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झूठ छिपाने के लिए बच्चा जब कहानी गढ़े

👤 Veer Arjun Desk | Updated on:2018-06-24 15:11:49.0

झूठ छिपाने के लिए  बच्चा जब कहानी गढ़े

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नीलम अरोड़ा

‡ अपने डॉगी को खिलाने के लिए प्लेट में रखा सेंडविच अचानक नीचे गिराना और कहना कि 'हवा से गिर गया है'।

‡ नहाने के बाद तौलिए को जमीन पर गिरा देना और कहना कि 'अपने आप नीचे गिर गया है।'

‡ दोस्त को चुपके से मुक्का मारकर मुंह पर उंगुली रखकर खामोश रहने का इशारा करना यानी बच्चा जब जानबूझकर झू" बोले या अपने झू" को छिपाने के लिए नयी-नयी कहानी गढ़ने लगे तो पैरेंट्स को यह समझ में नहीं आता कि वह उसे कैसे हैंडिल करें?

बच्चा जब तीन-चार साल का हो जाता है तो उसे सच और झू" के बीच का अंतर पता नहीं होता। वह इस बात से अंजान होता है कि हां और न के बीच एक न दिखने वाली एक महीन रेखा है, जिसका जिंदगी की हकीकत से सचमुच गहरा नाता है। लेकिन उसकी मासूमियत और कल्पना शक्ति में भला ये कैसे आ सकता है? यही वजह है कि वह जानबूझकर सफेद झू" बोलता है और बच्चे को भी पता होता है गलत क्या है और ऐसा करके वह मुश्किल में आ सकता है। ऐसी स्थिति में पैरेंट्स को घर का माहौल इस तरह का बनाना चाहिए कि बच्चे की इस तरह झू" बोलने की आदत उसकी हमेशा की आदत न बन जाए।

याद न रहना

इस उम्र में बच्चा भूल जाता है कि उसने पहले क्या बोला था? और वह अगली बार अपने उस झू" को छिपाने के लिए जो दूसरा झू" बोलता है वह पहले से मेल नहीं खाता। क्योंकि उसकी कल्पनाशक्ति इतनी तीव्र नहीं होती कि वह सजगता से झू" बोले।

खुद को समझाना

शीशे का गिलास तोड़कर मना करना कि उसने नहीं तोड़ा है यानी अपने आपको इसका जिम्मेदार न मानना।

खुश रखने के लिए

उसके झू" से उसके पैरेंट्स को निराशा होती है, यह बात उसे पता है। इसलिए वह नहीं चाहता कि उसके पैरेंट्स उससे नाराज हों, उन्हें खुश रखने के लिए वह झू" बोलता है और अपने झू" को छिपाने के लिए एक नया झू" बोलता है। वह अपनी बहादुरी और हिम्मत दिखाने और दूसरों को प्रभावित करने के लिए बिल्कुल नये किस्म की कहानी भी गढ़ सकता है।

दूसरों को प्रभावित करना

अपने दोस्त को झूले से गिरने से बचाया जबकि ऐसा नहीं था, इस झू" के जरिये वह अपने पैरेंट्स को जताता है कि उस समय वह ऐसा चाह रहा था या उसके दिमाग में यह विचार भी आया था।

अपनी सीमारेखा को समझना

पूरा दिन टेलीविजन पर कार्टून प्रोग्राम देखने के बाद मासूमियत से पैरेंट्स से टीवी खोलकर उसे कार्टून प्रोग्राम देखने की इजाजत देना जैसा व्यवहार जब बच्चा करता है तो समझना चाहिए कि उसे और ज्यादा टेलिविजन देखने की अनुमति होनी चाहिए। बच्चे द्वारा इस तरह का झू" बोलना एक आम बात है। क्योंकि पांच साल तक के बच्चे अपने और माता-पिता के बीच वर्चस्व और चुनौतियों और अपनी ताकत को जांचते-परखते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में उसके लिए कड़े नियम बनाना उसे और ज्यादा झू" बोलने के लिए उकसा सकते हैं।

ईमानदारी कैसे सिखाएं

इस आयुवर्ग के बच्चों में अपने झू" को छुपाने के लिए कहानी गढ़ना आम बात है लेकिन बच्चे में ईमानदारी की भावना पैदा करना तो माता-पिता का कर्तव्य है। यहां पेश है कुछ सुझाव-

