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लोकसभा चुनाव में विस्फोटक होगा पुरानी पेंशन मुद्दा

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2018-11-28 16:00:54.0
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पेम शर्मा

लोकतंत्र को जिस तरह से भारत में बदनाम किया जा रहा है उसके लिए लिए हमारे जनपतिनिधि काफी स्तर तक स्वंय जिम्मेदार है। भारत में इस पदूषित होते लोकतंत्र को चलाने के लिए लगभग बिना काम की गारंटी वालें जनपतिनिधियों इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री सांसद आदि जनपतिनिधियों पर पति दिन लगभग एक हजार आ" सौ करोड़ खर्च हो रहे है। न पढ़ने लिखने की शर्त, न अनुभव न तजुर्बा उसके बावजूद राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री जैसे पदों पर आसीन जनपतिनिधियों को को मिलने वाले वेतन के बाद पेंशन की पूरी गारंटी ने हिन्दुस्तान में पेंशन व्यवस्था में दोहरे कानून का उदय कर दिया है। "ाrक उसी तरह कि हिन्दुस्तान ही ऐसा देश है जिसमें आबकारी और मद्यनिषेध विभाग एक साथ काम कर रहा है यानि एक पिलाने का काम देख रहा है तो दूसरा रोकने का काम देख रहा है। एक पशन और भारत ही एक ऐसा देश है जहां जनपतिनिधियों को अपने जीविका उर्पाजन की पूरी जिम्मेदारी जनता के टैक्स पर निर्भर है। जबकि फिलीपींस के राष्ट्रपति अपने जीविकोपार्जन के लिए सुबह सात से दस तक खेत पर खेती और उसके उपरांत कार्यालय इसके बाद फिर टाइम मिला तो फिर खेती लेकिन भारत में तो जनपतिनिधि बनने के बाद पूरे जीवन का खर्चा जनता के टैक्स के सहारे होने के साथ साथ सात पीढ़ियों के लिए धन एकत्रित कर लेने के हजारों उदाहरण है। भारत ही ऐसा देश है जहां जनता और सरकारी कर्मचारी इन जनपतिनिधयों के रहमों करम पर है। लोकतंत्र की गलत परिभाषा तैयारी की जा रही है अब जनता भगवान नही बल्कि जनपतिनिधी भगवान बनते जा रहे है। विश्व का शायद ही ऐसा कोई दूसरा देश होगा जहां रोड़ टैक्स के साथ टोल टैक्स भी देना पड़ता हो। इतना सब इसलिए की हम देश के लगभग 70 लाख केंद्र और राज्य कर्मचारियों के उस मुद्दे की चर्चा कर रहे है जिससे केंद्र और राज्य सरकारे जानबूझकर अनजान बनी है। नई पेंशन योजना की धनराशि को लेकर उत्तर पदेश के पुरानी पेंशन बहाली मंच ने जो पकरण हाल में सार्वजनिक किया वह चौंकाने वाला है। मंच के नेताओं ने कहा कि नई पेंशन में कर्मचारियों का पैसा ऐसी कंपनी में लगाया जा रहा है जो पहले ही एक साल में सात बार डिफाल्टर घोषित हो चुकी है।

यूपी से ही नई पेंशन योजना के तहत 2,47,000 पाथमिक शिक्षक, 51 हजार माध्यमिक शिक्षक, 2,77,000 राज्य कर्मचारी और 16 हजार अधिकारी पभावित हो रहे है। आगामी लोकसभा में एक अनुमान के मुताबिक नई पेंशन व्यवस्था से नाराज कर्मचारी शिक्षक और अधिकारियों का आकड़ा 70लाख यानि एक परिवार में पांच वोटर तो 543 लोकसभा सीटों में पत्येक पर लगभग 50 हजार से एक लाख वोटर भाजपा सरकार के विरोध में सामने आएंगे। हर राजनैतिक दल जातिगत गणना के आधार पर कुर्मी, कुशवाहा, यादव, तेली समाज की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा किया जाता है। तो कर्मचारी और शिक्षक समाज की इस बहुतायत संख्या की उपेक्षा करके कोई दल यह कैसे दावा कर सकता है कि वह पूर्ण बहुमत की सरकार बना लेगा। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी उग्र हो चुके हैं। यह आग फिलहाल यूपी में तेज से बढ़ी है। पुरानी पेंशन बहाली मंच और अटेवा के साथ शायद ही ऐसा केई राज्य और केंद्र का कर्मचारी संग"न होगा जो नई पेंशन नीति का विरोध न कर रहा हों। इससे विकास कार्य पभावित हो रहे है। आंदोलन और विरोध के चलते कर्मचारियों का अपने काम के पति रूझान बदल रहा है। यह आग धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ रही है। 2019 तक यह आग राष्ट्रव्यापी हो सकती है। उत्तर पदेश पुरानी पेशन बहाली मंच के बैनर तले तीन दिवसीय हड़ताल की धमकी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद बनी उच्चस्तीय समिति की पहली बै"क 12 नवम्बर को हुई जो पूरी तरह से फेल रही यानि यह माना जाए कि सरकार पुरानी पेशन बहाली पक्ष में बिल्कुल नही है। नई पेंशन योजना लागू कर कर्मचारियों को तोहफा देने की भले ही बात कर रही हो, लेकिन कर्मचारियों को जो `अक्स' पुरानी पेंशन योजना में दिख रहा था, वो में नहीं दिख रहा है। कर्मचारी दोनों योजना में अंतर निकालने के साथ नफा-नुकसान पर मंथन करते देखे जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन पाने वालों के लिए जीपीएफ सुविधा उपलब्ध है, जबकि नई पेंशन योजना में नहीं है। इसी तरह पुरानी पेंशन के लिए वेतन से कोई कटौती नहीं होती है, जबकि नई पेंशन योजना में फ्रति माह 10 प्रतिशत की कटौती निर्धारित है। पुरानी पेंशन योजना में रिटायरमेंट के समय एक निश्चित पेंशन (अंतिम वेतन का 50 पतिशत) की गारंटी है, लेकिन नई योजना में पेंशन कितनी मिलेगी? यह निश्चित नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह शेयर मार्केट व बीमा कंपनी पर निर्भर है। कर्मचारियों का तर्क है कि पुरानी पेंशन सरकार देती है, जबकि नई पेंशन बीमा कंपनी देगी।

