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जब दुनिया की सबसे खूबसूरत नृत्यांगना को गोलियों से भून दिया गया

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:2017-07-07 19:23:06.0

जब दुनिया की सबसे खूबसूरत नृत्यांगना को   गोलियों से भून दिया गया

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एन.के. अरोड़ा
वह फौजी नहीं बल्कि कहना चाहिए वे फौजी उसे गोलियों से भून भी रहे थे भी और खामोशी से जार-जार रो भी रहे थे।एक तो मानों भूल ही गया अपने जज्बात को दबाना और उसके आंसू ढलककर उसके गालों में गिर गये. लेकिन इससे कोई नतीजा नहीं बदल जाना था। मुश्किल से 45 सेकेण्ड में तीन फौजियों के उस आर्म्ड स्क्वायड ने दुनिया की सबसे खुबसूरत नृत्यांगना को गोलियों से छलनी कर दिया था। इसके बाद उन्होंने रस्मी तौर पर उस छलनी देह को सैल्यूट मारी और सावधानी की मुद्रा में ही अपनी जगह पर 180 डिग्री घूमे। दूर खड़े अफसर को सैल्यूट किया और बिलकुल मशीनी अंदाज में बैरक की ओर चले गए ताकि वहां से लाश को हटाकर सफाई की जा सके।
यह 24 जुलाई 1917 की एक उदास सुबह थी। जब लंदन में दुनिया की सबसे खूबसूरत नृत्यांगना को जासूसी के आरोप में फायरिंग स्क्वायड द्वारा गोलियों से भून दिया गया।जी,हाँ हम माताहारी की ही बात कर रहे हैं। मार्गरीटा जीली उर्फ माताहारी की गिनती दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं और सबसे चर्चित महिला जासूसों में होती है। माताहारी का अर्थ होता है भोर का तारा। यह डच सुंदरी भोर के तारा की ही माफिक आकर्षक मगर बदनसीब थी। उस पर आरोप लगता है कि उसने जासूसी के जरिए फ्रथम विश्व युद्ध की दिशा बदलने की नाकाम कोशिश की थी। उसे जासूसी के इतिहास का अब तक का सबसे ज्यादा चर्चित सेक्स जासूस माना जाता है। एक डच फौजी अधिकारी की पत्नी माताहारी ने जावा में हवाई नृत्य सीखकर फ्रांस की राजधानी पेरिस में फौजी अफसरों की नींद हराम कर दी थी।वह अब तक के इतिहास की सबसे कामोत्तेजक कैबरे डांसर थी। उसके नृत्य के दीवाने फौजी उसे सेना के राज ऐसे दे देते थे जैसे रीझकर मामूली तोहफे दे रहे हों। इन अफसरों से फौजी रहस्य लेकर कहते हैं वह जर्मनी के अफसरों को पहुंचाती थी। जर्मन जासूसों की सूची में माताहारी का नाम का कोड एच-21 था।
हालांकि यह आज तक विवाद का विषय बना है कि माताहारी पेरिस, बर्लिन और मैड्रिड में जासूसी करने के बावजूद भी क्या वास्तव में कभी कोई महत्वपूर्ण सूचना हासिल कर सकी थी? बावजूद उसे वह सजा मिली जो बहुत खतरनाक जासूसों को मिलती है.गन स्क्वायड के सामने उसे खड़ा किया गया और 45 सेकेण्ड के भीतर उन्होंने उसके गोलियों से चीथड़े उड़ा दिए.उसे करीब 65 गोलियां मारी गयी थीं वो भी सिर्फ 7 फिट की दूरी से.सन 1916 में हालैंड जाते हुए उसे फालमाउथ, इंग्लैंड में ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस ने गिरफ्तार किया था और लंदन ले जाकर चेतावनी दिया था कि अगर उसने रूप-जाल में फौजी अफसरों को फांसना जारी रखा तो उसे भयानक सजा दी जायेगी। लेकिन कहते हैं माताहारी ने इस चेतावनी को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया .नतीजतन उस नतीजे को पहुँची.
माताहारी का जन्म 7 अगस्त 1876 को हालैंड के लीयूवार्डेन नामक नगर में हुआ था। उसके पिता का नाम एडम जीली था। जब वह केवल 18 वर्ष की थी तो उसने अपने से दो गुने बड़ी उम्र के कप्तान मेक्लियाड से विवाह कर लिया। कई जगहों पर उसका नाम रूडोल्पफ आता है। मेक्लियाड उर्फ रूडोल्फ स्काटलैंड का निवासी था और डच फ्रादेशिक सेना में काम करता था। विवाह के बाद ये दोनों एमस्टरडम के एक शानदार बंगले में रहने लगे। वहीं उनके एक पुत्र का जन्म हुआ। कप्तान को जुए की बुरी आदत थी। इसलिए उस पर कर्ज चढ़ता चला गया। यहीं से माताहारी को मजबूरन एक नये कुत्सित जीवन की शुरुआत करनी पड़ी। उसने एक से" को अपने फ्रेम जाल में फंसाया अपने से ज्यादा अपने फ्रेमी और पति की जिन्दगी के ऐश के लिए.उसने से" से धीरे-धीरे बड़ी रकमें ऐं"नी शुरू कर दी। कुछ समय बाद माताहारी के एक बेटी पैदा हुई। शायद उसी से" की । उसके पति और सैन्य कप्तान का तबादला जावा हो गया।
