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मसूद का वैश्विक आतंकी घोषित होना, भारत की कूटनीतिक जीत

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:6 May 2019 3:24 PM GMT
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डॉ. श्रीनाथ सहाय

भारत सरकार के अथक प्रयासों के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव में जर्जर अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान ने स्वीकारा है कि उसकी धरती पर मदरसों में घृणा का पा" पढ़ाया जाता रहा है। सरकार ने अब इन मदरसों को नियंत्रण में लेकर दुनियावी ज्ञान व आधुनिक शिक्षा देने का फैसला किया है। दुनिया में हुई बड़ी आतंकी घटनाओं में इस्लामिक आतंकवादियों की भूमिका से अलग-थलग पड़ते पाक जैसे देशों और मसूद अजहर के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस की फ्रतिबद्धता के चलते पाक बैकफुट पर नजर आ रहा है। यहां तक कि आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने के आरोप में पाक को ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा कदम पीछे खींचने तथा इस मामले की निगरानी करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था द्वारा पाक को ग्रे सूची में शामिल करने से पाक अब बचाव की मुद्रा में है। कहना क"िन है कि मदरसों पर नियंत्रण का फैसला इन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के दबाव में लिया गया है या फिर पाक को अपने अपराध बोध का अहसास हुआ है। बहरहाल पाक हुक्मरानों द्वारा मदरसों में हेट स्पीच की पढ़ाई की बात को स्वीकारना भारत की बड़ी जीत है।

भारत दशकों से कहता रहा है कि पाक आतंक की पा"शालाएं चला रहा है। पाक सेना के फ्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने पत्रकारों से बात करते हुए स्वीकारा है कि आतंकवाद के आरोपों के चलते पाक को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है। इसमें यह स्वीकारोक्ति भी है कि पाक में जेहादी मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने स्वीकारा कि पाक में तीस हजार मदरसों में 25 लाख बच्चों को शिक्षा मिलती है। अब इन मदरसों को शिक्षा विभाग नियंत्रित करेगा। मदरसों के पाठ्यक्रम में नए विषय जोड़े जाएंगे। हेट स्पीच की बजाय दूसरे समुदायों का आदर करना सिखाया जाएगा। यह भी स्वीकारा गया कि आजादी के वक्त जहां देश में 247 मदरसे थे, आज उनकी संख्या तीस हजार से अधिक है। साथ ही ढाई करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जाते।

निश्चित रूप से यह स्वीकारना होगा कि भारत सरकार ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान पर जो अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाया है, उसके नतीजे अब सामने आने लगे हैं। उसी का नतीजा है कि पाक अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना पर फ्रतिबंध लगाने की मुहिम वैश्विक स्तर पर सिरे चढ़ गई है। भले ही चीन के अड़ियल रवैये के कारण उसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित न किया जा सका हो, मगर पाक की फजीहत अच्छी-खासी हो चुकी है। जिस तरह फ्रांस व अमेरिका खुद इस फ्रस्ताव को सिरे चढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे जाहिर है कि भारत की नीति को विश्व बिरादरी में भरपूर समर्थन मिल रहा है। चीन के अड़ियल रवैये का कारण साफ है कि 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना के तहत चीन ने पाक में जो 60 अरब डॉलर का निवेश किया है, वह खटाई में पड़ सकता है। दूसरे, उसके एक फ्रांत में जिस तरह इस्लामिक आतंकवाद सिर उ"ा रहा है, उस पर इस्लामिक जगत का समर्थन पाने की लालसा भी मसूद अजहर के पक्ष में खड़े होने के मूल में है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत भी 'वैश्विक नेता' बन गया है। इस निर्णय के फलितार्थ यहीं तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि पाकिस्तान ने अजहर, उसके संग"न, आतंकी अजाsं, मदरसों आदि पर ईमानदारी से विविध पाबंदियां नहीं थोपीं, तो वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब पाकिस्तान को भी 'आतंकवादी राष्ट्र' घोषित कर दिया जाएगा। फिलहाल पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में जरूर रहेगा। इस निर्णय के बाद यूएन के सदस्य देशों को मसूद अजहर और जैश की तमाम संपत्तियां जब्त करनी पड़ेंगी और बैंक खाते सीज करने होंगे। आतंकी किसी भी देश की यात्रा नहीं कर सकेगा, क्योंकि कोई भी देश वीजा आदि यात्रा दस्तावेज जारी नहीं कर सकेगा। जैश को हथियारों की सप्लाई और देशों से आर्थिक मदद पर भी विराम लग जाएगा। पाकिस्तान पर ऐसा दबाव पड़ेगा कि अंततः उसे मसूद अजहर को भारत को सौंपना पड़ेगा।

