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मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारना लोकतंत्र और संविधान का अपमान

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:8 May 2019 6:34 PM GMT
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को रोड शो के दौरान एक व्यक्ति ने थप्पड़ मारा। केजरीवाल नई दिल्ली लोकसभा एरिया के मोतीनगर विधानसभा में यह रोड शो कर रहे थे। इस रोड शो के दौरान एक शख्स अचानक केजरीवाल की गाड़ी पर चढ़ा और फिर थप्पड़ मार दिया। बता दें कि मंच पर और रैली में नेताओं को थप्पड़ मारने की घटना नई नहीं है। नेताओं को थप्पड़ मारे जाने का सिलसिला पुराना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर फ्रशांत भूषण और शरद पवार जैसे राजनीतिज्ञ भी थप्पड़ कांड का शिकार हो चुके हैं। इस मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की किस्मत सबसे खराब रही है। उनको एक ऑटो ड्राइवर ने थप्पड़ मार दिया था। इतना ही नहीं केजरीवाल पर दो बार जूते चल चुके हैं और कालिख भी फेंकी गई है। गौरतलब है कि केवल नेताओं को ही नहीं थप्पड़ मारे गए हैं। कई बार नेताओं ने भी सार्वजनिक मंचों पर कार्यकर्ताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों को भी थप्पड़ मारा है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक रोड शो के दौरान थप्पड़ रसीद करना उन पर नौवां हमला था। खुद केजरीवाल ने भी इसका खुलासा किया है। कभी उन पर स्याही फेंकी गई, तो कभी जूता उछाला गया, कभी लाल मिर्च का पाउडर फेंका गया। एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को सार्वजनिक तौर पर थप्पड़ मारना न केवल घोर अलोकतांत्रिक है, बल्कि हिंसात्मक फ्रयास भी है। यह राजनीतिक असहमति या विरोध की शैली भी नहीं है।

हमारा देश कोई `केला गणतंत्र' नहीं है, लेकिन बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल मुख्यमंत्री की सुरक्षा का है। केजरीवाल को जैड श्रेणी की सुरक्षा हासिल है। उनकी सुरक्षा में तीन पीएसओ हमेशा तैनात रहे हैं। एक एस्कॉर्ट और एक पायलट गाड़ी हमेशा चलती है। रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए 21 पुलिसकर्मियों का स्टाफ भी तैनात किया गया था। ऐसे सुरक्षा-चक्र के बावजूद एक आम नागरिक रोड शो के दौरान ही मुख्यमंत्री के वाहन पर चढ़ जाए और उनके चेहरे पर थप्पड़ भी मार दे, तो ऐसी सुरक्षा व्यवस्था को लानत है। चूंकि सुरक्षा व्यवस्था केंद्र सरकार का दायित्व है, दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, लिहाजा पुलिस आयुक्त की तुरंत छुट्टी की जानी चाहिए।

ऐसा नहीं है कि थप्पड़कांड के शिकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही हुए हैं। बीते दिनों गुजरात के युवा नेता और हाल में कांग्रेस में शामिल हुए हार्दिक पटेल को 19 अफ्रैल को एक जनसभा के दौरान थप्पड़ मारा गया। हार्दिक गुजरात की सुरेंद्र नगर लोक सभा सीट के लिए एक रैली में चुनाव फ्रचार कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ से निकल कर एक शख्स उनके पास आया और उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मार दिया। इसके बाद भीड़ में शामिल समर्थकों ने तुरंत उस शख्स को पकड़ा और पिटाई भी की। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। मंच पर और रैली में नेताओं को थप्पड़ मारने की घटना नई नहीं है। इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल को चुनाव फ्रचार के दौरान एक व्यक्ति ने थप्पड़ मार दिया था। यह मामला 2014 का है। जब लोकसभा चुनावों के लिए केजरीवाल दिल्ली में रोड शो कर रहे थे चब एक ऑटो ड्राइवर ने थप्पड़ मार दिया था। केजरीवाल को थप्पड़ मारने वाला व्यक्ति अपने हाथ में एक माला लिए हुए था। उसने जीप पर सवार होकर पहले केजरीवाल को माला पहनाई और फिर थप्पड़ मार दिया।

पिछले साल दिसंबर में महाराष्ट्र के "ाणे में एक कार्यक्रम के दौरान एक शख्स ने केंद्रीय मंत्री रामदास अ"ावले को थप्पड़ मारा था। वर्ष 2011 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार को एक युवक ने चांटा मार दिया था। पवार के गाल पर थप्पड़ उस वक्त पड़ा जब वो इफको के एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद बाहर निकलते हुए पत्रकारों से बात कर रहे थे। युवक की पहचान हरविंदर सिंह के रूप में हुई है जो दिल्ली का एक ट्रांसपोर्टर था। साल 2011 में सुफ्रीम कोर्ट के वरिष्" वकील फ्रशांत भूषण से कुछ लोगों ने उनके सुफ्रीम कोर्ट स्थित चैंबर में घुसकर मारपीट की थी। इसके बाद फ्रशांत भूषण को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया था। हमला करने वाले तीन युवकों में दो मौके से फरार हो गए थे जबकि एक युवक को गिरफ्तार कर लिया गया था।

