघ की तरह मुस्लिम ब्रदरहुड भी अपने को सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन होने का दावा करता है। संघ की स्थापना भी हिन्दू समाज के हितों की रक्षा के लिए हुई है तो मुस्लिम ब्रदरहुड के नाम से ही स्पष्ट है कि इसका मकसद इस्लाम के नैतिक मूल्यों का प्रसार-प्रचार करना है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लंदन में कई कार्यक्रम थे। यहां इंडियन ओवरसीज कांग्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए। राहुल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक जैसे संस्थान जो हमारे देश की स्तम्भ हैं, उन्हें बांटा जा रहा है। पहली बार शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठतम जजों को सार्वजनिक तौर पर यह बात कहनी पड़ी कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री यह कहकर हर एक भारतीय का अपमान करते हैं कि पिछले 70 सालों में भारत में कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि भारत विश्व को भविष्य दिखाता है। भारत के लोगों ने इसे मुमकिन किया। इसमें कांग्रेस ने भी मदद की है। राहुल ने कहाöअगर प्रधानमंत्री का कहना है कि उनके कार्यभार संभालने से पहले कुछ नहीं हुआ तो वह कांग्रेस पर टिप्पणी नहीं कर रहे, वह देश के हर एक व्यक्ति का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में भारत में दलितों, किसानों, जनजातीय लोगों, अल्पसंख्यकों और गरीबों को कहा जाता है कि उन्हें कुछ नहीं मिलेगा और आवाज उठाने पर उनकी पिटाई की जाती है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम को नष्ट किया जा रहा है। छात्रवृत्तियां बंद की गई हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में लोगों के साथ जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। हाशिये पर पड़े लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है जबकि अनिल अंबानी जैसे लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री के पार्टी के विधायक ने महिला के साथ बलात्कार किया तो वह चुप्पी साधे रहे। जब नीरव मोदी जनता का पैसा लेकर भाग गया तब भी वह चुप्पी साधे रहे। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चीन रोजाना 50 हजार नौकरियों का सृजन करता है, जबकि भारत में केवल 450 लोगों को ही नौकरी मिलती है। हमारे किसानों को मदद चाहिए, हमारे युवकों को शिक्षा, बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाएं लेकिन इन जैसे मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होती। राहुल ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल नहीं करता। अगर आपने राफेल सौदे पर संसद में बहस सुनी होगी तो आपने देखा होगा कि प्रधानमंत्री मेरे एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए। विदेश में रहने वाले भारतीयों के देश के विकास में दिए योगदान की सराहना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी, बीआर अम्बेडकर और जवाहर लाल नेहरू सभी एनआर थे। उन्होंने विश्व की यात्रा की और नए दृष्टिकोणों के साथ भारत की मदद की। जर्मनी के हेमबर्ग स्थित बकरिस समर स्कूल में दिए राहुल के भाषण काफी चर्चा में रहे। राहुल ने आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखने से दुनिया में कहीं भी आतंकवादी संगठन पैदा हो सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने विकास की प्रक्रिया से आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को बाहर रखा है तथा यह एक खतरनाक बात बन सकती है। उन्होंने कहाöअगर आप 21वीं सदी में लोगों को कोई विजन नहीं देते तो कोई और देगा और विकास प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखने का यह असली खतरा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि भारत में भीड़ द्वारा लोगों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटनाएं, बेरोजगारी और सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा नोटबंदी एवं जीएसटी को खराब तरीके से लागू किए जाने से छोटे कारोबारों के चौपट हो जाने की वजह से उपजे गुस्से के कारण हो रही है। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबार में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं और मजबूर होकर अपने-अपने गांव लौट रहे हैं। राहुल ने पाकिस्तान के मुद्दे पर कहाöपाकिस्तान को लेकर पीएम मोदी के पास कोई गंभीर सोची-समझी रणनीति नहीं है। चीन के साथ मोदी सरकार की विदेश नीति पर बोलते हुए राहुल ने कहा कि पीएम मोदी डोकलाम को महज एक इवेंट के रूप में देखते हैं। सत्ता के केंद्रीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत तभी सफल हुआ, जब सत्ता विकेंद्रीकरण हुई। पिछले चार वर्षों में बड़े पैमाने पर सत्ता का केंद्रीकरण हुआ है। आज सत्ता की पूरी ताकत पीएमओ के पास हो गई है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राहुल के समर्थन में उतरते हुए कहा कि आरएसएस तथा भाजपा नीत केंद्र सरकार और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना भारत पर हमला करने के बराबर नहीं है। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी को तुरन्त माफी मांगनी चाहिए। वह नहीं जानते कि वह क्या बोल रहे हैं। वह सुपारी लेकर हिन्दुस्तान को खत्म करने की कोशिश बंद करें। वहीं सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी नासमझ हैं और नादान नेता हैं। वह देश को उसी मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं जिस पर अपनी पार्टी को पहुंचाया है। एक वोट की खातिर कांग्रेस ने देश को धर्म और जाति के नाम पर बांटा है। भाजपा को अपनी बात करने और आलोचना का पूरा-पूरा हक है पर सवाल फिर वही आता है कि जो सवाल जिनका मैंने विस्तार से चर्चा की है महत्वपूर्ण सवाल है जिनका सही उत्तर न तो प्रधानमंत्री दे रहे हैं और न ही भाजपा दे रही है। देश इन सवालों का जवाब चाहता है न कि प्रत्यारोप। राहुल अब धीरे-धीरे एक परिपक्व वक्ता व नेता बनते जा रहे हैं।
  2. -अनिल नरेन्द्र

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