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एफ-16 गिरने से फंसे पाक और अमेरिका

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:2019-03-07T23:39:29+05:30

एफ-16 गिरने से फंसे पाक और अमेरिका

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आतंकी कैंपों पर भारतीय वायुसेना की साहसिक कार्रवाई के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन की ओर से पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराने के बाद की घटना पाकिस्तान के लिए एक नई समस्या पैदा कर सकती है। भारत के खिलाफ एफ-16 विमान के इस्तेमाल पर पाकिस्तान फंस गया है। अमेरिका ने विमान एफ-16 के दुरुपयोग के लिए पाकिस्तान से जवाब मांगा है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार भारत के खिलाफ इस विमान के इस्तेमाल पर अमेरिका ने ऐड यूजर एग्रीमेंट का उल्लंघन माना है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल कोन फॉकनर ने कहा कि हमें एफ-16 के दुरुपयोग से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स की जानकारी है। इस बारे में और सूचनाएं जुटाई जा रही हैं। विदेश सैन्य बिक्री अनुबंध की शर्तों के कारण हम कुछ मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं कर सकते हैं। अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान दिए थे। दस्तावेजों के अनुसार अमेरिका ने पाकिस्तान पर एफ-16 विमानों के इस्तेमाल को लेकर लगभग 12 पाबंदियां लगाई हैं। इसमें यह शर्त भी है कि वह किसी भी देश के खिलाफ इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता है। पेंटागन की डिफेंस सिक्योरिटी एंड कॉरपोरेशन एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार एफ-16 विमान सिर्फ आतंकवाद निरोधक अभियानों में पाकिस्तान की क्षमता बढ़ाने के लिए है। अपनी आदतनुसार पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने एफ-16 विमान का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने पाकिस्तानी अधिकारी एफ-16 का मलबा एकत्रित करते दिखे हैं। यही नहीं भारत ने कहा कि पाक ने एफ-16 लड़ाकू विमान से भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का प्रयास किया था। वायुसेना ने इसे मार गिराया। सबूत के तौर पर एएमआरएएएम मिसाइल के टुकड़े दिखाए थे। इसे सिर्फ एफ-16 से ही दागा जा सकता है। भारत हमेशा से कहता रहा है कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए जा रहे विमानों, हथियारों का वह दुरुपयोग कर रहा है। जो सैन्य मदद आतंकवाद के खिलाफ इस्तेमाल होनी चाहिए वह भारत, बलूचिस्तान व अन्य ठिकानों पर पाक प्रयोग कर रहा है। अब जब विंग कमांडर अभिनंदन ने सारी दुनिया के सामने सबूत पेश कर दिया है पाकिस्तान इससे इंकार नहीं कर सकता। अमेरिकी प्रशासन को एफ-16 के इस्तेमाल पर पाकिस्तान से केवल सवाल ही नहीं करने चाहिए बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में वह ऐसी हिम्मत न करने पाए। इसी के साथ उसे यह देखना होगा कि पाकिस्तान को भविष्य में उसकी या फिर उसके मित्र देशों की ओर से आधुनिक युद्धक सामग्री न मिलने पाए। अगर अब भी अमेरिका इस पूरे मामले में लीपापोती करता है तो हम यही मानेंगे कि अमेरिका दोगली नीति अपनाता है। वह सिर्फ अपने हथियारों को बेचने में दिलचस्पी रखता है, यह किसके खिलाफ इस्तेमाल होते हैं इससे उसे दिलचस्पी नहीं।

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