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कुंभ में कई देशों की रामलीलाओं के मंचन की तैयारी

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:2018-06-10 14:12:13.0

कुंभ में कई देशों की रामलीलाओं के मंचन की तैयारी

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इलाहाबाद, (भाषा)। कुंभ मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं है, यह हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को देश दुनिया से आने वाले करोड़ों लोगों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। अगले वर्ष का प्रयाग कुंभ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिहाज से बहुत भव्य होगा और मेले में श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, थाइलैंड जैसे देशों की रामलीलाओं तथा मलेशिया की कृष्ण लीला का मंचन करने की तैयारी है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 31 मई को लखनऊ में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बै"क में कुंभ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा को लेकर प्रस्ताव पेश किए गए।

उन्होंने बताया कि इस बै"क में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ाआईसीसीआरा को यह प्रस्ताव दिया गया कि वह कुंभ मेले में श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, थाइलैंड, रूस, त्रिनिडाड, कंबोडिया और सूरीनाम की रामलीला और मलेशिया की कृष्ण लीला की प्रस्तुतियों के संबंध में बात करे। बै"क में आईसीसीआर महानिदेशक से अनुरोध किया गया कि विदेश से कलाकारों को भारत लाने का जिम्मा आईसीसीआर उ"ाए और नई दिल्ली से इलाहाबाद लाने और यहां मंचन और आतिथ्य का जिम्मा स्थानीय आयोजक द्वारा उ"ाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि चूंकि प्रयाग कुंभ के आयोजन को यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष रुचि ले रहे हैं, इसलिए आईसीसीआर को किया गया प्रस्ताव अमल में आने की पूरी संभावना है। इलाहाबाद स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने पीटीआई भाषा को बताया, आगामी कुंभ मेले में पूरे भारत के साथ ही विदेश में भारतीय संस्कृति के रूपों की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में अपने अपने क्षेत्र के दिग्गज कलाकारों को बुलाने की तैयारी है। इनमें पांडवानी के लिए प्रख्यात तीजनबाई, भरतनाट्यम की सरोजा वैद्यनाथन, कुचीपुड़ी की स्वपन सुंदरी, बांसुरी वादक हरि प्रसाद चौरसिया, कथक के पंडित बिरजू महराज, छऊ के संतोष नायर, कजरी गायिका मालिनी अवस्थी आदि शामिल हैं। ग्रोवर ने बताया कि इसके अलावा विभिन्न राज्यों को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए 7-7 दिन का अवसर दिया जाएगा। वहीं भारत सरकार के क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों से लोक कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा जिनके आवास, भोजन, स्थानीय परिवहन की व्यवस्था उत्तर प्रदेश का संस्कृति विभाग करेगा। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए मेले में 5 पंडाल बनाए जाएंगे। इसके अलावा पूरे मेला क्षेत्र में 20 सेक्टरों में से प्रत्येक में एक-एक लघु मंच भी बनाया जाएगा जिनके नाम ठ्ठषियों के नाम पर होंगे जैसे वेद व्यास, वाल्मीकि, भारद्वाज, वत्स, गौतम, विश्वामित्र आदि। लखनऊ में हुई बै"क में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रतिनिधियों से कुंभ मेले में नाटक की प्रस्तुतियों के संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय से उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ के अनुभवों का लाभ प्रयाग कुंभ के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया और उनसे कार्ययोजना मांगी गई है। ग्रोवर ने बताया, हमारी योजना शहर के 10-15 चौराहों पर मूर्तिकला प्रदर्शित करने की है जिसके लिए दिग्गज कलाकारों के साथ ही कला के विद्यार्थियों को भी अवसर दिया जाएगा। इससे कुंभ के बाद भी शहर के चौराहे कलात्मक दृष्टि से हमेशा खूबसूरत नजर आएंगे। उन्होंने कहा, जहां तक लोक कलाकारों का संबंध है, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र समकालीन कलाकारों के साथ ही लोक कलाकारों को भी समान पारिश्रमिक का भुगतान करेगा जिससे उन्हें भी प्रोत्साहन मिले।

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