Home » द्रष्टीकोण » हिन्दू की सहिष्णुता के उपहास की पतिक्रिया न हो जाए

हिन्दू की सहिष्णुता के उपहास की पतिक्रिया न हो जाए

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2019-01-10T20:39:24+05:30
Share Post

राजनाथ सिंह `सूर्य'

फिल्मों में विविध पकार के सभ्य जनों की भूमिका निभाने वाले नसीरुद्दीन शाह ने एक बार फिर से देश में असहिष्णुता के बढ़ते जाने का दावा करते हुए अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंता व्यक्त की है। जीवन के कई दशक भारतीय वातावरण में आरामदेह तरीके से बिताने के बाद नसीरुद्दीन का यह बयान भारतीयता को लांक्षित करने के पयासों की एक कड़ी मात्र है। जो लोग भारतीयत्व के पभाव और व्यापकता के बढ़ने से पिछले कुछ वर्षों से चिंतित दिखाई पड़ रहे हैं उनमें एक व्यक्ति और शामिल हो गया है। कश्मीर से विस्थापित चार लाख हिन्दुओं की दुर्दशा पर मुंह न खोलने वाले और अपने धर्म तथा ईमान की रक्षा के लिए पाकिस्तान से कश्मीर आ गए हिन्दुओं को नागरिकता न देने पर जो चुप्पी साधे हुए हैं उन्हें कुछ छिटपुट घटनाओं के कारण न केवल संवेदनशून्यता की अनुभूति हो रही है बल्कि देश के टुकड़े-टुकड़े करने वालों के नारों के साथ खड़े होकर देश के विरुद्ध शस्त्र उ"ाने वालों को अभिव्यक्ति की आजादी का सेनानी मानने वाले लोगों ने एक बार फिर से 2019 के चुनाव को देखते हुए अपना विलाप शुरू कर दिया है। उन्हें इस बात की चिंता है कि गौ हत्या करने वालों को कुछ भीड़ ने मारकर अराजकता की स्थिति पैदा की है। उन्होंने कभी इस तर्प पर ध्यान नहीं दिया कि आखिर भीड़ को उन्मादित करने का काम किसने किया। गोहत्या पर पूर्ण पतिबंध है। इस पतिबंध का उल्लंघन कर जो कानून हाथ में लेते हैं वही हमला करने वाली भीड़ को कानून में हाथ लेने के लिए पेरित करते हैं। इस पकार की घटना केवल नरेंद्र मोदी के पधानमंत्री बनने के बाद से हो रही है ऐसा ही अभियान चलाया जा रहा है जबकि देश में एक तबका ऐसा है जो हिन्दुओं को चिढ़ाने के लिए उसके मान बिन्दुओं को अपमानित करने के पयास से कभी पीछे नहीं हटा ऐसे लोगों के कारण और उनके पक्ष में खड़े होने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी देश को असहिष्णुता की ओर धकेल रहे हैं।

कुछ लोगों का यह विश्वास है झू" बार-बार बोलने से लोग उसे सच मानने लगते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आजकल इस फार्मूले पर अमल करने वालों की अगुवाई कर रहे हैं। नसीरुद्दीन शाह की अभिव्यक्ति उसी फार्मूले का एक हिस्सा है। जो भारत में असहिष्णुता की बात कर रहे हैं उन्हें यह बात समझ में नहीं आएगी देश और दुनिया में सबसे आदर्श पुरुष भगवान राम के जन्मस्थान पर उनकी मान्यता और मर्यादा के अनुरूप एक भव्य स्मारक खड़ा करने के लिए हिन्दू समाज 100 वर्ष से अधिक समय से अदालतों के चक्कर लगा रहा है। यदि पाकिस्तान के समाज में असहिष्णुता होती तो अब तक इस कलंक को कब तक मिटा दिया गया होता। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग जिस भाषा का पयोग कर रहे हैं उसको सहन करना दुनिया के किसी भी सभ्य समाज के लिए असंभव है लेकिन भारत का हिन्दू समाज न केवल उसे बर्दाश्त कर रहा है बल्कि अपने को हिन्दू कहने वाले लोग उनके हां में हां मिला रहे हैं। यह बात अलग है कि राम जन्मभूमि का मसला न्यायालय में विचाराधीन हैं परन्तु सहने की भी एक सीमा होती है। अपने आदर्श पुरुष के लिए अपमानजनक स्थिति से जो व्याकुलता बढ़ रही है वह लक्ष्मण रेखा पार न कर जाए इसकी चिंता समझदार लोगों को करनी चाहिए। हिन्दू समाज की सहिष्णुता और उदारता का कोई उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है। सर्वधर्म समभाव के जिस आदर्श पर समाज खड़ा है उसी का परिणाम है कि भारत में इतने समुदाय पंथ उपासना की पद्धति पचलित है इसकी गणना करना भी संभव नहीं है लेकिन सभी सामंजस्य पूर्ण ढंग से रहते हैं। उस स्थिति में भी जबकि पास-पड़ोस के देशों में एक ही उपासना पद्धति का अनुसरण करने वाले लोग आपस में युद्धरत हैं। हजारों वर्ष से आक्रमणकारियों के शोषण और दुराचार के बाद भी अपने को उनका वंशज मानने वाले लोगों के साथ जिस समरसता से युक्त होकर हिन्दू समाज व्यवहार कर रहा है और उस पर पड़ोस में हिन्दुओं के उत्पीड़न और उदबासन के पतिक्रिया नहीं हो रही है इससे अधिक संवेदनशीलता का दूसरा कोई उदाहरण नहीं हो सकता।