यहां भी उसका दांपत्य जीवन पटरी में नहीं लौटा। आखिरकार जावा से लौटने के बाद माताहारी ने उससे तलाक ले लिया। सन 1903 में वह पेरिस चली गयी। वहां माडलिंग और नृत्य करके रोजी चलाने लगी। फ्रथम विश्व युद्ध फ्रारंभ होने तक वह पेरिस, बर्लिन, वियना, रोम और लंदन के नृत्य मंचों पर अपना जादू बिखेरती रही। अब तक वह बहुत लोकफ्रियता हासिल कर चुकी थी । विशिष्ट व्यक्तियों के बीच लोकफ्रिय होने में माताहारी के कामोत्तेजक नृत्य ने उसकी बहुत बड़ी मदद की। माना जाता है कि माताहारी ने लोगों को बता रखा था कि उसका जन्म दक्षिण भारत के मालाबार तट पर एक नर्तकी के घर हुआ था और उसके जन्म के समय ही उसकी माता की मृत्यु हो गयी थी।
उसने यह बात भी फैला रखी थी कि उसका बचपन का नाम माताहारी है और उसका लालन-पालन एक शिव मंदिर में हुआ था।काले बालों वाली सुंदरी माताहारी लगती भी बिलकुल भारतीय थी । उसकी लोकफ्रियता धीरे-धीरे शिखर छूने लगी। फ्रथम विश्व युद्ध आरंभ होने के कुछ वर्ष पहले माताहारी ने लोरचि के एक जर्मन जासूस स्कूल में विशेष फ्रशिक्षण फ्राप्त किया था। फ्रथम विश्व युद्ध के समय माताहारी बर्लिन के पुलिस फ्रमुख के साथ जीप में बै"कर जर्मनी की सड़कों पर घूमती-फिरती थी। लेकिन युद्ध छिड़ जाने के बावजूद वह सन 1915 में फ्रांस फांस लौट आयी। वहां आकर उसने नृत्य छोड़ दिया और एक फैशनेबल सेलेब्रिटी महिला के रूप में मशहूर हो गयी।
मगर माताहारी के फ्रांस लौटने से पहले ही तिंदेफ्रांस के गुप्तचर विभाग को उसके कार्यकलापों की पूरी जानकारी फ्राप्त हो चुकी थी। विभाग जानता था कि जर्मनी के पुलिस फ्रमुख, वहां के राजकुमार और दूसरे अधिकारियों के साथ उसके गहरे संबंध हैं, किंतु इसका कोई सबूत उनके पास न था, साथ ही माताहारी वहां के बड़े लोगों के बीच इतनी लोकफ्रिय थी कि उस पर हाथ डालना सांप के बिल में हाथ डालने जैसा था। अपनी इस छवि की बदौलत माताहारी वर्षों तक फ्रांस के गुप्तचर विभाग को छकाती रही । उसकी सभी चालों को नाकामयाब करती रही। लेकिन अंततः 13 फरवरी 1917 को पेरिस के एक होटल में उसे गिरफ्रतार कर लिया गया जहां वह मैड्रिड से लौटने के बाद आकर रुकी हुई थी। मैड्रिड में उसने जर्मन गुप्तचर विभाग के कई वरिष्" अधिकारियों से गुप्त मुलाकातें की थीं।
उसके विरुद्ध लगाये गये आरोपों के सबूत के रूप में उस तार की नकल पेश की गयी जो जर्मन सेना के फ्रधान कार्यालय से मैड्रिड स्थित दूतावास को भेजा गया था। तार में संदेश दिया गया था कि एच-21 माताहारी का गुप्त कोड नंबर को पेरिस लौटने पर 15000 मार्क दे दिये जाएं। गुप्तचर विभाग को इस बात का भी फ्रमाण मिल गया कि सन 1915 में फ्रांस आने से पहले माताहारी ने जर्मन गुप्तचर विभाग से 30 हजार मार्क फ्राप्त किए थे। माताहारी के संबंध फ्रांसीसी, ब्रिटिश और रूसी उच्चाधिकारियों से भी थे। उनसे ही वह महत्वपूर्ण सैनिक सूचनाएं फ्राप्त करके जर्मन गुप्तचर विभाग को भेजती थी। उसका सूचनाएं भेजने का तरीका भी बड़ा मौलिक था। वह अपनी बेटी के नाम बड़े ही मासूम से फ्रतीत होने वाले पत्रा लिखती थी किंतु उस भाषा में ही अनेक गुप्त संदेश छुपे रहते थे। उस पर लगाये गये आरोपपत्र में उसे 50 हजार सैनिकों की मौत के लिए उत्तरदायी "हराया गया था। इन सभी आरोपों के तहत 15 अक्टूबर 1917 को गोली मारकर माताहारी की जीवन लीला समाप्त कर दी गयी तथा इसके साथ ही जासूसी की दुनिया का 'भोर का तारा' सदा के लिए अस्त हो गया।

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