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कई राष्ट्रों के निशाने पर पाक

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2019-03-07T20:46:16+05:30
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प्रेम शर्मा

पुलवामा हमले के बाद भारत की सर्जिकल स्ट्राईक से पाकिस्तान घबराया जरूर लेकिन अपनी हरकतों से बाज नही आ रहा है। भारत के बाद ईरान ने भी पाकिस्तान को भारत जैसी कार्रवाई की चेतावनी दे दी है। यही नही अफगानिस्तान और अमरीका के निशाने पर भी पाकिस्तान आ चुका है। पाकिस्तान पुलवामा हमला, प"ानकोट एयरबेस पर हमला, उरी सैन्य ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला, श्रीनगर में बादामीबाग कैंट पर हमला और जम्मू कश्मीर विधानसभा के पास बम विस्फोट इनमें शामिल हैं.। साल 2001 में जैश-ए-मोहम्मद ने भारतीय संसद पर हमला किया था। साल 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले को भी पाकिस्तान से आए लश्कर आतंकियों ने अंजाम दिया था। जमात-उद-दावा फ्रमुख हाफिज सईद इस हमले का मास्टरमाइंड था। भारत लगातार पाकिस्तान की आतंकी परस्ती के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। 1990 में ऑपरेशन रक्षक में आतंकियों के खिलाफ अभियान में 20000 से अधिक आतंकी मारे गए। यही नही 2007 से 2015 के बीच 753 जवान शहीद हुए।

