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राजनेताओं को चढ़ा फिटनेस का फीवर

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:2018-06-24 15:09:18.0

राजनेताओं को चढ़ा  फिटनेस का फीवर

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लोकमित्र

गुजरे 13 जून 2018 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीटर पर लिखा, 'सुबह की एक्सरसाइज के कुछ पल शेयर कर रहा हूं। योगा के अलावा मैं एक ऐसे ट्रैक पर चलता हूं जो कुदरत के पांच तत्वों से प्रेरित है- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। ये बहुत ताजा करने वाली एक्सरसाइज है।' प्रधानमंत्री मोदी ने इस वीडियो को शेयर करने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और टेबल टेनिस की खिलाड़ी मोनिका बत्रा को फिटनेस चैलेंज भी दिया।

हिंदुस्तान की राजनीति में 'फिटनेस चैलेंज' एक नया मुहावरा है, जिसकी शुरुआत इसी साल प्रधानमंत्री मोदी के एक मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह रा"ाwर ने तब किया था, जब उन्होंने अपने दफ्तर में एक्सरसाइज करते हुए का अपना एक वीडियो शेयर किया था। वीडियो में राज्यवर्धन सिंह यह कहते हुए नजर आये थे कि मैं फिट रहने के लिए ये करता हूं, आप लोग फिट रहने के लिए क्या-क्या करते हैं? इसके वीडियो शेयर करें। राज्यवर्धन सिंह ने विराट कोहली, साइना नेहवाल और ऋतिक रोशन को यह चैलेंज दिया था। 22 मई 2018 को इस तरह देश की राजनीति में फिटनेस चैलेंज का नया दौर और नया मुहावरा शुरु हुआ। इसके बाद तो नेताओं, खिलाड़ियों ने अपने फिटनेस वीडियो शेयर करने की आपस में होड़ ही लगा दी, जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय ािढकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के चैलेंज की हुई जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चैलेंज किया है।

लेकिन यह अकेले भारतीय राजनेताओं तक सीमित फिनोमिना नहीं है बल्कि सच्चाई तो यह है कि क्यूबा हो या कनाडा, रूस हो या भूटान तकरीबन हर देश के राजनेताओं में इन दिनों फिटनेस को लेकर जबरदस्त जागरूकता आयी है, जिसे हम फिटनेस फीवर भी कह सकते हैं। हालांकि दुनिया के बाकी देशों के राजनेताओं में इस तरह से अपनी फिटनेस के वीडियो को सोशल मीडिया में जारी करने का चलन अभी नहीं शुरु हुआ, लेकिन हो सकता है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर अब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल मैकरोन भी अपने वीडियो जारी करें; क्योंकि फिटनेस की मामले में इनका भी कोई जवाब नहीं है। लेकिन अगर फिटनेस को हर पल दुनिया का कोई राजनेता जीता है, तो वह कनाडा के 45 वर्षीय प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो हैं। जिन्होंने अपने फिट होने के सबूत वाली कोई तस्वीर सोशल मीडिया में भले न डाली हो, लेकिन राजनेताओं के फिटनेस पर निकलने वाली दुनिया की एकमात्र मैगजीन 'हेल्थ फिटनेस रेवोल्यूशन' (एचएफआर) के तमाम अंकों में ही नहीं बल्कि इस पत्रिका द्वारा पिछले 4 सालों से दुनिया के फिट राजनेताओं की जारी की जाने वाली सूची में लगातार जगह पाती रही है। हालांकि अफसोस की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 4 सालों में एक बार भी इस पत्रिका द्वारा जारी फिट शासनाध्यक्षों की वार्षिक सूची में अपनी जगह नहीं बना सके।

हाल ही में आयी 2018 की सूची में भी हमारे प्रधानमंत्री जी का नाम नहीं है। फिटनेस एक्सपर्ट हापर कॉलिंस जिन्होंने 'रिसाइनिक योर लाइफ' नाम से किताब लिखी है, वही इस पत्रिका और इस संग"न 'हेल्थ फिटनेस रिवोल्यूशन' की सही मायनों में देखरेख करते हैं। इस पत्रिका की राजनेताओं की फिट सूची को कितना ऑथेंटिक समझा जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके द्वारा राजनेताओं की जारी सूची को 10 हजार से ज्यादा मीडिया समूह ज्यों का त्यों छापते हैं। वास्तव में 'द फिटेस्ट हेड्स ऑफ स्टेट' नाम की सूची को पत्रिका द्वारा जारी करने के पीछे सोच यह है कि राजनेताओं की फिटनेस से प्रेरित होकर दुनिया के तमाम दूसरे लोग भी अपनी जिंदगी में फिटनेस के महत्व को समझेंगे।

