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आर्थिक हालात में सुधार के दिखे प्रारंभिक संकेत, और बेहतर होगी स्थिति: वित्त मंत्रालय

👤 mukesh | Updated on:7 July 2020 5:51 AM GMT

आर्थिक हालात में सुधार के दिखे प्रारंभिक संकेत, और बेहतर होगी स्थिति: वित्त मंत्रालय

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नई दिल्‍ली। अर्थव्‍यवस्‍था के विभिन्‍न क्षेत्रों में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। कोविड-19 के संक्रमण से प्रभावित अर्थव्यवस्था में सुधार एवं विकास के रास्ते पर लाने के लिए अनुकूल नीतिगत उपायों के साथ आने वाले वक्‍त में और तेजी से सुधार की उम्मीद है। वित्‍त मंत्रालय की जारी एक रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है। बता दें कि अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की जून में जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत की वृद्धि दर शून्य से नीचे 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। ये अप्रैल, 2020 में जारी आईएमएफ के अनुमान के मुकाबले 6.4 फीसदी कम है।

वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जून महीने के लिए जारी वृहत आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण को लेकर जारी अनिश्चितता और दुनियाभर के अन्य देशों में वृहत आर्थिक मंदी को देखते हुए आईएमएफ ने वैश्विक वृद्धि के अनुमान को कम कर (-) 4.9 फीसदी कर दिया है। ये अप्रैल, 2020 के मुकाबले 1.9 फीसदी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि, मई और जून में आर्थिक स्थिति में सुधार के शुरूआती संकेत दिखे हैं।

मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा है कि बिजली और ईंधन खपत, वस्तुओं का एक राज्य के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्‍यों में आने-जाने, खुदरा वित्तीय सौदों जैसे क्षेत्रों में तेजी देखी जा रही है। इसमें ये भी कहा गया है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), पोर्टफोलियो निवेश बढ़ने और तेल के दाम में नरमी रहने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार 19 जून को 505.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे किसी प्रकार के बहारी झटके से निपटने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के मुता‍बिक सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह भी जून में 90,917 करोड़ रुपये रहा, जो मई के मुकाबले 46 फीसदी और अप्रैल के मुकाबले 181 फीसदी ज्‍यादा है। मंत्रालय के अनुसार मार्च में सरकार और आरबीआई के कदम से नीतिगत माहौल अनुकूल बना। साथ ही दोनों महामारी फैलने के मद्देनजर आर्थिक नरमी का सही अंदाज लगाने में कामयाब रहे। इसके अलावा आर्थिक नीति के मार्चे पर बदलाव के साथ प्रोत्साहन पैकेज से सुधारों को ऐसे समय में गति मिली है, जब कोविड-19 संकट ने सरकार के राजकोषीय स्थिति को बिगाड़ा और लोगों की व्यय क्षमता को भी प्रभावित किया है। (एजेंसी, हि.स.)

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