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किसान आंदोलन : कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने फूंका केंद्र और कारपोरेट घरनों का पुतला

👤 Veer Arjun | Updated on:5 Dec 2020 9:14 AM GMT

किसान आंदोलन : कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने फूंका केंद्र और कारपोरेट घरनों का पुतला

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चंडीगढ़ । कृषि कानूनों को निरस्त कराने और एमएसपी को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर हरियाणा में किसानों ने शनिवार को केंद्र सरकार और कारपोरेट घरानों का पुतला फूंका। मांगे न मानने पर किसानों की ओर से 8 दिसम्बर को भारत बंद तथा दिल्ली सील करने का ऐलान किया गया है।

शनिवार को किसान संगठनों के आह्वान पर प्रदेशभर में किसानों ने एकत्रित होकर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों का विरोध जताया। किसान के समर्थन में अब कर्मचारी संगठन भी उतर आए हैं। चरखी-दादरी की रोडवेज यूनियन ने चक्का जाम करने का अल्टीमेटम दिया है, वहीं रोडवेज कर्मियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने किसानों की मांग नहीं मानी तो वे दिल्ली भी कूच करेंगे। हरियाणा के सबसे बड़े गांव सिसाय में किसानों ने केंद्र सरकार और कारपोरेट घरनों का पुतला फूंककर विरोध जताया और दिल्ली कूच का फैसला लिया।

फतेहाबाद में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान-मजदूरों ने एकत्रित होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने दिल्ली कूच के दौरान किसानों पर पानी की बौछारें व आंसू गैस का इस्तेमाल करने की निंदा और प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। भिवानी में हरियाणा सब्जी मंडी आढ़ती संगठन ने किसानों के आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। जींद में किसान संगठनों, अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू ने गांवों में प्रदर्शन किया।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि सरकार से आज तीसरे दिन वार्ता हो रही है। यदि आज की वार्ता में कोई हल नहीं निकला तो तीनों कृषि कानूनों के विरोध में आठ दिसंबर को भारत बंद किया जाएगा और दिल्ली की सभी सीमाएं सील होंगी। किसानों की एक ही मांग है, तीनों कृषि कानूनों को लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर रद्द किया जाए और 23 फसलों पर एमएसपी सुनिश्चित की जाए। देशभर से किसान आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। खासकर हरियाणा की खाप पंचायतें आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। खाप पंचायतें किसानों के लिए खाद्य सामग्री भी भेज रही हैं।

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