इस क्षेत्र में पिछले 20 सालों से काम कर रहे फिटनेस एक्सपर्ट समीर बेसिक का मानना है कि दुनिया में तमाम दूसरे उद्योगों की तरह राजनेताओं और आम लोगों की फिटनेस का भी सबसे बड़ा कारोबार अमरीका में ही है। हालांकि समीर यह भी मानते हैं कि इस कारोबार को एचएफआर से भी बूस्टअप मिला है उनके मुताबिक शासनाध्यक्ष सबसे चुम्बकीय ब्रैंड अम्बेस्डर होते हैं। दुनिया में विशेषकर सेलिब्रिटीज के बीच फिटनेस को लोकप्रिय बनाने में जितना योगदान रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो का है, उतना शायद ही कभी किसी फिटनेस एक्सपर्ट का भी रहा हो।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम भारतीयों को फिटनेस के प्रति कितना आकर्षित कर पायेंगे, इसको जानने के लिए हिंदुस्तान में तो अभी एचएफआर जैसी कोई विश्वसनीय पत्रिका या प्लेटफार्म नहीं है, लेकिन जहां तक विश्व में उनकी फिटनेस की चर्चा की बात है तो वह इसलिए नहीं है क्योंकि 2014 से लगातार जारी होने वाली फिट शासनाध्यक्षों की सूची में वह अभी तक अपना नाम नहीं बना ला पाये। हालांकि हर बार की सूची में दुनिया के 20 प्रमुख शासनाध्यक्षों को शामिल किया जाता है। अब तक की इन सूचियों में जिस शासनाध्यक्ष ने बार-बार अपनी जगह बनायी है, वो रूस के मौजूदा राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो हैं।

हालांकि इस सूची में अब तक जो तमाम राजनेता जगह हासिल कर चुके हैं उनमें- ऑस्ट्रिया, सऊदी अरेबिया जैसे देशों के राजनेता भी हैं। सऊदी अरब के राजकुमार प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जो राजनेताओं के बीच 'एमबीएस' के निक नाम से जाने जाते हैं, उन्हें भी दुनिया के फिट शासनाध्यों में अकसर जगह मिल जाती है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में क्वीन एलिजाबेथ और जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्कर भी अपनी जगह बना चुकी हैं, जो आमतौर पर अपनी फिटनेस का दिखावा करती कभी नहीं देखी जातीं। मंगोलिया के राष्ट्रपति खालतमागिन बट्टूलगा अपनी फिट तस्वीरों में शासनाध्यक्ष कम कोई प्रोफेशनल पहलवान ज्यादा लगते हैं। जबकि फिटनेस के तकरीबन सिंबल बन चुके रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन हमेशा अपनी तस्वीर में भी एथलीट जैसे ही चुस्त दुरुस्त लगते हैं, उनके फिट होने की ज्यादातर तस्वीरें कराटे की पॉजीशन लिए खिलाड़ी की होती हैं।

बहरहाल फिट होना हमेशा न सिर्फ स्वास्थ्य के प्रति बल्कि स्वस्थ सोच के लिए भी बहुत जरूरी होता है। लेकिन फिटनेस को महज एक राजनैतिक मुहावरा बना देना, एक तरह से फिटनेस के विरूद्ध राजनीति जैसे है। क्योंकि जब फिटनेस के मुहावरे को किसी आाढामक विज्ञापन की तरह इस्तेमाल किया जायेगा तो जो इसके फायदे होंगे, वो तो बाद में पता चलेंगे। इसके नुकसान पहले से अपना रंग दिखाना शुरु कर देंगे। दरअसल फिटनेस को राजनीतिक मुहावरा बना देने का नुकसान यह है कि इससे तमाम वास्तविक चुनौतियों रंग बिरंगी और मनोरजंक चुनौतियां बन जाती हैं।

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