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पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा

👤 Veer Arjun | Updated on:10 Jan 2022 5:12 AM GMT

पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा

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पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा ऐसी विषम परिस्थिति में हुईं है जब कोरोना के ओमीव््राोन वेरिएंट की तीसरी लहर शुरू हो चुकी है। चुनावी राज्यों उत्तर प्रादेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में कोरोना मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को स्थगित करने के लिए संबंधित राजनीतक पार्टियां तैयार नहीं थीं इसलिए वेंद्रीय चुनाव आयोग को चुनाव टालने का विकल्प छोड़ना पड़ा किन्तु आयोग ने चुनाव प्राचार, मतदान एवं चुनाव प्राव््िराया में शामिल अधिकारियों एवं कर्मियों के बारे में व्यापक विचार भी किया है।

चुनाव प्राचार के लिए रैली में भीड़ जुटाने पर प्रातिबंध हो या वुछ शर्तो के साथ छूट दे दी जाए, पर अंतिम पैसला नहीं हुआ है किन्तु लगता है कि इन चुनावों में आयोग बहुत सतर्वता बरतेगा। इन सभी विधानसभा चुनावों में अभी तक उत्तर प्रादेश पर सभी की उत्सुकता बनी हुईं है किन्तु पंजाब चुनाव भी कम रोचक रहने वाला नहीं है। पंजाब में चुनाव किसान आंदोलन की समाप्ति के बाद हो रहा है जहां की सरकार और पुलिस एक पाटा के कार्यंकर्ताओं पर हमला करने वालों को ही संरक्षण देकर इस बात का प्राोत्साहन देती है कि वह अपनी चुनावी रैली कर ही न सवें। चुनाव आयोग को इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि किसी भी पाटा का चुनाव प्राचार बाधित न हो।

उत्तराखंड और गोवा के चुनाव इसलिए रोचक होंगे क्योंकि इन दोनों राज्यों में कांग्रोस और भाजपा ही एक दूसरे के मुख्य प्रातिद्वंद्वी हैं किन्तु इस बार दोनों ही राज्यों में आम आदमी पाटा चुनाव मैदान में उतरी है। दोनों ही राज्यों में उसे सीटें भले ही न मिलें किन्तु जो भी वोट आम आदमी पाटा को मिलेगा, वह कांग्रोस और भाजपा का ही होगा। गोवा में तृणमूल कांग्रोस के आने से कांग्रोस का वोट कटना स्वाभाविक है और इस बात को कांग्रोस जानती भी है। पािम बंगाल से बाहर टीएमसी की स्वीकार्यंता कितनी प्राभावी होगी इस बात का अनुमान भी गोवा चुनाव के बाद लगाया जा सकेगा। फिलहाल इन चुनावों में आप और टीएमसी की राष्ट्रीय दल के रूप में महत्वाकांक्षा की पूर्ति भी होनी है।

इन चुनावों में देश के सामने वर्चुअल और डिजिटल प्राचार का उदाहरण हमेशा के लिए स्मरणीय होगा। संभव है कि चुनाव आयोग को ज्यादा मेहनत करनी पड़े किन्तु यदि उसका यह प्रायास सफल हो गया तो हमेशा के लिए अनुकरणीय साबित होगा। इन पांच राज्यों का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इन पांच राज्यों से 690 विधायक चुने जाते हैं और इन पांच में से तीन राज्यों में राज्यसभा के 19 सदस्यों का चुनाव होना है। मतलब यह कि 690 विधायक और राज्यसभा के 19 सदस्य 2022 के मध्य में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को प्राभावित करने में सक्षम होंगे।

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