Top
Home » संपादकीय » मठ-मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्ति मिले

मठ-मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्ति मिले

👤 Veer Arjun | Updated on:26 Nov 2021 5:18 AM GMT

मठ-मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्ति मिले

Share Post

-अनिल नरेन्द्र

राजधानी दिल्ली अभी किसानों के आंदोलन से मुक्त भी नहीं हुईं अब साधु-संतों ने सरकार को राष्ट्रवादी आंदोलन की चेतावनी दे दी है। देश के कईं हिस्सों से साधु-संत दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी मंदिर में इकट्ठा हुए और मठ-मंदिर मुक्ति आंदोलन की शुरुआत की। संतों ने कहा कि हम वेंद्र और राज्य सरकारों को शांति से मनाएंगे, अगर नहीं मानेंगी तो शस्त्र भी उठाएंगे। मंच से कईं अखाड़ों, आश्रमों और मठों के साधु-संतों ने आक्रमक तेवर दिखाए। इस दौरान किसान आंदोलन का भी जिक्र हुआ।

ज्यादातर साधु-संतों का कहना था कि जब मुट्ठीभर किसान दिल्ली के वुछ रास्ते रोककर, जमकर बैठ गए तो सरकार को झुकना पड़ा, फिर भला साधु-संतों से ज्यादा अिड़यल कौन होगा? जरूरत पड़ी तो रास्तों पर साधुसंत अपना डेरा बनाएंगे। यानि दिल्ली को स्पष्ट संदेश है—एक और बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहो। धर्म और आस्था से जुड़े होने की वजह से यह आंदोलन जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी ज्यादा अहम इसके आयोजन का जिम्मा लेने वाले महंत का परिचय है। दरअसल इस आंदोलन के आगाज के लिए कार्यंक्रम का आयोजन अखिल भारतीय संत समिति ने किया। समिति के अध्यक्ष महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत हैं। महंत सुरेंद्र नाथ एक और वैश्विक संस्था, विश्व हिन्दू महासंघ के राष्ट्रीय अंतरिम अध्यक्ष भी हैं। आंदोलन के बारे में बातचीत करते हुए एक और संत ने कहा-जब आस्तिक सरकार सत्ता में आईं तो राम मंदिर बना, लेकिन हमारा आंदोलन राम मंदिर जितना लंबा नहीं जाएगा, क्योंकि अब सत्ता नास्तिकों के हाथ में नहीं है।

उन्होंने कहा—देश के अगले चुनाव से पहले-पहले हम एक व्यापक आंदोलन खड़ा करेंगे ताकि जब दोबारा सरकार बने, तो सबसे पहले मठ-मंदिरों को सरकार के कब्जे से मुक्त करने के लिए कानून बनाए। साधु-संतों ने मंदिरों और मठों को स्वतंत्र कराने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि वेंद्र सरकार कानून बनाकर सरकारी नियंत्रण वाले सभी मठ-मंदिरों को संबंधित संप्रादायों और संस्थानों को सौंपने का निर्णय करे। महंत अवधूत ने कहा कि कर्नाटक में कईं मंदिर समाप्त होने की कगार पर हैं, जबकि मंदिरों से होने वाली कमाईं पर सरकार का कब्जा है, वहीं मंदिरों के बोर्ड में विधर्मियों को सरकारों ने जगह दी है, जिन्हें धर्म और मंदिर से कोईं सरोकार नहीं है। ऐसे में सकार मंदिरों को उनसे संबंधित संप्रादायों और संस्थाओं को सौंपे।

Share it
Top