हकीकत और सपने में कितना अंतर है

इस उम्र में बच्चा अगर अकसर अपने झू" को छुपाने के लिए नयी-नयी कहानियां गढ़ता है तो हो सकता है पैरेंट्स को उसके इन मनगघढ़त किस्सों में मजा आये लेकिन बच्चे को ऐसी स्थिति में तुरंत टोकना चाहिए और उसे कहना चाहिए, 'तुमने बड़ी चतुराई से मनगढ़त कहानी गढ़ी है।' बजाय इसके कहने के कि 'अच्छे लड़के झू" नहीं बोलते।' इसके अलावा बच्चे को इस बात का एहसास दिलाएं कि जो वह सोचता है, चीजें वैसी नहीं है। हकीकत में उसकी सोच से बिल्कुल अलग हैं। उदाहरण के तौरपर आपका पांच साल का बच्चा अगर घर से बाहर घूमने जाने के लिए परेशान है तो इसके लिए वह एक नया बहाना बना सकता है और कह सकता है 'छोटा बेबी मुझे कह रहा है कि उसे घर से बाहर जाना है।' जबकि अभी वो बात नहीं कर सकता। लेकिन अगर बड़ा बच्चा खुद बाहर जाने के लिए ऐसा कहता है तो उसके जवाब में आप पूछ सकते हैं 'बच्चे ने तुम्हें कैसे बताया कि वह बाहर जाना चाहता है।' इसके जबाव में वह कह सकता है कि 'वो गूं गूं करके उससे बात करता है?' ऐसे में उससे पूछें 'क्या इसका मतलब बाहर जाने से है?' इस तरह छोटे बच्चे के नाम पर बहाना बनाकर घूमने जाने की इच्छा जाहिर करना, इस बात का प्रतीक है कि बच्चे को ईमानदारी से सच बोलना सिखाया जाए।

खुद ईमानदारी बरतें

बच्चे को ईमानदार बनाने के लिए खुद ईमानदार बनें। क्योंकि बच्चे यह सब अपने पैरेंट्स से सीखते हैं। इसलिए खुद सच बोलें तो बच्चा भी इस व्यवहार को धीरे-धीरे ग्रहण करता है। घर के किसी सदस्य की बीमारी, मृत्य या तलाक के विषय में बच्चे को कोई बहाना बनाकर बताने की बजाय उसे साफ और स्पष्ट शब्दों में सच बताएं।

दोषारोपण न करें

बच्चे के सामने सोच समझकर बोलें ताकि पैरेंट्स द्वारा कही गई बातों में कोई कंफ्यूजन न हो। कहने के बाद अपनी बात से भी इंकार नहीं करना चाहिए। क्योंकि बच्चे को लगता है कि झू" बोलकर आप भी मुकर जाते हैं।

उसे झू"ा न कहें

बच्चे को झू"ा न कहें। इससे उसमें कमतरी का एहसास पैदा होता है और वह अपने बचाव के लिए और नया झू" बोलता है। इसकी बजाय उसे एहसास दिलाएं कि आपको झू" बोलना पसंद नहीं है। झू" बोलने के बाद भी आप उसे प्यार करते हैं इसलिए उसे प्यार से दृढ़ होकर सच बोलने के लिए कहें। क्योंकि कई बार पैरेंट्स भी कुछ गलत करने पर सच बोलने से डरते हैं।

तारीफ करें

बच्चे की ईमानदारी पर उसकी प्रशंसा करें ताकि वह बार-बार ईमानदारी का व्यवहार करने के लिए प्रेरित हो। उसे ईमानदारी का महत्व समझाएं।

जो भी हो आप उससे प्यार करते हैं

बच्चे से अगर असावधानी वश आपके बेडरूम का लैंप टूट जाता है तो वह मना कर सकता है, क्योंकि उसे डर होता है कि आप उससे नाराज हो जाएंगा। उसे इस बात का भरोसा दिलाएं कि उसकी मम्मी और पापा का प्यार उसके लिए कभी कम नहीं होगा। वह चाहे जितना भी गलत कर लें।

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