स्पष्ट है मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने से भारत को कोई सीधा लाभ होने वाला नहीं है। वह विदेशों में सक्रिय भी नहीं है और उसके संग"न को विदेशी फंडिंग भी नहीं होती। भारत एक तरह से इसके जरिये कूटनीतिक बढ़त पाकिस्तान पर लेना चाहता है, जिसमें भारत कामयाब होता नजर आ रहा है। पाक का कहना है कि उसके सौ मदरसों में चरमपंथ पनप रहा है और उनमें दूसरे समुदायों का आदर करना सिखाया जाएगा, यही स्वीकारोक्ति ही भारत की जीत है। इस बात को लेकर भारत दशकों से विश्व बिरादरी से पाक पर नकेल कसने की मांग करता आ रहा है। इस मुहिम से जहां चीन का पाखंड बेनकाब हुआ है वहीं पाक विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद पाक अपनी दोमुंही रणनीतियों से भी बाज नहीं आ रहा है। विदेश मंत्रालय के फ्रवक्ता मोहम्मद फैसल का एक बयान आया है कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने को तैयार है लेकिन मसूद अजहर का संबंध पुलवामा हमले से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

मसूद अजहर पर लगे वैश्विक फ्रतिबंध से पाकिस्तान पर विश्व बिरादरी का दबाव बढ़ेगा। यह भी कहा जा रहा है कि चीन द्वारा लगातार विश्व जनमत की उपेक्षा के चलते अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर पाकिस्तान पर कड़े फ्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे थे जिनके परिणामस्वरूप उसकी नाकेबंदी हो जाती और तब चीन का अरबों-खरबों का निवेश डूबने के कगार पर आ जाता। पाकिस्तान के फ्रति भारत का कड़ा रुख भी चीन के लिए एक संकेत था जिसकी बानगी डोकलाम विवाद के समय उसे मिल ही चुकी थी। इस तरह मसूद अजहर पर फ्रतिबंध लगने से भारत को एक तीर से दो निशाने साधने जैसा लाभ हुआ। सबसे बड़ी बात यह हुई कि मोदी सरकार यह साबित करने में सफल हो गई कि चीन को भी झुकाया जा सकता है।

इन सबके अलावा पाकिस्तान को तमाम किस्म के आर्थिक फ्रतिबंध भी चस्पां करने होंगे। संयुक्त राष्ट्र की फ्रतिबंध समिति ने अंततः भारत सरकार के 12 पन्नों के उस डोजियर का ही संज्ञान लिया, जिसे पाकिस्तान की हुकूमत नकारती रही थी। अब आतंकवाद पर पाकिस्तान भी व्यापक दृष्टि से सोचेगा। क्या वह आतंकवाद से मुक्त होकर अपने देश को चलाना चाहेगा? क्या फौज आतंकवाद से पिंड छुड़ाने में हुकूमत की मदद करेगी? क्या पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीतियों में से आतंकवाद को निकाल दिया जाएगा? यह कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब पाकिस्तान से लगातार पूछे जोंगे। मसूद अजहर पर यूएन का फ्रतिबंध ही पर्याप्त नहीं है। उसे व्यावहारिक स्तर पर अंजाम सबसे पहले पाकिस्तान को ही देना है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि आतंकवाद के मोर्चे पर भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। इसको लेकर भारत लगातार 2009 से अब तक मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की 'काली सूची' में डालने को लेकर फ्रयास करता रहा है। मसूद अजहर पाकिस्तान पोषित आतंकवादी संग"न जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया है, जिसने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 40 से अधिक भारतीय जवान शहीद हुए थे। मसूद के वैश्विक आतंकी घोषित होते ही उसका विदेशों में आना-जाना व व्यापार पर पूर्ण फ्रतिबंध लग गया है। साथ ही उसकी सभी निजी संपत्ति को संयुक्त राष्ट्रसंघ जब्त कर लेगी, जिससे वह अलग-थलग महसूस करेगा। मसूद हमेशा से भारत के लिए सिरदर्द बना रहा है। लेकिन अब संयुक्त राष्ट्र संघ के फ्रयासों से भारत को आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी मिली है।

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