अफ्रैल-मई 2016 में ऑपरेशन सर्प विनाश पीर पंजाल पहाड़ी को आतंकियों से मुक्त कराने के लिए इसे शुरू किया गया था और अभियान में 64 आतंकी मारे गए। 2018 में 247 आतंकवादी ढेर हुए। अब पुलवामा के बाद भारत सरकार के प्रधानमंत्री की सेना को मिली खुली छूट के बाद सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय 200 आतंकियों के खात्मे का खाका तैयार कर लिया है। आने वाले दिनों में विभिन्न संग"नों से जुड़े इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। आतंकियों पर चौतरफा दबाव है। भारत की हवाई कार्रवाई में पाक स्थित शिविरों के नष्ट होने से आतंकियों में बौखलाहट है। वहीं पाक सरकार पर भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत समेत पूरे विश्व का दबाव है। इसलिए माना जा रहा है कि अभी कुछ समय तक पाक की ओर से आतंकियों की घुसपै" नहीं कराई जाएगी। ऐसे में घाटी में छिपे आतंकियों के सफाए के लिए अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान में घाटी में हिजबुल, लश्कर, जैश समेत कुछ जेकेआईएसआईएस के आतंकी सक्रिय हैं। इनमें करीब 45-50 कुख्यात आतंकी कमांडर या उप कमांडर होने का दावा करते हैं। इनके पास नए युवाओं की भर्ती करने और फ्रशिक्षण देने का जिम्मा है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के सफाए के साथ नई भर्तियों को भी रोकने और घाटी में उनके शिविरों को नष्ट करने का फ्रयास कर रही हैं। पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद के खिलाफ बढ़ता वैश्विक दबाव स्वागत योग्य है। भारत के पुलवामा में 14 फरवरी को जैसा आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था, ईरान के सिस्तान व बलूचिस्तान फ्रांत में भी "ाrक वैसा ही हमला 13 फरवरी को हुआ था। जब भारत ने 40 से अधिक जवानों के शहीद होने का फ्रतिशोध बालाकोट में हवाई हमले से लिया, तब ईरान में भी 27 जवानों के शहीद होने का फ्रतिशोध लेने की मांग व चर्चा तेज हो गई। कोई आश्चर्य नहीं, ईरान के सैन्य कमांडर सीधे पाकिस्तान को धमकी दे रहे हैं कि पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करे, अन्यथा ईरान स्वयं कार्रवाई करेगा।ऐसे में भारत के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के "िकाने पर कार्रवाई करने के बाद ईरान भी पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों से निपटने को तैयार है। ईरान के आईआरजीसी कुर्द्स फोर्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी ने पाकिस्तान सरकार और उसके सैन्य फ्रतिष्"ान को सख्त शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, मेरे पास पाकिस्तान सरकार के लिए यह सवाल है कि वह कहां जा रही है। उसने अपने तमाम पड़ोसी देशों की सीमाओं पर अशांति पैदा की है। कोई पड़ोसी नहीं बचा है जिसके लिए पाकिस्तान असुरक्षा को बढ़ावा नहीं देना चाहता। ईरानी संसद के विदेश नीति आयोग के अध्यक्ष हशमतुल्लाह फलाहतपिशेह ने कहा, तेहरान पाकिस्तान से लगती अपनी सीमा पर दीवार बनाना चाहता है। उनका मानना है कि पाकिस्तान अगर अपनी जमीन पर आतंकी समूहों के खिलाफ फ्रभावी कार्रवाई नहीं करेगा तब ईरान पाकिस्तान में आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। गौरतलब है कि आतंकवाद से सख्ती से निपटने के मुद्दे पर ईरान और भारत एक दूसरे से सहमत हैं और साथ खड़े नजर आ रहे हैं। दरअसल दोनों देश सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहे हैं और हाल के वर्षों में इनके बीच सहयोग में भी बढ़ोतरी हुई है। इरान का कहना है कि 13 फरवरी को रिवोल्यूशनरी गार्ड पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें 27 जवान शहीद हो गए। जैश-अल-अदल गुट ने इसका जिम्मा लिया, जो तेहरान के मुताबिक पाकिस्तान आधारित है। तेहरान ने कहा कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों में कम से कम तीन पाकिस्तानी थे। जनरल कासिम सुलेमानी, कमांडर, आईआरजीसी कुर्द्स फोर्स, ईरान का कहना है कि क्या परमाणु बम रखने वाला पाकिस्तान क्षेत्र में कुछेक सौ सदस्यों वाले आतंकी समूह को तबाह नहीं कर सकता। पाकिस्तान ईरान के इरादे का इम्तहान न ले। भारत में आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, जबकि ईरान में हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-अदल ने ली है। जैश-ए-अदल सुन्नी आतंकी संग"न है, जिसे पाकिस्तान में समर्थन उपलब्ध है। शिया वर्चस्व वाली ईरानी सेना के जवान इस आतंकी संग"न का निशाना बनते रहे हैं, जिसकी वजह से ईरान में पहले से ही नाराजगी रही है। इस नाराजगी को भारत की जवाबी सैन्य कार्रवाई से जो बल मिला है, उससे ईरान और पाकिस्तान के बीच खटास बढ़ गई है। यह ताजा खटास या दबाव जहां पाकिस्तान में सुधार के अनुकूल है, वहीं मुस्लिम दुनिया के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। मुस्लिम दुनिया में ईरान बहुत महत्वपूर्ण देश है और पाकिस्तान का पुराना सहयोगी भी। भारत से 1965 और 1971 की लड़ाई में ईरान ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। ईरान का सत्ता फ्रतिष्"ान कश्मीर के मामले में भी पाकिस्तान का पक्षधर रहा है। ऐसे में, ईरान की पाकिस्तान से नाराजगी निर्णायक हो सकती है, जब इसके निहितार्थ को समझा जाए। पहला निहितार्थ यह है कि आतंकी किसी के नहीं होते। जो आतंकियों को पालता है या पलने देता है, वह भी एक दिन आतंक का शिकार हो जाता है। दूसरा निहितार्थ, ईरान की आतंकवाद को लेकर समझ बढ़ी है और वह भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। भारत के लिए यह फ्रश्न ज्यादा महत्वपूर्ण है कि क्या ईरान अब कश्मीर पर आतंकियों या पाकिस्तान का पक्ष लेना छोड़ देगा? तीसरा, ईरान क्या सीधे आतंकी संग"नों को निशाना बनाने वाला है और क्या ईरान के ऐसा करने पर अमेरिका और सऊदी अरब चुप बै"sंगे? .आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाला पाकिस्तान भारत, ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका सहित कई देशों के लिए खतरा बन चुका है। अमरीका का मानना है कि 9-11 का साजिशकर्ता अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन पाक के एबटाबाद में छिपा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में धोखा देता रहा है। इसी कारण ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली दो अरब डॉलर की सहायता पर रोक लगा दी।जबकि अफगानिस्तान कह रहा है कि यहां बीते कुछ साल में हुए आतंकी हमलों के लिए पाक रक्षा फ्रतिष्"ान पर उंगली उ"ती रही है। पाकिस्तान आतंकवाद के जरिये काबुल की राजनीति को फ्रभावित करने की जुगत में रहता है। अफगानिस्तान में भारत की अहम भूमिका को देखते हुए पाक यहां अशांति फैलाना चाहता है। निस्संदेह, आतंकवाद के खिलाफ सधे कदमों से चलने की जरूरत है। ईरान अपनी ओर से पाकिस्तान पर दबाव जारी रखे, अपने क्षेत्र में आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। भारत के साथ वह व्यापक सहयोग बढ़ाए और कश्मीर या भारत को देखने में मजहब का चश्मा इस्तेमाल न करे।

अरब देशों में समझदारी का नया दौर शुरू होना चाहिए। धर्म के आधार पर दुनिया को देखना बेमानी है। आज पाकिस्तान 45 से 48 आतंकी संग"नों की शरणस्थली बना हुआ है, तो हर उस देश को अपनी रीति-नीति में सुधार करना चाहिए, जिसने कभी न कभी पाकिस्तान की पी" थपथपाई है। ईरान वाकई आतंक के खिलाफ सच्चाई के रास्ते सामने आया तो पाकिस्तान को बहुत कष्ट होगा।

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