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साल की सुर्खियों के सरताज

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:2018-12-24T22:02:46+05:30

साल की सुर्खियों के सरताज

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सुर्खियों का ताज हासिल करने का एक घोषित-अघोषित नियम है कि जो जितना ताकतवर होगा, उसे उतनी ही ज्यादा सुर्खियां हासिल होंगी। मीडिया के किसी भी रूप में नजर डालें तो हर आ"वीं खबर का किसी न किसी रूप में पधानमंत्री नरेंद मोदी से रिश्ता मिलेगा। यही कारण है कि साल 2018 की सुर्खियों के सरताज पिछले कई सालों की तरह इस साल भी पधानमंत्री नरेंद मोदी ही रहे।

यह स्वभाविक भी था। एक तो उनकी सरकार का यह पांचवां और अंतिम साल है। अगले साल यानी 2019 में सत्रहवीं लोकसभा के लिए चुनाव होने हैं, ऐसे में मीडिया में यह चर्चा बने रहना स्वभाविक है कि क्या नरेंद मोदी के नेतृत्व में भाजपा एक बार फिर 2019 में सरकार बनायेगी? यह इसलिए बहस का बड़ा विषय बन गया है; क्योंकि मौजूदा सरकार ज्यादातर मोर्चों में अपने घोषित वायदों के लिहाज से काफी पिछड़ी हुई है। साल 2014 में जब मौजूदा पधानमंत्री नरेंद मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने अकेले बहुमत हासिलकर सरकार बनाया था, तो माना जा रहा था कि नरेंद मोदी की सरकार हाल के सालों की तमाम दूसरी सरकारों से अलग होगी।

पधानमंत्री नरेंद मोदी की ऊर्जा से लबरेज काम करने की अदा ने भी शायद भारतीयों में बहुत ज्यादा उम्मीद पैदा कर दी थी। लेकिन जैसे-जैसे मौजूदा सरकार अपने दिन पूरे करती रही, लगने लगा कि इस सरकार के भी तमाम वायदे बस वायदे ही हैं। इसलिए इस अंतिम साल में हर क्षेत्र में सरकार के कामकाज को लेकर लगातार बातें और तुलनाएं होती रहीं। नतीजतन पूरे साल मीडिया की सुर्खियों में पधानमंत्री नरेंद मोदी सबसे आगे मौजूद रहे। गुजरे कुछ सालों में खासकर पिछले एक साल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी राजनीतिक परिदृश्य में अपनी बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है। यही कारण है कि साल 2018 में नरेंद मोदी के बाद जिस भारतीय ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी वह राहुल गांधी ही हैं।

हालांकि तकनीकी रूप से देखें तो इस स्थान के और भी कई दावेदार हैं। मसलन- भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, जिन्होंने मिशन-350 का लोकसभा चुनाव के लगभग एक साल पहले ऐलान करके विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के मुकाबले मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश की और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 66 वर्षीय मुखिया (सरसंघ चालक) मोहन भागवत। लेकिन साल के आखीर में जिस तरह 5 राज्यों के सम्पन्न विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने मध्य पदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत हासिल की और हिंदी हार्टलैंड में ऐन लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा से तीन राज्य छीन लिए, उसकी वजह से राहुल गांधी पधानमंत्री मोदी के बाद सुर्खियां पाने वाले साल के दूसरे महत्वपूर्ण शख्स हो गये हैं।

विराट कोहली अकेले भारत में ही नहीं बल्कि ािढकेट खेलने वाले सभी देशों में इन दिनों एक महान बल्लेबाज के रूप में ख्याति हासिल कर चुके हैं। ऐसे में जाहिर है अकेले भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में उन्हें खूब सुर्खियां मिलती हैं। लेकिन भारत में वह अकेले ािढकेट के लिए ही नहीं बल्कि अपनी लोकपियता के चलते की गई तमाम टिप्पणियों के कारण भी सुर्खियों में रहते हैं। इस साल कदम दर कदम विराट कोहली ने इस विश्वास को पुख्ता बनाया कि ािढकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के तमाम बल्लेबाजी से संबंधित रिकॉर्ड वह निकट भविष्य में तोड़ डालेंगे।

