मुसीबत

👤 mukesh | Updated on:15 May 2024 4:49 AM GMT

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आखिर हुआ वही, जिसकी पहले से आशंका थी। मतलब यह है कि प्रावर्तन निदेशालय (ईंडी) अब आम आदमी पार्टी को भी शराब घोटाले में आरोपी बनाने जा रही है। असल में शराब घोटाले के आरोप में लगभग एक साल से जेल में बंद दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मामले में चल रही अहम सुनवाईं के दौरान ईंडी के वकील ने कहा कि वह पूरक आरोप पत्र दाखिल करेगी और उसमें आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाएगी।

ईंडी ऐसा करेगी, इस बात की आशंका तो पहले से ही थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सवाल कि शराब घोटाले की राशि गोवा में है कहां? के जवाब में ईंडी ने जब खुलासा किया कि वह तो गोवा विधानसभा के चुनाव में खर्च हो गईं, तब ईंडी के वकील से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आपने अभी तक आम आदमी पार्टी यानि आप को इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया? मंगलवार को जब ईंडी के वकील से फिर शराब घोटाले में उगाही गईं राशि के बारे में दिल्ली हाईंकोर्ट ने सवाल उठाया, तब ईंडी के वकील ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह आम आदमी पार्टी को शराब घोटाले में आरोपी बनाने जा रही है। ईंडी ने जो वुछ भी खुलासा किया उसकी पृष्ठभूमि देखने की जरूरत है। जांच एजेंसी ने यह बात इसलिए कही क्योंकि वह घोटाले से प्राप्त राशि का एक ही विवरण देती है कि वह गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च की गईं।

अपने इस दावे को और अधिक पुष्ट करने के उद्देश्य से ही ईंडी ने आप के गोवा चुनाव में भाग लेने वाले प्रात्याशियों से भी पूछताछ कर चुकी है। एजेंसी ने उन पूर्व प्रात्याशियों के बैलेंसशीट और चुनावी खर्च के आंकड़ों से मिलान भी कर चुकी है। अब आप को आरोपी बनाए जाने के बाद शराब घोटाले के आरोपी अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए यह दलील दे पाना मुश्किल होगा कि पैसा तो बरामद नहीं हुआ, इसलिए घोटाला भी नहीं हुआ। इसका मतलब है कि अब रुपयों की बरामदगी से बात आगे बढ़ चुकी है। अब सुईं दुराशय पर आकर टिक गईं है। मतलब यह कि केजरीवाल और सिसोदिया को अब यह साबित करना है कि उन्होंने शराब नीति में जो भी बदलाव किया, उसके पीछे उनकी मंशा गलत नहीं थी, जबकि ईंडी के लिए चुनौती होगी कि वह इस बात को साबित करे कि शराब घोटाले में डीलरों को फायदा पहुंचा कर उनसे मोटी रकम वसूली गईं। यही दुराशय अपराध है। यही कारण है कि शराब घोटाले की आपराधिक प्रावृत्ति साबित करने में ईंडी को मशक्कत करनी पड़ी है।

बहरहाल यह तो है अदालती दांवपेंच की आजमाइश। इसका आम लोगों पर असर पड़ेगा या नहीं, यह उसकी समझ पर निर्भर करता है किन्तु इस बात से तो कोईं भी इंकार नहीं कर सकता कि शराब घोटाले का मरा सांप आम आदमी पार्टी के नेताओं के गले में ऐसा पड़ा है जो उसे भले ही मारने में सक्षम न हो किन्तु चैन से रहने भी नहीं देगा।

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