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मासूमियत की कब्र से जब जन्मा शैतान...!

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:18 July 2017 6:24 PM GMT

मासूमियत की कब्र से जब जन्मा शैतान...!

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एन.के.अरोड़ा
वह बेहद मासूम था। हर किसी से डरता था। गणित और विज्ञान की किताबों से भी। जाहिर है वह पढ़ाई में कमजोर था। कमजोर सिर्फ इस मायने में कि जो चीज वह नहीं पढना चाहता था,उसे वह सब बिलकुल समझ नहीं आता था। लेकिन वह जो कुछ पढ़ना चाहता था,वह उसे खूब समझ में ही नहीं आता था बल्कि उसकी वह मौलिक कल्पनाएँ तक कर लेता था। उसकी अपनी रुचियाँ थीं। अपने सपने थे। वह चित्रकारी करना चाहता था। बड़ा होकर चर्च में पादरी बनना चाहता था। बच्चों को बप्तिस्मा कराना चाहता था। लेकिन पिता नहीं चाहते थे। पिता चाहते थे वह इंजीनियर बने। ऐसे बड़े बड़े निर्माण करे,जैसे इतिहास में पहले कभी न हुए हों। पिरामिडों से भी ऊँचे और चीन की दीवार से भी ज्यादा विस्तृत। लेकिन उस पर जबरदस्ती लादा गया यह सपना बूमरेंग कर गया यानी उलट गया। उसने किया तो बहुत बड़ा ही लेकिन पिता की इच्छा के मुताबिक बड़े-बड़े निर्माण नहीं, बल्कि इतिहास के सबसे भयावह ध्वंस। उसने क्रूरता और हैवानियत का इतिहास रचा। वह धरती के समूचे अस्तित्व को मिटा देना चाहता था।
यह मासूम बच्चा हिटलर था। जी,हाँ दुनिया का सबसे खूंखार तानाशाह हिटलर। जब वह अभी महज 8 साल का था कि पादरी बनने के सपने देखने लगा था। लेकिन पिता की जिद थी कि बेटा हिटलर तकनीकी शिक्षा हासिल करे। पिता की यह इच्छा नहीं थी,उनका यह आदेश था। उनके सपने के खिलाफ हिटलर ने जैसे ही कदम उ"ाने की कोशिश की,पिता उस पर कहर बनकर टूट पड़े। जबरदस्त पिटाई हुई। इस पिटाई ने हिटलर को हमेशा-हमेशा के लिए जिद्दी बना दिया। अपने आदेश के मुताबिक चलते न देख हिटलर के पिता,उसकी हर रोज पिटाई करने लगे। लगातार मार खाने से हिटलर खूंखार हो गया। जब वह अभी महज 17 साल का था, पिताकी मौत हो गयी। हिटलर को जरा भी दुःख नहीं हुआ। 3 जनवरी 1903 उसकी जिन्दगी का सबसे सुकून भरा दिन था। पिता अब नहीं रहे थे।
हिटलर को हिटलर बनाने में सिर्फ उसके पिता का ही हाथ नहीं था बल्कि उन तमाम लोगों का था जो उस पर अपनी इच्छा थोपना चाहते थे और हिटलर द्वारा सहयोग न दिए जाने के बाद वे उस पर अत्याचार करते थे। हिटलर के गुस्सैल पिता के बाद यह उसके शुरुआती कक्षा के एक अध्यापक थे जो एक दिन हिटलर द्वारा होम वर्क करके न लाने पर गुस्से में कहा, 'गेटआउट। .... दफा हो जाओ। उसी दिन से हिटलर सभ्य दुनिया के सपने से या तो बाहर चला गया या उसे कर दिया और चल पड़ा खूंखार तानाशाह की डगर।
उसने यहूदियों की पूरी कौम का नामोनिशान मिटा देने की खूनी कोशिश की। वह एक ऐसा तानाशाह बन गया। जिसने 12 साल की हुकूमत में पूरी दुनिया को जर्मनी के पीछे चलवाने का सपना देख डाला। हिटलर ने जर्मनी की जनता के दिलो-दिमाग में ही नहीं उसके अवचेतन तक में यहूदियों से नफरत के बीज बो दिए। उसने जर्मनों को नफरत की जंग में पूरी दुनिया को जीत लेने का भरोसा दिलाया। यह हिटलर ही था जिसने अपने खूनी और आक्रामक अंदाज से इतिहास के पन्नो में खून की इबारत लिख डाली। काश उसकी मासूमियत न छीनी गयी होती। काश उस पर अपनी महत्वाकांक्षा के किसी ने सपने न लादे होते।
20 अफ्रैल 1889 को हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था। हिटलर शब्द का मतलब होता है -जिद्दी, क"ाsर, निडर, सख्त। हिटलर ने इसको एक और पर्यायवाची दिया खूंखार। आज हिटलर शब्द के मायनों में खूंखार भी जुड़ गया है। अपनी माँ क्लारा पीता अलाइस के 6 बच्चो में हिटलर चौथी संतान था। हिटलर के बारे में कहा जाता है कि वह बहुत मासूम और शर्मीला था। लेकिन पिता के सपने और फ्रिय अध्यापक की क"ाsरता ने उसे हिटलर बना दिया। अपनी मौत से पहले तक हिटलर के पिता उस पर इतनी ज्यादती कर चुके थे कि वह हर मायने में विद्रोही हो चुका था। पिता की मौत के बाद हिटलर पूरी तरह बेकाबू हो गया। वह स्कूल में खतरनाक हरकतें करने लगा। जाहिर है उसे निकाला ही जाना था। उसे निकाल दिया गया, लेकिन पेंटिंग से हिटलर के लगाव ने उसके लिए कॅरियर का दरवाजा खोल रखा था, साल 1907 में अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में एडमिशन लेने के लिए, वह विएना पहुंच गया। लेकिन यहाँ हिटलर की किस्मत ने धोखा दे दिया, हिटलर को यहूदी टीचर ने बोला तुम्हे अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में एडमिशन नहीं मिल सकता है, क्योंकि तुम्हारी पेंटिंग में सिर्फ पहाड़ों नदी,, नालो की तस्वीरें है। तुम इंसानो की तस्वीरें नहीं बना सकते इसलिए यहाँ से दफा हो जाओ।
हिटलर को इस अपमान ने अंदर तक हिलाकर रख दिया, यही से उसके अंदर यहूदियों के खिलाफ नफरत का बीज पड़ गया। इसी बीच 21 दिसम्बर 1960 को हिटलर की 47 वर्षीय माँ क्लारा की कैंसर से मौत हो गई। अपनी माँ को बेइंतहा प्यार करने वाला हिटलर माँ की मौत से पूरी तरह टूट गया। हिटलर इस बात से बहुत ही गुस्से में था कि जो डॉक्टर उसकी माँ का इलाज कर रहा था वो एक यहूदी था। एक किताब में दावा किया गया है कि हिटलर मान बै"ा था कि यहूदी डॉक्टर एडवर्ड ब्लोच ने उसकी माँ को जहर दे दिया है। वही उसकी माँ का कातिल है, उसकी नस-नस में भरी यहूदियों से नफरत की एक बहुत बड़ी वजह इस बात को भी माना जाता है।

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