यूं तो भारत जैसे देश में सुपीम कोर्ट हमेशा से अपने ऐतिहासिक फैसलों के कारण सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस साल की शुरुआत में जिस तरह से सुपीम कोर्ट के चार पमुख जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के विरूद्ध पेस कॉफ्रेंस की और यह संदेश देने की कोशिश कि सब कुछ सही नहीं हो रहा, उसके कारण न सिर्फ देश की सर्वोच्च अदालत बल्कि अब पूर्व हो चुके चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा इस साल चौथे सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले शख्स रहे। हालांकि उनके सुर्खियों में रहने के कारण सुपीम कोर्ट को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उनके जरिये जो सवाल उ"ाये गये, वे सवाल कहीं न कहीं हमारी न्याय व्यवस्था के भरोसे पर भी सवाल उ"ाते से लगे। लेकिन जल्द ही ऐसे सवालों का माहौल खत्म हो गया और सुपीम कोर्ट एक बार फिर से देश में सबसे विश्वसनीय संस्था के रूप में अपनी साख बनाये रखी।

सुर्खियां सिर्फ सकारात्मक रूप में ही नहीं मिलतीं। कई बार नकारात्मक सुर्खियां भी व्यक्ति को लोकपियता के शिखर में पहुंचा देती हैं। इस मामले में इस साल सबसे ज्यादा सुर्खियां मौजूदा सरकार के पूर्व विदेश राज्यमंत्री एम.जे.अकबर ने बटोरी जब उनके विरूद्ध एक महिला पत्रकार ने रु मीटू के जरिये अपने पत्रकार दिनों में यौन शोषण का आरोप लगाया और फिर धीरे-धीरे ऐसी 15 महिला पत्रकार सामने आयीं, जिन्होंने अलग-अलग समय में अपने साथ शाषण के आरोप एम. जे अकबर पर लगाए। अपनी इसी नकारात्मक लोकपियता और सुर्खियां बटोरने के कारण एम. जे अकबर को अंततः सरकार से इस्तीफा देना पड़ा।

सुर्खियां हासिल करने के मामले में आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल भी साल 2018 में एक महत्वपूर्ण शख्सियत रहे। हालांकि नोटबंदी को सम्पन्न हुए अब दो साल हो चुके हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद से ही माना जा रहा था कि सरकार ने नोटबंदी का फैसला करके रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्वायतत्ता पर सवालियां निशान लगाया है और कहीं न कहीं इसके लिए उर्जित पटेल को जिम्मेदार माना जा रहा था। लेकिन नोटबंदी के बाद दो सालों तक उर्जित पटेल ऐसे तमाम सवालों का जवाब अपने ढंग से देने की कोशिश करते रहे, लेकिन साल 2018 के आखीर आते-आते सरकार और उनके बीच संभवतः निबाह करना असंभव हो गया, इसलिए उर्जित ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि इसका उन्होंने निजी कारण बताया।

यूं तो सुर्खियां हासिल करने वाले लोगों की फेहरिस्त बहुत लंबी होती है और भारत जैसे देश में जहां का मीडिया उत्साही हो और आबादी बहुत ज्यादा, वहां तो सुर्खियों के सरताज भी सैकड़ों से ज्यादा होते हैं। लेकिन अगर स्थान की कमी का ध्यान रखते हुए कहा जाए कि इस साल सुर्खियां हासिल करने में जिन और शख्सियतों ने अपना लोहा मनवाया, उनमें बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और रणबीर सिंह तथा पियंका चोपड़ा अपनी अपनी शादियों के कारण, इसी फेहरिस्त में शामिल रहे। पीवी सिंधु और मैरीकॉम ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करके सुर्खियां बटोरी और साइना नेहवाल खेल के अलावा शादी के चलते भी ये सुर्खियां हासिल कीं। मुकेश अंबानी एक बार फिर से देश के सबसे रईस व्यक्ति बने। साथ ही मोदी सरकार के आलोचकों ने तमाम बार मुकेश अंबानी को भी अपनी आलोचना में लपेटा। इसलिए भी उन्होंने सुर्खियां हासिल करने के मामले में अपने को एक पमुख दावेदार के रूप में पेश किया।

साल 2018 में सुर्खियां बटोरने वाली शख्सियतों में नवज्योत सिंह सिद्धू एक ऐसे शख्स रहे जिन्होंने पहले पाकिस्तानी सेना पमुख के साथ गले मिलने के कारण नकारात्मक सुर्खियां बटोरीं, तो साल के अंत आते-आते करतारपुर कॉरिडोर के मामले में पाकिस्तान की सकारात्मक पहल के कारण भी उन्हें सुर्खियां मिली। इस तरह सुर्खियों के सरताजों में वह भी शामिल रहे।

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