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बैंकों और अर्थव्यवस्था पर भारी चोट

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:2019-01-08T23:54:04+05:30
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बैंकों की सकल गैर उत्पादित आस्तियां (जीएनपीए) वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़कर 11.2 प्रतिशत या 10,390 अरब रुपए पर पहुंच गई है। इसकी वजह से फंसे कर्जों (एनपीए) के दल-दल में फंस रहे देश के सरकारी बैंकों की स्थिति साल दर साल खराब होती जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान कुछ एनपीए में सार्वजनिक बैंकों का एनपीए 8,950 करोड़ रुपए था जो उनके सकल ऋण के 14.6 प्रतिशत के बराबर है। आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए बढ़ा है। इन हालात से न सिर्प बैंकों में घबराहट है बल्कि वित्त मंत्रालय और आरबीआई आगे की स्थिति से निपटने के रास्ते को लेकर सजग है। 12 फरवरी 2018 को आरबीआई की तरफ से जारी अधिसूचना में कर्ज नहीं चुकाने वाले ग्राहकों के खातों को पुनर्निर्धारित करने के तत्कालीन सभी विकल्पों को समाप्त कर दिया गया था। इसमें यह भी कहा गया था कि अगर कर्ज चुकाने की निर्धारित अवधि से एक दिन की भी चूक होती है तो उसे एनपीए माना जाएगा और उन खातों के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इसके तहत पुराने सभी कारपोरेट खातों का निपटारा करने के लिए 180 दिनों का समय बैंकों को दिया गया था। यह अवधि 27 अगस्त 2018 को समाप्त हो गई। हाल ही में रेटिंग एजेंसी इकरा की तरफ से एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 70 ऐसे बड़े कारपोरेट खाते हैं जिन्हें आरबीआई के नियमों के मुताबिक एनपीए खाता घोषित किया जा सकता है। इससे एनपीए की राशि में 3.8 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में कहा कि सरकार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के फोन-ए-लोन घोटाले के लोन डिफॉल्टरों से एक-एक पैसा वसूल रही है। पहले एक ही परिवार को फोन कॉल पर चुनिन्दा कारोबारियों के लिए बैंकों का पैसा रिजर्व रखा जाता था। मौजूदा सरकार ने उन 12 सबसे बड़े डिफॉल्टरों को कर्ज नहीं दिया, जिनके एनपीए करीब 1.75 लाख करोड़ रुपए हैं। ऐसे 12 डिफॉल्टरों के अलावा अन्य 27 से भी कर्ज वापसी की कार्रवाई चल रही है, जिन पर करीब एक लाख करोड़ रुपए का एनपीए है। यूपीए के शासनकाल में दिए गए कर्ज पर पीएम की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि एनडीए सरकार को यह बताना चाहिए कि उनके समय में दिए गए कितने ऋण डूब गए? उन्होंने ट्वीट किया कि 2014 के बाद कितना कर्ज दिया गया और उनमें से कितनी राशि डूब (एनपीए) गई। मोदी जब कहते हैं कि यूपीए सरकार के समय दिए गए कर्ज डूब गए, इस बात को अगर मान भी लिया जाए तो मौजूदा एनडीए सरकार के कार्यकाल में नवीकरण किया गया और उनमें से कितने को रोल ओवर किया गया? यह डूबा कर्ज न केवल सार्वजनिक बैंकों की व्यवस्था खराब कर रहा है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है। पता नहीं यह डूबा पैसा कभी रिकवर होगा या नहीं?

-अनिल नरेन्द्र

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