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शराबखोरी के विरुद्ध मातृशक्ति की जीत

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:17 Sep 2018 3:02 PM GMT

शराबखोरी के विरुद्ध मातृशक्ति की जीत

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ललित गर्ग

गंभीर समस्याओं में पमुख है शराब का बढ़ता पचलन और उससे होने वालीं अकाल मौतें। सरकार शराबबंदी का नारा देती है, नशे की बुराइयों से लोगों को आगाह भी करती है और शराब का उत्पादन भी बढ़ा रही है। राजस्व पाप्ति के लिए जनता की जिन्दगी से खेलना क्या किसी लोककल्याणकारी सरकार का काम होना चाहिए? गुजरात पांत में कुल शराबबंदी है, क्योंकि वह महात्मा गांधी का गृह पदेश है। क्या पूरा देश गांधी का नहीं है? वे तो राष्ट्र के पिता थे, जनता के बापू थे।

इसी बात को लेकर राजस्थान में शराबबंदी के लिये सार्थक पयत्न हुए हैं। काछबली, मंडावर एवं बरजाल जैसे अनेक स्थानों पर अनेक बाधाओं को चीरकर एक नया इतिहास बना है। अभी भी शराब के खिलाफ जंग जारी है और इस जंग के नायक हैं डॉ. महेन्द कर्णावट। डॉ. कर्णावट के पयासों ने महिलाओं के हाथों में कांति का बिगुल थमा दिया है। काछबली की सरपंच गीता देवी ने अगुवाई की और काछबली को देश की पहली शराब ठेका मुक्त पंचायत होने का गौरव पाप्त हुआ। काछबली का अनुसरण करते हेतु मंडावर, ठीकरवास, थानेटा, बरार, बरजाल इत्यादि गांवों ने शराब विरोधी अभियान पारंभ किए। मंडावर में सामाजिक मूल्यों और संगठित मातृशक्ति की जीत हुई है। राजसमंद, पाली, जोधपुर, बीकानेर, अलवर, भरतपुर, जयपुर इत्यादि जिलों में महिलाओं ने शराबबंदी के पक्ष में हुंकार भरी है।

राजस्थान में डॉ. महेन्द कर्णावट को व्यापक संघर्ष करना पड़ा है। पशासनिक एवं राजनैतिक असहयोग ने उनके सामने अनेक चुनौतियां खड़ी की हैं। 12 अगस्त 2017 को शराबबंदी के लिए हुए मतदान में मतदानकर्मियों ने खेल खेला और हाथ लगी पराजय लेकिन बरजालवासियों ने राष्ट्रपिता के स्वप्न को सत्याग्रह के माध्यम से साकार कर दिखाया चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष 2017 में। और रचा नया इतिहास स्वस्थ समाज निर्माण का। वहीं, काछबली, मंडावर एवं बरजाल की साहसी महिलाओं ने समाज सुधार की दिशा में कदम बढ़ाकर पुरुष समाज को चौंका दिया। इसी घटना से पेरित होकर डॉ. महेन्द कर्णावट, उनके परिवार एवं गांधी सेवा सदन परिजनों ने कदम बढ़ाये और शराबबंदी के पक्ष में भारी मतदान करने की अपील के साथ काछबली, मंडावर एवं बरजाल के एक-एक घर पर दस्तक दी। शराबबंदी के पक्ष में जिस तरह से पचार-पसार किया वह काछबली, मंडावर एवं बरजाल में शराबबंदी अभियान का स्वर्णिम पृष्ठ है।

नशे की आदत कांच की तरह नहीं टूटती। इसे लोहे की तरह गलाना पड़ता है। नशामुक्ति की सशक्त स्थिति पैदा नहीं की जा सकती पर नशे के पाणघातक परिणामों के पति जागरूक किया जा सकता है। पक्षी भी एक विशेष मौसम में अपने घोंसले बदल लेते हैं पर मनुष्य अपनी वृत्तियां नहीं बदलता। वह अपनी वृत्तियां तब बदलने को मजबूर होता है, जब दुर्घटना, दुर्दिन या दुर्भाग्य का सामना होता है।

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