यह पचार बिना तथ्य के एक गिरोह द्वारा निरंतर किया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के पधानमंत्री बनने के बाद देश में अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो गई है। संवैधानिक व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। यह आरोप लगाने वालों में वे लोग भी शामिल हो गए हैं जो पधानमंत्री पद पर बै"s किसी व्यक्ति के लिए खूनी और चोर जैसे अपशब्दों का पयोग करने के बाद छुट्टा घूम रहे हैं। बेबुनियाद आरोप लगाने वाले कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया है कि देश में आपातकाल से अधिक दुरूह स्थिति हो गई है। संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना की जा रही है। ऐसा कहने वाले स्वयं संवैधानिक संस्थाओं यथा संसद, न्यायालय, निर्वाचन आयोग आदि के पति ऐसे आचरण का उदाहरण पस्तुत कर रहे हैं और नियम तथा कानून को हाथों में लेने के लिए पेरित कर रहे हैं इसका गंभीरता से संज्ञान लेने की जरूरत है। शायद पहली बार लोकसभा अध्यक्ष ने इसका संज्ञान लिया है और एक पार्टी के 24 सदस्यों को सत्र काल के लिए निलंबित कर दिया है। शायद यह नियमानुकूल कार्रवाई पहले हो गई होती तो संसद की इतनी भद्द इन पांच सालों में पिटी है जिसने काननू व्यवस्था को हाथ में लेने के लिए पेरित किया है वह नहीं होता। जब सांसद और देश को दिशा देने का दावा करने वाले राजनीतिक नेता हुड़दंग पर उतर आएं तो उसका पभाव उनके चुनने वालों पर नहीं पड़ेगा इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। तर्प और अभिव्यक्ति से किसी विषय पर सरकार को घेरने के बजाय हुड़दंग से विरोध पकट करने की पवृत्ति यदि देश में कहीं असहिष्णुता है तो उसके कारण बनती है।

हजारों वर्ष से आक्रमण लूटपाट और सामूहिक नरसंहार को नजरंदाज कर जिस हिन्दू समाज ने ऐसा करने वालों के वंशजों के पति कभी असहिष्णुता नहीं पकट किया उसी समाज को असहिष्णु कहने का दुस्साहस कुछ लोगों को इसलिए हो रहा है क्योंकि अवैध और अनैतिक तरीके से चलने वाले उनके धंधों की दुकान बंद हो रही है और वे उन विदेशी हस्तकों के शिकार बन रहे हैं जिनके उछिस्" से अपना पेट भर रहे थे। नरेंद्र मोदी ने दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया है। पांच वर्ष पहले तक कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि भारत दुनिया की महाशक्तियों में खड़ा हो सकेगा। वह कभी एक देश कभी दूसरे देश का पिछलग्गू बना रहता था आज वही देश भारत से बराबरी का संबंध रखने के लिए लालायित दिखाई दे रहे हैं। मोदी की पहली सरकार है जिस पर भ्रष्टाचार का कोई तथ्यात्मक आरोप नहीं लगाया जा सका और जिस पशासन ने भ्रष्टाचार को जड़मूल से हटाने के लिए एक ऐसी शासन पद्धति अपनाई है जिसकी सफलता के बाद इस रोग से सदैव के लिए मुक्ति पाप्त की जा सकती है। देश की संवैधानिक संस्थाओं सेना और युवाओं में जो आत्मविश्वास बढ़ा है उसको ध्वस्त करने का पयास वे लोग करने को उतारू हैं जो मुखौटाधारी हैं उनमें एक मुखौटा फिल्मी कलाकारों का है। वह जिस कलाकार का पात्र निभाते हैं वे उसके अनुरूप आचरण भी करते हैं यह भ्रम कभी नहीं रहा है लेकिन फिर भी बहुत से लोग उन्हें अपना हीरो मानते हैं ऐसे लोगों का भ्रम तोड़ने के लिए नसीरुद्दीन शाह को साधुवाद अवश्य दिया जा सकता है। ऐसे लोगों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल के चित्रयुक्त कैलेंडर घर-घर पहुंचा हुआ था लेकिन जब वे पयाग की एक जनसभा में राजनीतिक दल के एक उम्मीदवार के पक्ष में वक्तव्य देने के लिए खड़े हो गए उसके बाद से पूर्णतः तिरोहित हो गए।

(लेखक राज्यसभा के पूर्व सदस्य हैं।)

Share it
Top