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कुंभ में बांध के नीचे फ्लाईओवर बने

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2018-08-31 14:58:59.0
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श्याम कुमार

पयागराज के हर महापुंभ एवं पुंभ में उन करोड़ों तीर्थयात्रियों को देखकर बड़ी पीड़ा होती है, जो संगम-स्नान करने आते हैं, किन्तु रुकने की जगह न होने के कारण जनवरी की हाड़ कंपा देने वाली "ंड में मेला-क्षेत्र में सड़कों के किनारे खुले में किसी तरह सोकर रात गुजारते हैं। हजारों करोड़ की धनराशि खर्च किए जाने के बाद भी तीर्थयात्रियों की वह दुर्दशा शर्मनाक होती है। अतः मेला-पशासन को चाहिए कि पूरे मेला-क्षेत्र में जगह-जगह ऐसे बड़े-बड़े पंडाल लगवाए, जहां रातभर तीर्थयात्री रह सकें। उनमें मूत्रालयों एवं शौचालयों की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। शहर की शिक्षण-संस्थाओं को भी स्नान-पर्वों वाले दिनों में बंद कर वहां तीर्थयात्री टिकाए जाने चाहिए। जनवरी में बरसात भी हुआ करती है। एक पुंभ मेले में मौनी अमावस्या वाले दिन इतनी भयंकर बरसात हुई थी कि पूरा मेला-क्षेत्र दलदल बन गया था। तमाम बड़े-बड़े शिविर धराशायी हो गए थे। उस समय उस दलदल में पैर धंसाते हुए लोग बड़ी क"िनाई से संगम-स्थल तक पहुंच पाए थे। यह तीर्थयात्रियों की परम आस्था थी कि उन्हेंने उस भीषण कष्टपूर्ण स्थिति में भी स्नान करने का मोह नहीं छोड़ा था। आगामी पुंभ में मेला-पशासन को ऐसे "ाsस उपाय करने चाहिए कि यदि भयंकर बारिश हो जाए तो भी मेला निर्बाध रूप से सम्पन्न हो।

मेला-पशासन व जिला-पशासन अपनी परेशानी से बचने के लिए अब इस नीति का अनुसरण करने लगे हैं कि पर्वों वाले दिन तीर्थयात्री स्नान करते ही अपने घरों के लिए विदा हो जाएं। यह बुरी नीति है तथा इससे मेले की शोभा को आघात पहुंचता है। तीर्थयात्रियों को भगाने की इस आतुरता के कारण ही 2013 के महापुंभ में भीषण दुर्घटना हुई थी। कुछ अरसे से यह नीति भी अपनाई जाने लगी है कि तीर्थयात्री शहर में न जों और बाहर ही बाहर विदा हो जाएं। ऐसा करना गलत है तथा इससे पयागराज नगर की रौनक कम होती है। पुंभ मेले में देशभर से बड़ी संख्या में जेबकतरों का भी आगमन होता है। कड़ी निगरानी द्वारा उन्हें पकड़ा जाना चाहिए। चूंकि मेले में आतंकवादियों की हरकतों का खतरा भी बहुत अधिक हो गया है, इसलिए खुफियातंत्र को बेहद मजबूत एवं सतर्प रखने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री को इसके लिए पुलिस विभाग को सख्त निर्देश देना चाहिए। पिछले महापुंभ में पुलिस का व्यवहार दोषपूर्ण था, किन्तु केंद्रीय बलों ने जनता का दिल जीत लिया था। अतः इस बार भी केंद्रीय बलों को अधिक से अधिक संख्या में तैनात किया जाना चाहिए। मेला-क्षेत्र में भिखारियों पर नियंत्रण की व्यवस्था की जानी चाहिए, क्योंकि भिखारियों के कारण मेले की छवि खराब होती है।

