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असली अंडों की ऐसे करें पहचान

👤 admin6 | Updated on:2017-05-12 19:56:51.0

असली अंडों की ऐसे करें पहचान

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कहते हैं संडे हो या मंडे रोज खाओ अंडे... लेकिन क्या आपने सोचा था कि अंडे सेहत बनाने की बजाए आपको बीमार भी कर सकते हैं। सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा... लेकिन यह ख़बर एकदम सच है। आजकल बाजार में धड़ल्ले से नकली अंडे बेचने का कारोबार चल रहा है। बाजार में मिल रहे ये नकली अंडे चीन से आए हैं। इसलिए कुछ लोग इन्हें

'चाइनीज अंडों' का नाम दे रहे हैं। यूं तो शरीर में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी पूरी करने के लिए अंडों से बेहतर कुछ नहीं है। लेकिन जरा संभलकर... बाजार में भारी मात्रा में मौजूद नकली अंडे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

हालात ये है कि मार्केट में मुर्गी के अंडों के साथ-साथ केमिकल से तैयार प्लास्टिक अंडा भी बिक रहा है। ऐसे में जरूरी है नकली और असली अंडों के बीच का अंतर जानना। वैसे तो असली और नकली अंडे देखने में एक जैसे लगते हैं। दोनों के बीच फ़र्क जानना थोड़ा मुश्किल जरूर है। लेकिन हम आपको बताएंगे कुछ आसान तरीके जिससे आप नकली अंडों के सेवन से बच पाएंगे:

ऐसे पहचाने नकली अंडे कोः

नकली अंडे की बाहरी परत थोड़ी चमकीली और खुरदुरी होती है।

नकली अंडे आकार में असली अंडे से छोटे होते हैं।

नकली अंडे का छिलका थोड़ा सख्त होता है। छिलके के अंदर रबरनुमा कोटिंग होती है।

नकली अंडे का भीतरी हिस्सा उबालने के बाद सख्त हो जाता है।

नकली अंडा जल्दी खराब नहीं होता और ना ही इससे गंध आती है।

नकली अंडे को बाहर खुले में रखने पर इसमें मक्खियां, चीटियां, अन्य कीड़े नहीं लगते।

नकली अंडे को बनाने में असली अंडों के मुकाबले कम खर्च आता है।

नकली अंडे को फोड़ने से पहले हिलाने पर अंदर से आवाज़ होती है।

नकली अंडे उबलने के बाद पानी में नहीं डूबते। ये अंडे पानी के ऊपर ही तैरने लगते हैं।

नकली अंडे का यॉर्क फोड़ते ही सेकंड के अंदर सफेद हिस्से में मिलने लगता है।

नकली अंडे का यॉर्क असली अंडे के मुकाबले कुछ ज्‍यादा ही पीला होता है।

नकली अंडे के छिलके को जलाने पर प्‍लास्‍टिक के जलने की बदबू आती है।

तो ऐसे बनता है नकली अंडा

नकली अंडा बनाने के लिए गुनगुने पानी में सोडियम एल्गिनाइट डाला जाता है। इसके बाद जिलेटिन

, बेंजोइक, एल्यूम व अन्य रसायन मिलाकर अंडे का सफेद हिस्सा तैयार किया जाता है। पीला हिस्सा तैयार करने के लिए पीला रंग मिलाया जाता है। इसके बाद सफेद और पीले हिस्से को कैल्सियम क्लोराइड के साथ मिलाकर अंडे को आकार दिया जाता है।

- हंसा कोरंगा पुंडीर

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