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क्यों शत प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली अपना रहा है भारत

👤 admin 4 | Updated on:2017-05-14 15:57:57.0

क्यों शत प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली अपना रहा है भारत

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पल्लव बागला

नई दिल्ली। यह बात थोड़ी हैरान कर सकती है कि दुनिया के विभिन्न लोकतंत्रों में मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पसंदीदा विकल्प नहीं है और अधिकतर विकासोन्मुखी देश मतपत्रों ःबैलटः से चुनाव कराने के पक्षधर हैं।

आज केवल करीब दो दर्जन देशों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का तरीका अपना रखा है। और इस मामले में निसंदेह भारत अग्रणी है। साल

2014 में देश की आधी अरब से अधिक आबादी ने ईवीएम से वोट डाला था जो एक विश्व रिकार्ड था।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में देशभर में 9,30,000 मतदान केंद्रों पर कुल 14 लाख ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने कुछ दिन पहले ऐलान किया था कि भविष्य में सभी चुनाव सत्यापन योग्य मतदान पर्ची ःपेपर ट्रेलः का इस्तेमाल करके कराये जाएंगे।

उन्होंने कहा था, "आयोग भविष्य में सभी संसदीय और राज्य विधानसभा चुनावों में शत प्रतिशत वोटर वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल ःवीवीपीएटीः का इस्तेमाल सुनिश्चित करेगा। ईवीएम मशीनों की एक प्रतिशत वीवीपीएट पर्चियों की गिनती की जाएगी।

''

इससे ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ की आशंका काफी हद तक दूर हो जाएगी।

आज ईवीएम मशीनों को लेकर गहरी बहस छिड़ी हुई है।

कम से कम 24 देशों में किसी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग या इस तरह की अन्य प्रणाली को अपनाया गया है।

इनमें एस्टोनिया जैसे छोटे देशों से लेकर सबसे पुराना लोकतंत्र अमेरिका तक शामिल हैं। लेकिन भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहां शत प्रतिशत ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता है।

जर्मनी जैसे कुछ देशों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली अपनाई थी और बाद में मतपत्र प्रणाली पर लौट गये।

किसी न किसी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग अपनाने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम

, ब्राजील, कनाडा, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, भारत, आयरलैंड, इटली, कजाखस्तान, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, फिलीपीन, रोमानिया, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, स्कॉटलैंड और वेनेजुएला हैं।

अमेरिका 241 साल पुराना लोकतंत्र है लेकिन यहां अब भी कोई एक समान मतदान प्रणाली नहीं है। कई राज्य मतपत्रों का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ वोटिंग मशीनों से चुनाव कराते हैं। आज अमेरिका के सामने एक अलग तरह की चुनौती है जहां इस तरह के आरोप उ"

s हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव में परोक्ष रूप से रूसी हाथ था जिसमें मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कई तरह की साइबर हैकिंग की गयी। हालांकि चुनावी प्रक्रिया में किसी सीधी छेड़छाड़ का अब तक कोई साक्ष्य नहीं मिला है।

अमेरिका में इस्तेमाल की गयी कई ईवीएम इंटरनेट से जुड़ी होती हैं। इससे लोगों को घर से मतदान की सुविधा मिल जाती है लेकिन इन उपकरणों में अन्य नेटवर्क वाले उपकरणों की तरह सेंध लगने की आशंका होती है।

भारत में संसद ने वर्ष

1988 में एक कानून पारित किया था जिसमें ईवीएम के इस्तेमाल को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया गया।

भारत में ईवीएम सीधे मतदान दर्ज करने वाली मशीन है जहां मतदाता को वोट डालने के लिए एक निश्चित केंद्र पर जाना होता है।

मशीन में कई तरह की सीलिंग से सुनिश्चित किया जाता है कि किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो। मशीनों के लिए एक दोहरी रैंडमाइजेशन ःबिना क्रम के मिलाने कीः प्रक्रिया अपनाई जाती है जिससे किसी के लिए भी यह जानना असंभव हो जाता है कि किस विधानसभा में किस मशीन का उपयोग किया जाएगा।

मशीनों पर उम्मीदवारों की सूची की अंतिम स्थिति भी चुनाव से पहले नामांकन वापसी के आखिरी दिन तक पता नहीं होती और इससे मशीनों में छेड़छाड़ एक तरह से नामुमकिन हो जाती है। चुनाव आयोग ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम में छेड़छाड़ की संभावना को दर्शाने के लिए

'चुनौती' के रूप में राजनीतिक दलों को अवसर देने का भी वादा किया है। ऐसा लगता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए व्यापक अभियान चला रही आम आदमी पार्टी चुनाव आयोग की इस
'चुनौती' में खुद को शामिल नहीं करने की योजना बना रही है जहां वह शब्दों को लेकर चुनाव आयोग से उलझी हुई है और चाहती है कि इस 'चुनौती' को 'हैकाथन' कहा जाए।

पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल कह चुके हैं कि चुनाव आयोग ने हैकाथन पर कदम पीछे खींच लिया है।

वैसे सामान्य बोलचाल में कोई अंतर नहीं है। हैकाथन शब्द इंटरनेट के जन्म के बाद प्रभाव में आया और नेटवर्क से संबंधित आयोजनों के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।

भारत के मामले में चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि ईवीएम ऐसी स्वचालित मशीनें हैं जो इंटरनेट या अन्य किसी भी तरीके से एक दूसरे से संवाद नहीं कर सकतीं।

इस विशिष्ट गुण के कारण ईवीएम में उसी तरह सेंध लगाना मुश्किल हो सकता है जितना अन्य किसी भी मशीन में।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक फैसले में ईवीएम को 'राष्ट्रीय गौरव' करार दिया था और कहा था कि भारतीय निर्वाचन प्रणाली 'वैश्विक स्वर्णिम मानदंड' वाली है।

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