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हिन्दी फिल्म सुमेरु का हुआ प्रीमियर शो

👤 Veer Arjun | Updated on:1 Oct 2021 10:11 AM GMT

हिन्दी फिल्म सुमेरु का हुआ प्रीमियर शो

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देहरादून। फिल्म "७२ ऑवर्स" फ़ेम मुख्य नायक, निर्देशक अविनाश ध्यानी की नई फ़िल्म "सुमेरू" का प्रीमियर शो गुरुवार को पीवीआर में हुआ। उत्तराखंड की वादियों में फिल्म को फिल्मांकन किया गया है। यह फिल्म एक अक्टूबर को रिलीज होगी।

राजपुर रोड स्थित पीवीआर में गुरुवार को पद्मा सिद्धि फिल्मस के बैनर तले बनी सुमेरु फ़िल्म का प्रीमियर शो हुआ। फिल्म "सुमेरु" एक बेहद ही इमोशनल रोमांटिक लव स्टोरी हैं। फिल्म की खासियत ये है कि इसका फिल्मांकन उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में किया गया है। इसके साथ ही ये ऐसी पहली हिंदी फिल्म है जिसका प्रीमियर देहरादून में हुआ।

इस मौके पर फ़िल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले अविनाश ध्यानी ने बताया कि वे अपनी फिल्मों के लिए अनकही कहानियों को उत्तराखंड के ख़ूबसूरत लोकेशन पर रियल लाइफ कैरैक्टर्स और रंगमंच के कलाकारों के साथ फ़िल्माते हैं। इस फिल्म की ये भी खासियत है कि इसमें सब उत्तराखंड के कलाकार हैं। फिल्म के प्रीमियर के दौरान फिल्म के मुख्य अभिनेता अविनाश ध्यानी और अभिनेत्री संस्कृति भट्ट रोमांटिक अन्दाज़ में दिखाई दिये। फिल्म का टैग लाइन "रे छोरे यो प्यार है थारी समझ के बाहर है" विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करते दिखता है। फिल्म की शूटिंग देहरादून, हर्षिल, मसूरी, धनोल्टी जैसे उत्तराखंड की ख़ूबसूरत लोकेशंस पर की गयी हैं।

इन्होंने निभाई भूमिका

पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स के बैनर तले निर्मित फ़िल्म "सुमेरु" के लेखक़-निर्देशन अविनाश ध्यानी हैं मुख्य भूमिका में अविनाश ध्यानी और संस्कृति भट्ट के साथ ही शगुफ़्ता अली, सुरुचि सकलनी, अभिषेक मैंदोला, प्राशील रावत, सतीश शर्मा, जीत माईला गुरुंग, अरविंद पंवार, माधवेन्द्र सिंह रावत महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नज़र आए। फ़िल्म के निर्माता रविंद्र भट्ट और अविनाश ध्यानी हैं। फिल्म के सिनेमेटोग्राफ़र हरीश नेगी हैं और फिल्म का रोमांटिक संगीत सँजोय बोस ने तैयार किया हैं।

पिता की तलाश में हैं भंवर

अपने खोए हुए पिता की तलाश में हरियाणवी छोरा भंवर प्रताप सिंह अपना सबकुछ छोड़कर एक अनजाने सफ़र के लिए उत्तराखंड की वादियों की तरफ़ निकल पड़ता हैं। इस बीच संयोग से भंवर प्रताप की मुलाक़ात सावी से होती हैं जो अपनी डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए उत्तराखंड के ख़ूबसूरत शहर हर्षिल आयी हैं। कहानी में सावी अब भंवर प्रताप के साथ उसके पिता की खोज के अनजाने और कठिन सफ़र में साथ हैं । इस सफ़र में भंवर प्रताप सिंह और सावी को एक दूसरे से प्यार हो जाता है।

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