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रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल

👤 Veer Arjun | Updated on:8 Dec 2021 4:30 AM GMT

रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल

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-अनिल नरेन्द्र

कोरोना का नया वेरिएंट ओमिव्रॉन देश में दस्तक दे रहा है और इधर देशभर के रेजिडेंट डाक्टर शनिवार से हड़ताल पर हैं। नीट, पीजी काउंसलिंग में हो रही देरी के विरोध में यह हड़ताल की जा रही है। रेजिडेंट डाक्टरों ने पहले 27 नवम्बर से हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के आश्वासन पर वह काम पर लौट आए थे। अब शनिवार से अस्पतालों में ओपीडी बंद है। जूनियर डाक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुईं तो सोमवार से इमरजेंसी सहित अन्य सभी सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। दिल्ली के सफदरजंग और जीटीबी जैसे अस्पतालों में मरीजों पर समस्याओं का पहाड़ टूट पड़ा है। यहां आज रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी के साथ-साथ इमरजेंसी सेवाओं का भी बहिष्कार कर दिया।

लोक नायक अस्पताल व दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों में केवल ओपीडी बंद रही। कहा जा रहा है कि कल से ज्यादातर अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। देशभर में डाक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था फोर्ड का कहना है कि देश में डाक्टरों की कमी है जो रेजिडेंट डॉक्टर्स हैं उन पर वर्वलोड बहुत है। पूरा अस्पताल इनके सहारे चलता है। इससे फिजिकल से लेकर मेंटल हेल्थ तक प्रभावित होती है लेकिन नए डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो रही है। नीट काउंसलिंग भर्ती का रास्ता है लेकिन उन्हें दिया नहीं जा रहा है। जब तक इस पर सख्त पैसला नहीं आता तब तक देशभर के रेजिडंेट डॉक्टर्स हड़ताल पर रहेंगे। मरीज इलाज के लिए भटकते नजर आए। पेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय से उन्हें तीन दिन पहले मामले के निपटारे का भरोसा मिला था, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोईं कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे वक्त जब देश को स्वास्थ्य सेवाओं व सुविधाओं पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है और ओमिव्रॉन के देश में कईं मामले सामने आ चुके हैं, रेजिडेंट डॉक्टर्स का हड़ताल पर रहना ठीक नहीं है। सरकार को तत्काल इस मामले में पैसला करना चाहिए।

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