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लॉकडाउन में ढील देने से कोरोना के केस बढ़े हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं : मुख्यमंत्री

👤 Veer Arjun | Updated on:25 May 2020 7:56 AM GMT

लॉकडाउन में ढील देने से कोरोना के केस बढ़े हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं : मुख्यमंत्री

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नई दिल्ली । मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लॉकडाउन में ढील देने से कोरोना के केस बढ़े हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं है। क्योंकि हमें कोशिश करनी है कि मौत के आंकड़े कम से कम रहें। हमें कोशिश करनी है कि इतने गंभीर केस न हों कि मरीजों से अस्पताल ही भर जाएं।

केजरीवाल ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि दिल्ली में कोरोना के अब तक 13 हजार से अधिक केस हैं, लेकिन 6 हजार से अधिक लोग ठीक भी हुए हैं। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 3829 बेड हैं, इनमें अधिकतर में ऑक्सीजन की सुविधा है। इनमें से डेढ़ हजार बेड इस्तेमाल हुए हैं, बाकी खाली हैं। हमारे पास 200 वेंटिलेटर हैं, जिनमें से 11 इस्तेमाल हुए हैं। इसके साथ ही 117 प्राइवेट अस्पतालों के 20% बेड्स भी कोरोना के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसलिए घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

केजरीवाल ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों में 600 से अधिक बेड कोरोना के रिजर्व हैं। इसके अलावा आज से 2000 से अधिक बेड प्राइवेट अस्पताल में रिजर्व होंगे। दिल्ली में ऐसे केस अधिक आ रहे हैं जिनमें लक्षण काफी कम हैं या फिर कोई लक्षण ही नहीं हैं। जिनमें लक्षण काफी कम हैं उन्हें हम घरों में रख रहे हैं। अभी तीन हजार से अधिक लोगों का घर पर ही इलाज जारी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 मई को लॉकडाउन में ढील की घोषणा की गई थी, 9755 केस थे और आज 13 हजार से अधिक केस हैं। एक हफ्ते में साढ़े तीन हजार मरीज बढ़े हैं, जबकि ढाई हजार ठीक होकर चले गए। लेकिन, अस्पताल में सिर्फ ढाई सौ लोग आए बल्कि बाकी लोग कम लक्षण के कारण घर पर ही हैं।

केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल ने कोरोना मरीज को बेड नहीं दिया, ऐसा नहीं हो सकता है। हमने उस अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि क्यों न उसका लाइसेंस रद्द किया जाए? किसी भी मरीज के साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं। जल्द ही एक ऐसा सिस्टम लाएंगे, जिससे लोगों को ये पता चल सके कि किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन में ढील देने के हफ्तेभर बाद हमने परिस्थिति का आकलन किया। इससे हमने जाना कि परिस्थिति नियंत्रण में है। कोरोना होता रहे और मरीज़ ठीक होते रहे तो कोई दिक्कत नहीं है। हमारा मकसद है कि मौतों को रोकना है।

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