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मथुरा जेल से रिहा हुए डॉ कफील खान, बोले- किसी दूसरे केस में फंसा सकती है उप्र सरकार

👤 Veer Arjun | Updated on:2 Sep 2020 2:48 AM GMT

मथुरा जेल से रिहा हुए डॉ कफील खान, बोले- किसी दूसरे केस में फंसा सकती है उप्र सरकार

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मथुरा । इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के करीब 12 घंटे बाद डॉक्टर कफील खान आखिरकार मंगलवार देर रात मथुरा जेल से रिहा कर दिए गए। उन पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ भाषण को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाई गई थी। हाई कोर्ट ने हालांकि, अपने फैसले में उनकी गिरफ्तारी को न केवल गैरकानूनी कहा बल्कि तत्काल रिहाई के आदेश भी दिए थे।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि डॉ कफील का भाषण पहली नजर में कही से भी नहीं लगता कि ये उकसान की कोशिश है। कफील के वकील इरफान गाजी ने बताया कि मथुरा जेल प्रशासन ने रात करीब 11 बजे उन्हें यह सूचना दी कि डॉक्टर कफील को रिहा किया जा रहा है। उसके बाद रात करीब 12 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया।

'सरकार मुझे फिर किसी मामले में फंसा सकती है'

जेल से रिहाई के बाद कफील ने कहा कि वह उन तमाम शुभचिंतकों के हमेशा आभारी रहेंगे जिन्होंने उनकी रिहाई के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें अब भी रिहा करने को तैयार नहीं था लेकिन लोगों की दुआ की वजह से वह रिहा हुए हैं, मगर आशंका है कि उत्‍तर प्रदेश सरकार उन्हें फिर किसी मामले में फंसा सकती है।

कफील ने साथ ही कहा कि वह अब बिहार और असम के बाढ़ ग्रस्त इलाकों में जाकर पीड़ित लोगों की मदद करना चाहेंगे। उन्होंने कहा, 'रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने कहा था कि राजा को राजधर्म निभाना चाहिए लेकिन उत्तर प्रदेश में राजा राज धर्म नहीं निभा रहा बल्कि वह 'बाल हठ' कर रहा है।'

कफील ने कहा कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुए ऑक्सीजन कांड के बाद से ही सरकार उनके पीछे पड़ी है और उनके परिवार को भी काफी कुछ सहन करना पड़ा है।

बेटे की रिहाई पर मां ने जताई खुशी

डॉक्टर कफील की मां नुजहत परवीन ने कहा कि अब वह एक बार फिर अपने बेटे को देख सकेगी, उसे छू सकेगी। उन्होंने कहा, मैं बहुत खुश हूं कि मेरा बेटा जेल से बाहर आ रहा है। मेरा बेटा अच्छा व्यक्ति है और वह कभी देश या समाज के खिलाफ नहीं जा सकता है।

बता दें कि कफील सीएए के खिलाफ पिछले साल अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में रासुका के तहत करीब साढ़े सात महीने से मथुरा जेल में बंद थे। उन्हें जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। फरवरी में उन्हें अदालत से जमानत मिल गयी थी, मगर जेल से रिहा होने से ऐन पहले 13 फरवरी को उन पर रासुका के तहत कार्यवाही कर दी गयी थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह की पीठ ने कफील को तत्काल रिहा करने के आदेश दिये थे। हालांकि कफील की तत्काल रिहाई नहीं हो सकी थी।

ऐसे में कफील को फिर से किसी और इल्जाम में फंसाने की साजिश से आशंकित परिजन ने बुधवार को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने का फैसला किया था। कफील अगस्त 2017 में भी गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से आक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में मरीज बच्चों की मौत के मामले के बाद भी चर्चा में आये थे।

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