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पधानमंत्री ने अपना एजेंडा साफ कर दिया

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2019-01-03T20:49:18+05:30
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शकील सिद्दीकी

नववर्ष के पहले दिन फ्रधानमंत्री मोदी का साक्षात्कार टीवी चैनलों पर फ्रसारित किया गया। फ्रधानमंत्री का यह संपूर्ण साक्षात्कार एएनआई समाचार एजेंसी की संपादक ने लिया था। इस इंटरव्यू में पधानमंत्री ने देश के सामने अपनी सरकार के काम-काज तो रखा ही वहीं आने वाले समय की राजनीति के संकेत भी दे दिए। फ्रधानमंत्री मोदी का चुनाव वर्ष में फ्रथम साक्षात्कार अपने आप में उनकी सार्वजनिक साफगोई है। अगर ये कहा जाए कि पधानमंत्री ने 2019 के आम चुनाव के लिये अपना एजेंडा साफ कर दिया है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। साल के पहले ही दिन पधानमंत्री के साक्षात्कार ने राजनीतिक तापमान बढ़ाने का काम किया। इसका असर संसद से सड़क पर देखने को मिला। अपने अब तक के कार्यकाल में पधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गिने-चुने इंटरव्यू ही दिए हैं, लेकिन पधामनंत्री का नए साल के पहले दिन पसारित इंटरव्यू कई मायनों में ऐतिहासिक एवं काफी अहम है।

2019 वह साल, जब आम चुनाव होंगे। चुनाव की मुहिम नरेंद्र मोदी ने छेड़ दी है। साल का पहला साक्षात्कार सामने है। उन्होंने खूब बोला है। हर मुद्दे पर बोला है। उसी तरह बोला है, जैसे वे आमतौर पर बोलते हैंöजी हां, मन की बात। इसमें बोलने वाला आजाद होता है और सुनने वाला सुनने के लिए मजबूर। पधानमंत्री ने तमाम सवालों का जवाब देते हुए कई महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलासे किए, अपने स्पष्टीकरण दिए और उनका सम्यक विश्लेषण भी किया। माना जा सकता है कि देश का कुहासा छंटा होगा, कई भ्रांतियां टूटी होंगी और फ्रधानमंत्री की भावी योजनाओं की थाह भी मिली होगी। पहली बार फ्रधानमंत्री मोदी ने साफगोई से कहा कि अयोध्या के राम मंदिर पर फिलहाल अध्यादेश जारी नहीं किया जाएगा। संवैधानिक तरीके और मर्यादाओं से ही समस्या का समाधान निकल सकता है। यदि आवश्यकता हुई, तो कानूनी फ्रक्रिया के बाद ही अध्यादेश पर विचार किया जा सकता है। इस साफगोई के जरिये फ्रधानमंत्री ने संघ परिवार की अध्यादेश लाने या कानून बनाने की लगातार मांग को खारिज कर दिया है।

फ्रधानमंत्री ने कांग्रेस को राम मंदिर के रास्ते में रोड़ा करार दिया और आग्रह किया कि कांग्रेस अपने वकीलों को रोके कि वे अदालत में हस्तक्षेप न करें। अब यह सवाल है कि 2019 के चुनाव से पहले राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा या नहीं अथवा इस आस्थामय और भावनात्मक मुद्दे को अनसुलझा ही रहने दिया जाएगा? फ्रधानमंत्री मोदी ने गांधी परिवार पर पहली बार इतना स्पष्ट और तगड़ा हमला करते हुए कहा है कि चार पीढ़ियों तक देश पर राज करने वाले आज जमानत पर बाहर हैं और वह भी पैसों की हेराफेरी के कारण। राफेल विमान सौदे पर उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर व्यंग्य कसाö`उन्हें बहुत ज्यादा बोलने की बीमारी है, तो मैं क्या कर सकता हूं।' फ्रधानमंत्री ने कहा कि राफेल में व्यक्तिगत तौर पर आरोप उनके खिलाफ नहीं हैं। वह संसद में सब कुछ खुलासा कर चुके हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति बयान दे चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। अब उन्हें कितनी भी गालियां दी जाएं, कितने भी आरोप मढ़े जाएं, उन्होंने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। फ्रधानमंत्री ने कहा कि राफेल को लेकर जो आरोप हैं वह उन पर व्यक्तिगत आरोप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संसद में वे राफेल पर जवाब दे चुके हैं। बार-बार आरोपों का जवाब नहीं देंगे। पर, राफेल मामले में अगर बार-बार नए-नए किस्से निकलकर सामने आ रहे हैं तो फ्रधानमंत्री उसका जवाब क्यों नहीं देंगे? राफेल मामले पर उन्होंने सुफ्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने का उल्लेख किया, लेकिन इसका उल्लेख नहीं किया कि सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में गलत तथ्य दिए गए या फिर दिए गए तथ्यों का सुफ्रीम कोर्ट ने गलत मतलब समझा।