यदि कोई समस्या आती है तो हमें सरकार से नहीं, बीमा कंपनी से लडना पड़ेगा। पुरानी पेंशन पाने वालों के लिए रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी (अंतिम वेतन के अनुसार 16.5 माह का वेतन) मिलता है, जबकि नई पेंशन वालों के लिए ग्रेच्युटी की कोई व्यवस्था नहीं है। पुरानी पेंशन वालों को सेवाकाल में मृत्यु पर डेथ ग्रेच्युटी मिलती है, जबकि नई पेंशन वालों के लिए डेथ ग्रेच्युटी की सुविधा समाप्त कर दी गई है। पुरानी पेंशन में आने वाले लोगों को सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन मिलती है, जबकि नई योजना में पारिवारिक पेंशन को समाप्त कर दिया गया है। पुरानी पेंशन पाने वालों को हर छह माह बाद महंगाई तथा वेतन आयोगों का लाभ भी मिलता है, जबकि नई योजना में फिक्स पेंशन मिलेगी। महंगाई या वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलेगा

यह हमारे समझ से सबसे बड़ी हानि है। पुरानी पेंशन योजना वालों के लिए जीपीएफ से आसानी से लोन लेने की सुविधा है, जबकि नई पेंशन योजना में लोन की कोई सुविधा नही है। पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ निकासी (रिटायरमेंट के समय) पर कोई आयकर नहीं देना पडता है, जबकि नई पेंशन योजना में जब रिटायरमेंट पर अंशदान का 60 पतिशत वापस मिलेगा। इसी तरह जीपीएफ पर ब्याज दर निश्चित है, जबकि एनपीएस पूरी तरह शेयर पर आधारित है। नई पेशन को लेकर जब यह मामला सामने आया तो नई पेंशन योजना से पभावित कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी और भड़क गए। आईएल एंड एफएस (इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज) का नाम बहुत लोगों ने नहीं सुना होगा। यह एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं। इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की श्रेणी में रखा जाता है। जो बैंकों से लोन लेती हैं। जिसमें कंपनियां निवेश करती हैं और आम जनता जिसके शेयर खरीदती हैं।इस कंपनी को कई रेटिंग एजेंसियों से अति सुरक्षित दर्जा हासिल है। `एए प्लस' की रेटिंग हासिल है। यह कंपनी बैंकों से लोन लेती है। लोन के लिए संपत्ति गिरवी नहीं रखती है। कागज पर गारंटी दी जाती है कि लोन चुका देंगे। चूंकि इसके पीछे भारत सरकार होती है इसलिए इसकी गारंटी पर बाजार को भरोसा होता है। मगर एक हफ्ते के भीतर इसकी रेटिंग को `एए प्लस' से घटाकर कूड़ा करकट कर दिया गया है। अंग्रेजी में इसे जंक स्टेटस कहते हैं। अब यह कंपनी जंक यानि कबाड़ हो चुकी है। जो कंपनी 90,000 करोड़ लोन डिफाल्ट करने जा रही हो वो कबाड़ नहीं होगी तो क्या होगी। जाहिर है इसमें जिनका पैसा लगा है वो भी कबाड़ हो जोंगे। फ्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड का पैसा लगा है। यह आम लोगों की मेहनत की कमाई का पैसा है। डूब गया तो सब डूबेंगे। आईएल एंड एफएस गैर-बैंकिंग वित्तीय सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी है. इस सेक्टर पर बैंकों का लोन 496,400 करोड़ है। अगर यह सेक्टर डूबा तो बैंकों के इतने पैसे धड़ाम से डूब जोंगे। मार्च 2017 तक लोन 3,91,000 करोड़ था. जब एक साल में लोन 27 फ्रतिशत बढ़ा तो भारतीय रिजर्व बैंक ने रोक लगाई। सवाल है कि भारतीय रिजर्व बैंक इतने दिनों से क्या कर रहा था। जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ही इन वित्तीय कंपनियों की निगरानी करता है। म्यूचुअल फंड का 2 लाख 65 हजार करोड़ लगा है। कर्मचारियों के पेंशन और फ्रोविडेंट फंड का पैसा भी इसमें लगा है। इतना भारी-भरकम कर्जदार डूबेगा तो कर्ज देने वाले, निवेश करने वाले सब के सब डूबेंगे।

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