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हिमाचल की छोटी काशी में `शर्मों' की प्रतिष्ठा दांव पर

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:15 May 2019 6:39 PM GMT
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हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी कही जाने वाली मंडी लोकसभा सीट पर `शर्मों' की साख व प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। एक तरफ पंडित सुखराम की निजी प्रतिष्ठा का सवाल है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मौजूदा सांसद राम स्वरूप शर्मा के लिए भी उनके अपने वजूद और प्रतिष्ठा की लड़ाई है। कांग्रेस की ओर से सुखराम के पोते भव्य शर्मा मैदान में हैं तो वहीं भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद को फिर मौका दिया है। भले ही सुखराम की कांग्रेस में घर वापसी हो गई, लेकिन उनके बेटे व हिमाचल सरकार के पूर्व मंत्री अनिल शर्मा अभी भी भाजपा में हैं। एक तरफ पार्टी व दूसरी तरफ बेटे के बीच फंसे अनिल शर्मा ने प्रत्यक्ष तौर पर खुद को मौजूदा चुनाव से अलग कर लिया है। बेटे को कांग्रेस का टिकट मिलने के बाद उन्होंने जयराम सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हिमाचल की सियासत पर गहरी नजर रखने वालों का मानना है कि भले ही यह मुकाबला भव्य और रामस्वरूप के बीच हो रहा हो, लेकिन असली मुकाबला पंडित सुखराम और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच है। राम स्वरूप काफी अरसे से जनता के बीच में हैं। सुखराम पहले पौत्र आश्रय शर्मा के लिए भाजपा से टिकट की मांग करते रहे, जब बात नहीं बनी तो कांग्रेस से टिकट हासिल कर लिया। अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने की कोशिश में दोनों ही दिग्गजों की प्रतिष्ठा व साख दांव पर है। दोनों ही नेता इसी इलाके के हैं, मुख्यमंत्री की सीट मंडी लोकसभा में आती है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री अपना गढ़ बचाने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। मंडी के बारे में कहा जाता है कि जो पार्टी इसे जीतती है, दिल्ली में वही सत्ता में आई है। भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के नाम व काम के अलावा राष्ट्रवाद और सर्जिकल स्ट्राइक को मुद्दा बना रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने मंडी में हुई अपनी हालिया रैली में सेना और वन रैंक वन पेंशन व सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों को उठाया। हालांकि जैसे एक पूर्व सरकारी अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण में यह बता नहीं पाए कि पिछले 5 सालों में उन्होंने हिमाचल के लिए क्या किया?

-अनिल नरेन्द्र

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