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स्वास्थ्य और सौन्दर्य का आधार-संतुलित आहार

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:2018-09-28 17:29:50.0

स्वास्थ्य और सौन्दर्य का आधार-संतुलित आहार

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सोमनाथ भट्टाचार्य - विनायक फीचर्स

सौन्दर्य और स्वास्थ्य का आपस में गहरा संबंध है। स्वस्थ शरीर यानी स्वास्थ्य सुखी जीवन की नींव है। साधारण शब्दों में कहें तो सुंदरता अच्छे स्वास्थ्य का आईना होती है। बगैर स्वस्थ शरीर के सुंदरता मिल पाना मुमकिन ही नहीं। अच्छा स्वास्थ्य सुंदरता के रूप में बखूबी झलक आता है। आभायुक्प त्वचा काले घने बाल, दूध से चमकते मोतियों जैसे दांत आदि सभी कुछ स्वस्थ शरीर के कारण ही मिल पाते हैं। अतः आकर्षक रूप रंग के लिए स्वस्थ होना निहायत जरूरी है। अच्छे स्वास्थ्य के लिये हमें संतुलित आहार की जानकारी होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि हमारी त्वचा हमारे बाल और हमारा शरीर भी उसी से बनता है जो कुछ हम खाते हैं।

पत्येक मानव में चाहे वह स्त्राr हो या पुरुष, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्पित्व का धनी होने की अभिलाषा रहती है। स्वस्थ देह यष्टि के लिए आवश्यकता है आरोग्यदायक आहार की। उत्तम स्वास्थ्य हेतु न केवल भोजन की अपितु स्वास्थ्य परक आहार की आवश्यकता होती है।

यदि हम अपने शरीर और मस्तिष्क के पोषण के लिए उचित आहार लेते हैं तो इससे हमारे शरीर और मन मस्तिष्क के स्वस्थ रहने की पूरी संभावनाएं रहती हैं। इसी बात पर हमारे सुंदर और चुस्त दुरूस्त बने रहने की संभावना भी निर्भर करती है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम जल्दी बूढक्वे होने लगते हैं। यही नहीं बीमारियों की संभावनाएं भी बढक्व जाती है। अक्सर थकान घेरने लगती है और हमेंअपनी रूखी-सूखी त्वचा और बेजान बालों पर भी संतोष करना पडक्वता है।

उचित समय पर उचित ढंग से किया गया भोजन न सिर्प मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य पदान करता है बल्कि सौन्दर्य निखारता है। आयुर्वेद के अनुसार उत्तम आहार से रक्प शुद्ध होता है तथा शरीर लचकदार, स्फूर्तिवान तथा कांतिवान बनता है। उचित पोषण से तात्पर्य भोजन के उन सभी तत्वों और उनकी मात्राओं से हैं।

पूर्ण सौन्दर्य की पाप्ति के लिये सबसे पहले शरीर को विषैले तत्वों से मुक्प करना आवश्यक है और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आप सुबह सबसे पहले एक छोटा चम्मच शुद्ध शहद और नींबू के रस के साथ एक गिलास गर्म पानी पीजिये। दिन भर खूब पानी पीजिये एक दिन में कम से कम आठ गिलास। इससे शरीर के हानिकारक या बेकार तत्व बाहर निकल जाते हैं और शरीर को बहुत आराम मिलता है। दूसरा चरण भी पिछले जितना ही महत्वपूर्ण है। हमें नये स्वस्थ तौर तरीके और दिनचर्या बनानी होगी जिससे हमारे शरीर को वे सब चीजें मिल सपें जो उत्तम स्वास्थ्य और सौन्दर्य के लिए जरूरी हैं। अति भोजन हमारे लिए बहुत ही हानिकारक है, जबकि भूख से थोडक्वा कम खाना हर किसी के लिये अच्छा है। ऐसा कोई चमत्कारी विशेष आहार नहीं है, जो हमें सुंदर, स्वस्थ और खूबसूरत त्वचा दे सके। अतः उत्तम यही है कि हम संतुलित आहार लें।

