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मेहन्दीपुर बालाजी

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:2018-10-23 14:21:37.0

मेहन्दीपुर बालाजी

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निर्मला

राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की सीमा रेखा पर स्थित दौसा जिले के मेहंदीपुर कस्बे में बालाजी का एक अति पसिद्ध तथा पख्यात मंदिर है, जिसे श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है। बालाजी का मंदिर मेहंदीपुर नामक स्थान पर दो पहाड़ियों के बीच स्थित है, इसलिए इन्हें घाटे वाले बाबाजी भी कहा जाता है। इस मंदिर में स्थितबजरंग बली की बालरूप मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई, बल्कि यह स्वयंभू है। यह मूर्ति पहाड़ के अखण्ड भाग के रूप में मन्दिर की पिछली दीवार का कार्य भी करती है। इस मूर्ति को पधान मानते हुए बाकी मंदिर का निर्माण कराया गया है। इस मूर्ति के सीने के बाईं तरफ एक अत्यन्त सूक्ष्म छिद है, जिससे पवित्र जल की धारा निरंतर बह रही है। यह जल बालाजी के चरणों तले स्थित एक कुण्ड में एकत्रित होता रहता है, जिसे भक्तजन चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। यह मूर्ति लगभग 1000 वर्ष पाचीन है, किन्तु मंदिर का निर्माण इसी सदी में कराया गया है।

बालाजी महाराज के अलावा यहां श्री पेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान (भैरव महाराज) की मूर्तियां भी हैं। पेतराज सरकार जहां दण्डाधिकारी के पद पर आसीन हैं, वहीं भैरव जी कोतवाल के पद पर। यहां आने पर ही सामान्यजन को ज्ञात होता है कि भूत-पेतादि किस पकार मनुष्य को कष्ट पहुंचाते हैं और किस तरह सहज ही उन्हें इन कष्ट बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है।

दण्डाधिकारी ः बालाजी मंदिर में पेतराज सरकार दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं। पेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। बालाजी के सहायक देवता के रूप में ही पेतराज सरकार की आराधना की जाती है। पृथक रूप से उनकी आराधना कहीं नहीं की जाती, न ही उनका कहीं कोई मंदिर है। वेद, पुराण, धर्म-ग्रंथ आदि में कहीं भी पेतराज सरकार उल्लेख नहीं मिलता। पेतराज श्रद्धा और भावना के देवता हैं। पेतराज सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है, किन्तु भक्तजन पायः तीनों देवताओं को बूंदी के लड्डुओं का ही भोग लगाते हैं और पेम श्रद्धा से चढ़ा हुआ पसाद बाबा सहर्ष स्वीकार भी करते हैं।

भैरव बाबा हैं कोतवाल कप्तान ः कोतवाल कप्तान श्री भैरव देव भगवान शिव के अवतार हैं और उनकी ही तरह भक्तों की थोड़ी-सी पूजन अर्चना से ही पसन्न भी हो जाते हैं। भैरव महाराज चतुर्भुजी है। उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू, खप्पर तथा पजापति ब्रह्मा का पांचवां कटा शीश रहता है। वे कमर में बाघाम्बर नहीं, लाल वस्त्र धारण करते हैं। वे भस्म लपेटते हैं। उनकी मूर्तियों पर चमेली के सुगंधयुक्त तेल में सिन्दूर घोलकर चोला चढ़ाया जाता है। पसाद के रूप में भैरव बाबा को उड़द की दाल के बड़े और खीर का भोग लगाया जाता है। कलियुग में बालाजी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो अपने भक्त को सहज ही अष्टसिद्धि, नवनिधि तदुपरान्त मोक्ष पदान कर सकते हैं। दुखी कष्टग्रस्त व्यक्ति को मंदिर पहुंचकर तीनों देवगणों को पसाद चढ़ाना पड़ता है। बालाजी को लड्डू पेतराज सरकार को चावल और भैरव बाबा को उड़द का पसाद चढ़ाया जाता है। इस पसाद में से दो लड्डू रोगी को खिलाए जाते हैं और शेष पसाद पशु-पक्षियों को डाल दिया जाता है। पसाद हमेशा थाली या दोने में रखकर दिया जाता है।

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