फ्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह तो कहा कि लीचिंग जैसी घटनाएं सभ्य समाज को शोभा नहीं देता, गलत है निंदनीय है। लेकिन, यह नहीं बताया कि लीचिंग की घटनाओं के खिलाफ वे चुप क्यों रह जाते हैं, कभी कोई ट्वीट क्यों नहीं किया, लीचिंग की घटना में शामिल लोगों के साथ उनकी कैबिनेट के सदस्य तस्वीर खिंचाते रहे फिर भी उनकी डांट-फटकार समाज को क्यों नहीं सुनाई पड़ी।

विपक्ष के लंबे समय से आरोप लगाए जाने और बयानबाजी की बावजूद फ्रधानमंत्री ने यह साफ नहीं किया कि 15 लाख रुपए फ्रत्येक नागरिक के बैंक खाते में जमा होने का सच क्या है? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2013 एक रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यदि सारा काला धन देश में वापस आ जाए, तो हरेक नागरिक के खाते में 15-15 लाख रुपए यूं ही आ सकते हैं। कांग्रेस ने इसकी भाषा बदलकर राजनीतिक मुहावरा बना लिया और भाजपा या मोदी सरकार ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। न जाने क्यों? फ्रधानमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक, पाकिस्तान से लेकर किसान और कर्जमाफी, महंगाई और मध्यवर्ग, भीड़ की हिंसा और राजनीतिक हत्याओं आदि पर बहुत कुछ बोला। महत्वपूर्ण यह रहा कि हाल की तीन राज्यों में चुनावी हार से भाजपा का काडर और नेतृत्व जरा-सा भी हतोत्साहित नहीं हैं।

2019 के चुनावों के मद्देनजर फ्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी के साथ मुकाबला स्वीकार न करते हुए नया समीकरण दिया हैöजनता बनाम महाग"बंधन। फ्रधानमंत्री ने खुद को जनता के प्यार और आशीर्वाद का फ्रतीक माना है। उनकी यह सोच भी सामने आई है कि लहर मोदी की नहीं होती, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और उम्मीदों की होती है। जनता 2019 में भी चुनाव की दिशा और एजेंडा तय करेगी।

बेहतर रहा कि फ्रधानमंत्री ने नोटबंदी और जीएसटी सरीखी आर्थिक नीतियों का भी बचाव किया। वह इन्हें राजनीतिक धक्का नहीं मानते, बल्कि पहली बार दावा किया है कि अब 500 से अधिक चीजों पर टैक्स `जीरो' फीसदी है। हमने करों को एकीकृत किया है और यह करने में केंद्र सरकार के साथ सभी राज्य सरकारों के वित्तमंत्री भी हैं। फैसले सामूहिक तौर पर लिए जा रहे हैं। कारोबारियों के एक तबके को कुछ झेलना पड़ा है, लेकिन उसे भी तर्पसंगत और फायदेमंद बना रहे हैं। फ्रधानमंत्री ने यह भरोसा भी देश के साथ साझा किया है कि भारत सरकार ने जिन देशों के साथ संधियां की हैं, अब उनके नतीजे सामने ओंगे और एक दिन काले धन को देश में वापस आना ही होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि कर्जमाफी से किसानों का भला नहीं होगा। स्थिति बनानी चाहिए कि किसान कर्ज न लें। फ्रधानमंत्री क्या यही बात उद्योगपतियों के लिए बोल सकते हैं? बोल सकते हैं तो क्यों नहीं बोले? पीएम मोदी इस बात पर भी चुप रहे कि आत्महत्या करने वाले किसान कब तक इंतजार करें जब कर्ज लेने की स्थिति खत्म हो जाए? सहयोगी दलों की नाराजगी पर फ्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर हर दल अपना विस्तार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि जो हमसे जुड़ता है फलता है फूलता है। लेकिन एनडीए लगातार सिकुड़ता क्यों जा रहा है, उसे नए साथी क्यों नहीं मिल रहे हैं, पुराने साथी छोड़कर क्यों जा रहे हैं ऐसे सवालों का जवाब फ्रधानमंत्री ने नहीं दिया।

फ्रधानमंत्री ने आत्मचिंतन और चर्चा की बात कही, लेकिन त्रिपुरा, असम, कश्मीर, हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत का उल्लेख भी किया। फ्रधानमंत्री मोदी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया कि रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे उर्जित पटेल बीते 6-7 महीने से इस्तीफा देने को कह रहे थे। उन्होंने लिखित में भी दिया था, लिहाजा किसी भी राजनीतिक दबाव की बात सरासर गलत है। अब देश के सामने फ्रधानमंत्री की सोच और एजेंडा स्पष्ट हैं। लिहाजा उनका आकलन कर निर्णय लिया जा सकेगा कि देश अब भी उनमें भरोसा रखता है या कोई अन्य विकल्प की तलाश में है। आने वाले चंद महीनों में सारी स्थिति साफ हो जाएगी, फिलवक्त पीएम ने अपना एजेंडा, रीति-नीति देश के सामने रख दी है।

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