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आयुध नियंत्रण से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पारित

👤 Veer Arjun | Updated on:9 Dec 2019 11:31 AM GMT

आयुध नियंत्रण से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पारित

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नयी दिल्ली । हथियार कानून का उल्लंघन करने पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान करने तथा कुछ नये तरह के अपराधों को इस कानून के दायरे में लाने वाला विधेयक सोमवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया।

सदन में करीब ढाई घंटे तक विधेयक पर चली चर्चा के बाद सरकार ने विधेयक में पाँच संशोधन किये। सरकार की ओर से गृहमंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत सभी पाँच संशोधनों को सदन ने मंजूरी प्रदान की जबकि विपक्ष की ओर से प्रस्तुत 17 संशोधन अस्वीकृत हो गये।

शाह ने चर्चा का जवाब देते हुये कहा कि इसमें खिलाड़ियों और सेना के वर्तमान या सेवानिवृत्त अधिकारियों के हथियार रखने अधिकारों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। खिलाड़ियों के लिए हथियारों की संख्या, असलहों की मात्रा और लाइसेंस के प्रकार में वृद्धि की गयी है। पूर्व तथा मौजूदा सैन्य अधिकारियों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही एक व्यक्ति को दो हथियारों के लिए लाइसेंस लेने का अधिकार होगा।

उन्होंने बताया कि पुलिस तथा सशस्त्र बलों से हथियार छीनने या चुराने, हथियारों के अवैध निर्माण, बिक्री एवं गैर-कानूनी आयात-निर्यात, तस्करी और सिंडिकेट को हथियारों की अवैध रूप से आपूर्ति करने वालों के लिए अधिकतम जीवन भर के कारावास का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा लाइसेंस की वैधता की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल की गयी है। साथ ही ऑनलाइन लाइसेंसे प्राप्त करने यानी ई-लाइसेंस की भी व्यवस्था की जायेगी।

प्रतिबंधित शस्त्र और गोला-बारूद रखने वालों के लिए पाँच से दस तक के कारावास की सजा होगी। छोटे अपराधों के लिए सजा की अवधि पहले एक से तीन साल तक थी, जिसे बढ़ाकर पाँच साल किया गया है।

शादी-विवाह तथा अन्य किसी विशेष मौकों पर की लाइसेंसी हथियारों से की जाने वाली हर्ष फायरिंग को इन संशोधनों के जरिये विनियमित करने के बारे में शाह ने कहा कि यह गलत धारणा है कि ऐसे मौकों पर लाइसेंसी हथियारों से किसी की जान नहीं जाती। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 उत्तर प्रदेश में 191, बिहार में 12 और झारखंड में 14 लोगों की जान लाइसेंसी हथियारों से की गयी हर्ष फायरिंग में गयी है। अब ऐसे मामलों में भी अपराधियों को जेल जाना होगा।

उन्होंने कहा कि अब फोन करने के बाद ग्रामीण इलाकों में पुलिस को मौके पर पहुँचने में औसतन 30 मिनट और शहरी इलाकों में 10 मिनट का समय लगता है, इसलिए लोगों को हथियार रखने की जरूरत नहीं है।

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