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ईकॉमर्स मार्केटप्लेस मॉडल भारतीय लघु व मध्यम उद्यमों को विश्व स्तर पर पहुंचाएगा

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:2018-07-21 14:05:40.0
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चंडीगढ़ (सुनीता शास्त्राr)। वैश्वीकरण ने सम्पत्ति के निर्माण, रहन-सहन के स्तर में सुधार में योगदान दिया है और विभिन्न पकार की वस्तुओं की खपत को मुमकिन किया है, रोजगार पैदा किया है और विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में आय का अभिसरण (कन्वर्जेंस) संभव हुआ है। इंटरनैट ने लघु व मध्यम उद्यमों को सशक्प किया है कि वे ज्यादा बड़े बाजारों में बित्रढाr कर सकें और अपने व्यापार को ज्यादा तेज गति से बढ़ा सकें। अब जब 80 पतिशत से अधिक वैश्विक व्यापार ग्लोबल सप्लाई चेनों के माध्यम से हो रहा है, तो एजेंडा यह होना चाहिए कि इन 'ग्लोबल वैल्यू चेनों' तक लघु व मध्यम उद्योगों की पहुंच को किस तरह से सुगम किया जाए। सपल लघु व मध्यम उद्यम अमेजक्वन, ?लपकार्ट जैसे ईकॉमर्स प्लैटपॉर्मों से जुड़ रहे हैं; ये प्लैटपॉर्म लघु व मध्यम उद्योगों के उत्पादों के लिए देश-विदेश में बड़े बाजारों की राह खोल रहे हैं। ईकॉमर्स मार्केटप्लेस प्लैटपॉर्म लघु व मध्यम उद्यमों के वित्रढsताओं के दृष्टिकोण से अधिकतम योगदान करता है, जैसा कि ईबे के मामले में है, चुनिंदा एपीईसी अर्थव्यवस्थाओं में, इसके पंजीकृत ऑनलाइन वित्रढsता दुनिया भर में निर्यात करने में सक्षम हैं, यूएस में 95 पतिशत ऑनलाइन वित्रढsता निर्यात करते हैं जबकि ऑपलाइन कारोबार करने वाले लघु व मध्यम उद्यमों में 5 पतिशत से कम निर्यात करते हैं।एपीईसी अर्थव्यवस्थाओं में थाईलैंड, चीन, कोरिया और चिली ऐसे देश हैं जहां ऑपलाइन लघु व मध्यम उद्योगों में निर्यात पतिशत अपेक्षाकृत ऊंचा है, लेकिन 100 पतिशत ऑनलाइन वित्रढsता जो निर्यात करते हैं उनके मुकाबले यह अब भी कम है।

इसके अलावा जो लघु व मध्यम उद्यम ऑनलाइन बित्रढाr करते हैं वे पार?परिक ढंग से कारोबार करने वालों के मुकाबले ज्यादा बाजारों तक पहुंचने में सक्षम होते हैं। ईकॉमर्स प्लैटपॉर्म का उपयोग करते हुए कंपनियां औसतन 30 भिन्न अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचने में सक्षम हैं।लघु व मध्यम उद्योगों को निरंतर विभिन्न चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है जिनमें खराब इंपास्ट्रक्पर व उत्पादन क्षमता से लेकर पर्याप्त धन की कमी, इनोवेशन एवं टेक्नोलॉजी संबंधी कमियां तक शामिल हैं। नवोन्मेष, ईकॉमर्स व टेक्नोलॉजी को आगे ले जाने में लघु व मध्यम उद्यम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं इसलिए यह अत्यावश्यक है कि वे डिजिटलीकरण को अपनाएं जिससे एक खुली व एकीकृत अर्थव्यवस्था में उनकी सहभागिता बढ़े। वर्तमान संदर्भ में यह और भी अहम है, पतिस्पर्धा का बढ़ता दबाव और तकनीकी बदलाव की तेज गति की मांग करती है, इनोवेटिव बर्ताव तथा रणनीतिक संसाधनों तक पहुंच की सरलता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।अगर ऐसा नहीं हो सका तो भारत के लघु व मध्यम उद्योग पतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे।

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