आजकल हर जगह खासकर बडक्वे शहरों में बढक्वता पदूषण हमारी माडर्न लाइफ स्टाइल और कभी-कभी समय के अभाव के कारण भी हम बाहर की चटर-पटर चीजें बडक्वे चाव से खाते हैं और नतीजा होता है थुलथुला, बेडौल शरीर, डाइबिटीज, ब्लड पेशर, पैंसर जैसी ढेर सारी बीमारियां। खासकर 30 की उम्र पार करते ही डॉक्टरों के चक्कर काटने का हमारा सिलसिला शुरू हो जाता है और 50-60 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते न जाने कितने रोगों से जूझना पडक्वता है हमें।

इन सबसे बचने के लिए हमें पकृति से मिलने वाले फलों, सब्जियों व अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनमें हमारी जरूरत के सभी पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। जिस रूप में पकृति इन्हें हमें पदान करती हैं, यदि उसी अवस्था में हम उनका उपयोग करें, तो कोई समस्या पैदा ही नहीं होगी। जैसे कच्ची या कम पकी हुई सब्जियां, फल व उनके जूस आदि। अनाज भी यदि साधारण रूप से खाए जाएं, तो काफी फायदेमंद होते हैं। यदि गेहूं को पीसकर रोटी बनाने की बजाय उसे उबालकर या दलिया बनाकर खाएं तो यह हमारे लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। ज्वार, बाजरा, जई, मकई आदि की रोटियां अधिक पौष्टिक होती हैं स्वास्थ्य के लिए क्योंकि इनमें वसा की मात्रा बहुत कम होती है। दूसरी बात आटे का चोकर कभी भी पेंके नहीं यह बहुत पौष्टिक होता है। यानी हम अपने भोजन में तलना, छौंकना, सेंकना जैसी कियाएं जितनी ज्यादा करते हैं, यह हमारे लिए उतना ही हानिकारक होता है।

हमारे दैनिक भोजन का आधा हिस्सा ताजी कच्ची सब्जियों, फलों और जूस का होना चाहिये। दिन में कम से कम दो बार सलाद खाया जाना चाहिये जिसे सभी किस्म की कच्ची सब्जियां और फलों से बनाया जा सकता है। फलों और सब्जियों से शरीर को सभी आवश्यक विटामिन और खनिज मिलते हैं अन्य पोषक तत्व इस पकार हैं ः-

पोटीन- पोटीन शरीर के ऊतकों के विकास, पुनर्निर्माण और रखरखाव के लिये अति आवश्यक है। पोटीन में एक बहुत बडक्वा हिस्सा नाइट्रोजन का होता है पोटीन लेने से एक फायदा यह है, कि शरीर में नाइट्रोजन के संतुलन को बनाये रखने में मदद मिलती है। इससे शरीर को उतना ही नाइट्रोजन मिलता रहता है जितना कि शरीर से बाहर निकलता रहता है। इस संतुलन से हमारे बाल, त्वचा और मांसपेशियां स्वस्थ और मजबूत बनी रहती हैं। हमारे भोजन की कुल कैलोरी का दस से पन्दह पतिशत भाग पोटीन का होना चाहिए। पोटीन का सबसे अच्छा और सबसे सस्ता स्रोत ताजी सब्जियां, चावल, गेहूं, दालें, साबुत अनाज, सोयाबीन, मिले-जुले नट्स और दूध की बनी चीजें हैं।

वसा- वसा विशेष परिस्थितियों में ऊर्जा पदान करता है और बाहरी सदमों से बचाती है। वसा की कमी से शरीर के विटामिनों के स्तर में कमी आ सकती है और इससे त्वचा की गडक्वबडिक्वयाँ शुरू हो सकती हैं लेकिन शरीर में इसकी अधिकता भी अच्छी नहीं। इससे अधिकता मोटापा और पाचनतंत्र की गडक्वबडिक्वयां होती है और यह मधुमेह को बढक्वावा देती है। एक सामान्य आहार में पतिदिन अधिक से अधिक 95 ग्राम वसा होनी चाहिए। यह हमें वनस्पतियों दोनों से मिलती है। यह मांस, मछली, घी, पनीर, मक्खन, तेल आदि में मिलता है।

कार्बोहाइड्रेट - कार्बोहाइड्रेट शरीर को त्वरित कैलोरी पदान कर शारीरिक और मानसिक श्रम के लिए ऊर्जा पदान करता है। श्रेष्ठ कार्बोहाइड्रेट चावल, सब्जी, फल, साबुत अनाज, चीनी और शहद आदि में होता है।