मिलावटखोरी ने पूरे देश को बुरी तरह अपनी गिरफ्त में ले रखा है। पुंभ मेले में भी मिलावटखोर बाज नहीं आएंगे, अतः उन पर कड़ा नियंत्रण किया जाना चाहिए। त्वरित अदालतें लगाकर मिलावटखोरों को वहीं पर तुरंत दंडित किए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। जो नौकरशाह भ्रष्टाचारियों से सा"गां" करें, उन्हें भी क"ाsर दंड दिया जाना चाहिए। इसी पकार घटतौली पर बहुत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। मेले में दुकानदार यात्रियों को बहुत "गते हैं, अतः ऐसी पक्की व्यवस्था की जानी चाहिए कि यात्री "गे न जा सकें। पत्येक दुकान पर उसके यहां बिकने वाली वस्तुओं का सही मूल्य लिखा हुआ बड़ा बोर्ड इस पकार लगा होना चाहिए कि ग्राहकों को सामने आसानी से दिखाई दे जाए। आवश्यक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की आड़ में शहरों में दुकानदार पायः उन वस्तुओं पर उक्त कर की वसूली ग्राहकों से कर रहे हैं, जो वस्तुएं उन करों से मुक्त हैं। दुकानदार इस पकार ग्रहकों को "ग रहे हैं, किन्तु सरकार बदनाम हो रही है। मेले में दुकानदारों का यह खेल तो और अधिक होगा। सम्पूर्ण मेला-क्षेत्र में बांध के नीचे फ्लाईओवर बनाए जाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उचित यह होगा कि वे फ्लाईओवर स्थायी रूप से बनाए जों। जब नदी में खंभों पर रेल एवं सड़क वाले पुल बनाए जा सकते हैं तो बांध के नीचे लंबी दूरी तक फ्लाईओवर बनाना तो और भी आसान है। इन फ्लाईओवरों के निर्माण से मेले में करोड़ों की भीड़ को संभालने में बड़ी सुविधा हो जाएगी। वर्ष 1910 में संगम तट पर विराट विश्व-पदर्शनी आयोजित हुई थी, जिसका क्षेत्रफल शहर में वर्तमान जॉर्ज टाउन मुहल्ले तक फैला हुआ था। वह अद्भुत पदर्शनी थी तथा बचपन में मैंने बुजुर्गों से उसके तमाम विवरण सुने थे। उसमें पहली बार विमान उड़ा था। शासन को चाहिए कि भलीभांति शोध कराकर उस पदर्शनी का विवरण एकत्र कराए तथा आगामी पुंभ में उस विवरण की पदर्शनी आयोजित करे। इसी पकार पिछले महापुंभों एवं अर्धपुंभों आदि के चित्रों व विवरणों की पदर्शनी भी आयोजित की जानी चाहिए।

मेला-क्षेत्र में जितने भी पवेश वाले रास्ते हैं, उन सभी रास्तों पर विशाल पवेश-द्वार बनाए जाने चाहिए। वे पवेश-द्वार भारत के पसिद्ध मंदिरों की डिजाइन पर बनाए जाने चाहिए इससे मेला-क्षेत्र की गरिमा बढ़ जाएगी। कुछ वर्ष पूर्व परेड मैदान के पास सम्राट हर्षवर्धन की मूर्ति स्थापित की गई थी, जो बड़ी उपेक्षित स्थिति में है तथा वहां अतिक्रमण भी हैं। सम्राट हर्षवर्धन का पयागराज के महापुंभ से अभिन्न नाता था। वह उसमें अपना सर्वस्व दान कर देते थे, यहां तक कि केवल पहने हुए कपड़ों में वापस लौटते थे। अतः उनके मूर्तिवाले स्थल को संवारकर उसे विशाल रमणीक उद्यान का रूप दिया जाना चाहिए।

मेले में उत्तर पदेश सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए शिविर की व्यवस्था की जाती है, किन्तु पिछली बार पत्रकार-शिविर छोटा पड़ गया था। इस बार उसमें स्विसकॉटेज वाले तंबुओं की संख्या भी पिछली बार से दोगुनी की जानी चाहिए। विगत में उन स्विसकॉटेजों की व्यवस्था भी अत्यंत दुर्दशापूर्ण थी। स्विसकॉटेज घटिया किस्म के थे तथा उनमें पलंगों के बजाय फोल्डिंग चारपाइयां डाल दी गई थीं। कॉटेजों में ढंग के फर्नीचर नहीं रखे थे। मात्र एक-दो कुर्सियां थीं। अतः तंबुओं में अच्छे सोफे, सेंटर टेबुल, मेज, अलमारी आदि की अच्छी व्यवस्था की जानी चाहिए। पत्रकार-शिविरों में शौचालय एवं स्नानघर भी पिछली बार कम संख्या में थे, अतः उनकी संख्या बढ़ाकर इस पकार दोगुनी कर दी जाए कि हर शिविर के साथ उसका शौचालय एवं स्नानघर अलग हो, `कंबाइंड' न हो। लंबे समय तक चलने वाले मेले की कवरेज के लिए बहुत पत्रकारों को पत्रकार-शिविर में काफी दिन रुकना पड़ता है। अतः पूरा पत्रकार-शिविर एवं उसमें आवासीय तंबू भलीभांति सुविधायुक्त होने चाहिए। पिछले महापुंभ में पत्रकार-शिविर में नाश्ते-भोजन के लिए जो कैंटीन बनाई गई थी, वह अत्यंत असंतोषजनक एवं बहुत महंगी थी। वहां हर समय नाश्ता भी नहीं उपलब्ध होता था। अतः भोजनालय के साथ एक ऐसी अच्छी कैंटीन भी होनी चाहिए, जहां हर समय सस्ती दर पर ढंग का चाय-नाश्ता उपलब्ध रहा करे। पत्रकारों को मेला-क्षेत्र में आने-जाने एवं कवरेज के लिए ऐसे विशेष वाहन-पास दिए जाने चाहिए, जो वहां हर जगह मान्य हों। पुलिस वालों को भी सख्त निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे पत्रकारों का सम्मान व मदद करें। पिछली बार पत्रकार-शिविर के कॉटेजों में बहुत चोरियां हुई थीं, अतः इस बार सुरक्षा की बड़ी पुख्ता व्यवस्था की जानी चाहिए। वहां पत्रकारों की मदद के लिए पर्याप्त संख्या में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद हों।

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