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राजस्थान में गुरुवार को आसमान में होगा पतंगों का राज

👤 manish kumar | Updated on:13 Jan 2021 12:33 PM GMT

राजस्थान में गुरुवार को आसमान में होगा पतंगों का राज

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जयपुर । राजस्थान में कोरोनाकाल के संक्रमण की भेंट चढ़े व्रत-त्योहारों पर छाई उदासीनता के बादल गुरुवार को मकर संक्रांति के उल्लास से छंट सकते हैं। मकर संक्रांति को लेकर खरीददारी के लिहाज से बाजार हालांकि परवान पर नहीं चढ़ पाए हैं, लेकिन आमजन में संक्रांति को लेकर उल्लास का माहौल है। प्रदेश में राजधानी जयपुर समेत सभी शहरों में संक्रांति गुरुवार को परंपरागत उल्लास के साथ मनाई जाएगी।

मकर संक्रांति के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस बार मकर संक्रांति पर वर्षों बाद विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन 5 ग्रह शनि, सूर्य, बुध, गुरु, चंद्र आपस में मिलकर श्रेष्ठ योग बना रहे हैं। इस बार दान-पुण्य, हवन का श्रेष्ठ योग वर्षों के बाद बन रहा है। सनातन वैदिक हिंदू परंपराओं में मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण में आ जाता है और इसके साथ ही एक माह से चल रहे मल मास का समापन और शुभ कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है। सूर्य के उत्तरायण होने पर धार्मिक स्थलों में जमकर दान पुण्य होता है। सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना के लिए 13 वस्तुओं का दान करके भगवान सूर्य का पूजन करती हैं।

कोरोना काल में मकर संक्रांति पर तीर्थ स्थलों में पाबंदी को देखते हुए जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर में भक्तों को तीर्थों का जल वितरित किया गया। इसमें गोविंद सागर कुआं जल, त्रिवेणी संगम जल, हरिद्वार जल, नासिक जल व पुष्कर आदि तीर्थों का जल मिश्रित है। मकर संक्रांति पर भक्त तीर्थ जल से स्नान कर सूर्य भगवान को अध्र्य दे सकेंगे। संक्रांति के पर्व पर सामान्यजन तीर्थ आदि में स्नान कर तीर्थ जल से सूर्य भगवान को अध्र्य प्रदान करते हैं। साथ ही दान-पुण्य करते हैं।

राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के अन्य शहरों में मकर संक्रांति का उल्लास नजर आने लग गया है, हालांकि इस बार मकर संक्रांति को लेकर बाजार में तेजी है। पतंगों से लेकर मांझा और तिल के लड्डु व फीणी सब महंगे हो गए है। कोरोना के चलते रात्रिकालिन कफ्र्यू का असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। दुकानें जल्दी बंद होने से ग्राहकी भी मंदी हो गई है। संक्रांति नजदीक आ गई, लेकिन बाजार में ग्राहकी ने गति नहीं पकड़ी है। व्यापारियों की मानें तो दुकानें जल्दी बंद होने से बाजार में रौनक नहीं है। पतंग व्यापारियों के अनुसार कोरोना के चलते इस बार पतंगें कम बनी है, ऐसे में पतंगे डेढ़ गुणा तक महंगी बिक रही है। बाजार में फीणी आदि भी महंगें दामों में बिक रही है। जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल की मानें तो नाइट कफ्र्यू के चलते इस बार मकर संक्रांति का बाजार फीका रहा है। दुकानें जल्दी बंद होने से बाजार में ग्राहकी नहीं है। मकर संक्रांति के त्योहार की ग्राहकी सुबह—शाम की होती है, ऐसे में इस बार दुकानें जल्दी बंद होने से ग्राहकी पर असर पड़ा है। शहर में रामगंज बाजार स्थित हांडीपुरा के अलावा किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार, हल्दियों का रास्ता के साथ बाहरी बाजारों में पतंगों की दुकानें सज चुकी है। बाजार में इस बार पतंगें डेढ गुना तक महंगी बिक रही है। बाजार में कोरोना का असर भी पड़ा है। इस बार पतंगें कम बिक रही है, वहीं व्यापारियों ने भी कम पतंगें मंगवाई है। हालांकि संक्रांति के नजदीक आने के साथ ही पतंग बाजार में ग्राहकी बढऩे लगी हैं।

जयपुर में अहमदाबाद, बीकानेर, बरेली, कानपुर और आगरा से भी पतंगें बिकने के लिए आई है। यहां बीकानेर, बरेली और कानपुर के व्यापारियों ने भी पतंगों की दुकानें लगाई है। पतंग व्यापारियों की मानें तो जयपुर की पतंगें महंगी बिकती है, जबकि बाहर की पतंगे सस्ती दर पर आती है, ऐसे में व्यापारी बाहर से अधिक पतंगें मंगवाते है।

मकर संक्रांति पर दान- पुण्य के लिए फीणी और तिल के लड्डु देने का महत्व बताया गया है। इस बार बाजार में फीणी और तिल के लड्डू महंगे बिक रहे है। बाजार में इस बार देशी घी की मीठी फीणी 500 रुपए से लेकर एक हजार रुपए किलो तक बिक रही है, वहीं फीकी फीणी 600 रुपए से लेकर 1200 रुपए किलो तक बिक रही है। वनस्पति में दूध की फीणी 240 रुपए से लेकर 400 रुपए किलो तक बिक रही है, वहीं सादा फीणी 150 रुपए से लेकर 300 रुपए किलो तक बिक रही है। तिल के लड्डु भी इस बार महंगे बिक रहे है। एजेंसी

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