विटामिन- विटामिन्स शरीर की वृद्धि एवं अन्य शारीरिक कियाओं के लिए आवश्यक होते हैं। अभी तक कई पकार के विटामिनों की खोज हो चुकी है, जो निम>लिखित हैं ः-

विटामिन ए- यह अति आवश्यक विटामिन है। मुख्यतः यह स्वस्थ सुंदर पतिरोधक शक्ति के लिए आवश्यक है। यह मुख्यतः मछली के तेल, दूध, मक्खन, अंडा, हरी सब्जियों एवं टमाटर आदि में पाया जाता है। इसकी कमी से रतौंधी हो जाती है तथा रोग पतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

विटामिन बी- यह मुख्यतः मांस, अंडा, सोयाबीन, हरी सब्जियां आदि में मिलता है। यह शारीरिक बुद्धि तथा आंख एवं त्वचा के सुचारू रूप से कार्य करने हेतु आवश्यक है। इसकी कमी से चर्म रोग, नेत्र, ज्योति कमजोर होना शरीर की वृद्धि का रुक जाना आदि बीमारियां होती हैं।

विटामिन सी- यह नींबू, संतरा, मौसमी, आंवला, टमाटर, अंडा, हरी सब्जियां आदि में पाया जाता है। इसकी कमी से शारीरिक वृद्धि तथा रूधिर कोशिकाओं का निर्माण रुक जाता है तथा दांत एवं मसूडक्वों में खराबी, जुकाम, नजला आदि की शिकायत बनी रहती है और स्कवी नामक रोग हो जाता है।

विटामिन डी- यह दूध, मक्खन, घी, मछली का तेल, अंडा आदि में मिलता है। सूर्य की किरणों से भी पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलता है इसकी कमी से सूखा रोग (रिकेट्स) हो जाता है।

विटामिन ई- इसकी कमी से पजनन की कमजोरी हो जाती है तथा अधिक कमी से नपुंसकता भी आ जाती है। यह मछली, गेहू, हरी सब्जियों, दूध, मक्खन, अंकुरित अनाज, तेल आदि में मुख्यतः पाया जाता है।

लवण- ये हरी सब्जियों, चावल, फल, मूंगफली आदि में पाए जाते हैं। ये रक्प, पाचन तथा हड्डियों के लिए आवश्यक है। शरीर का 1/25 भाग लवणों से निर्मित होता है।

जल- पाचन, खनिजों का शरीर में वितरण और उत्सर्जन आदि बहुत सी शारीरिक कियाओं में जल का महत्वपूर्ण कार्य है इसके अलावा जल शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। बिना जल के शरीर की कोशिकाएं काम नहीं कर सकती। त्वचा को चमकदार और सुंदर बनाये रखने के लिए बहुत सारा पानी पीना जरूरी है। जितना सम्भव हो, उतना जल-पानी पीना जरूरी है। नहीं तो एक दिन में कम से कम आठ गिलास पानी अवश्य पीना चाहिये।

इस बात का ध्यान रखिये कि अच्छे स्वास्थ्य के लिये शरीर के लिये आवश्यक सभी पोषक आहार के रूप में शरीर तक पहुंचाना आवश्यक है क्योंकि शरीर में सभी आवश्यक तत्वों के बीच संतुलन होना जरूरी है। सभी पोषक तत्व तभी शरीर पर पूरी तरह अपना पभाव दिखा पाते हैं जबकि उनका शरीर के दूसरे पोषक तत्वों के साथ संतुलन हो। क्योंकि वे सब अपने कार्यों और समुचित उपयोग के लिए एक दूसरे पर निर्भर करते हैं।

सच, पकृति ने हमें पौष्टिक आहार के रूप में बहुत कुछ दिया है लेकिन इसके बावजूद हम अपनी गलत आदतों और जानकारी के अभाव में अपने शरीर का ठीक तरह ख्याल नहीं रखते हैं और बाद में ढेर सारी तकलीपें सहते हैं। तो चलिए क्यों न हम भी पकृति का कहना मानें और उसी के अनुरूप अपने को ढालकर भरपूर स्वास्थ्य व सौन्दर्य पाएं।

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