थप्पड़ कांड के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल का यह आरोप भी है और उन्होंने फ्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग भी की है। उनके उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया है, `क्या मोदी और अमित शाह अब केजरीवाल की हत्या कराना चाहते हैं? पांच साल सारी ताकत लगाकर जिसका मनोबल नहीं तोड़ सके, चुनाव में भी हरा नहीं सके, अब उसे रास्ते से इस तरह हटाना चाहते हो कायरो! यह केजरीवाल ही तुम्हारा काल है।' यह कथन अतिश्योक्ति हो सकते हैं, लेकिन सुरक्षा हमारा राष्ट्रीय सरोकार है। केजरीवाल एवं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इसे मोदी द्वारा उनकी हत्या तक करने का आरोप लगा दिया है। इसे वे सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका मतलब इन्हें इस खतरनाक फ्रवृत्ति को रोकने की चिंता नहीं है। इसके बजाय वे इस घटना को अपनी चुनावी राजनीति के लिए भुना रहे हैं। उनका यह आचरण भी निंदनीय है। ऐसी राजनीति का भी पुरजोर विरोध होना चाहिए।

लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी सोच से भी सहमत नहीं हैं कि केंद्र की मोदी सरकार ने जानबूझ कर यह हमले कराए या भाजपा दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार गिराने पर आमादा है अथवा फ्रधानमंत्री मोदी मुख्यमंत्री केजरीवाल की `राजनीतिक आवाज' खामोश करना चाहते हैं। केजरीवाल हमारे लोकतंत्र की चुनिंदा शख्सियत हैं। यदि कोई उनकी नीतियों से सहमत नहीं है या फ्रधानमंत्री मोदी के विरोध की उनकी सियासत को नापसंद करता है अथवा सेना की सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर केजरीवाल के सवालों पर सवाल करता है, तो उसके मायने ये नहीं हैं कि मुख्यमंत्री को सार्वजनिक तौर पर थप्पड़ रसीद किया जाए। फ्रतिरोध की यह अभिव्यक्ति स्वीकार्य नहीं है।

बेशक केजरीवाल ने भी असामान्य व्यवहार दिखाया है। हर निर्णय और काम न करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार को दोषी करार दिया है। दिल्ली के उपराज्यपाल के आवास में धरना दिया है। फ्रशासनिक वर्चस्व के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक गए हैं कि उपराज्यपाल बॉस हैं या चुनी हुई सरकार! केजरीवाल पूर्ण राज्य के लिए आंदोलन चला सकते हैं, लेकिन तब तक उन्हें मौजूदा संवैधानिक उल्लेखों के मुताबिक काम करना पड़ेगा।

यदि कोई आम नागरिक केजरीवाल और उनकी `आप' के असामान्य रवैये से तिलमिला जाए, तो उसका अर्थ थप्पड़ मारना नहीं हो सकता। वह अदालत में जा सकता है या अंतिम निर्णय के लिए जनता को जागरूक कर सकता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि आरोपी `आप' का सदस्य रहा है और केजरीवाल से नाराज है। थप्पड़ मारना उसका फ्रतिरोध नहीं हो सकता। चुनावी मौसम में नेताओं के आरोप-फ्रत्यारोप तो चलते रहते हैं, लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि थप्पड़ मारने, जूता मारने वालों का तो केजरीवाल भी समर्थन ही करते हैं। अगर ऐसा नहीं होता कि पी. चिदंबरम पर जूता फेंकने वाले पत्रकार जरनैल सिंह को वह चुनाव लड़ने का टिकट क्यों देते? हो सकता है कि तब उन्हें इस बात का अहसास ना हो कि किसी को जूता मारा जाता है तो उस शख्स पर क्या बीतती है। खैर, थप्पड़ मारना बेशक गलत है, लेकिन इस थप्पड़ की गूंज ने उन्हें जूता पड़ने पर होने वाले दर्द का अहसास जरूर कर दिया होगा।

अरविंद केजरीवाल के साथ जो हुआ, वो बेहद दुखद है। एक मुख्यमंत्री को जो शख्स थप्पड़ मार दे, उसे किसी अपराधी से कम नहीं आंकना चाहिए और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन खुद केजरीवाल ने ही कुछ ऐसा ही काम करने वाले एक शख्स को अपनी पार्टी में कुर्सी ऑफर कर दी। उस समय भी केजरीवाल की खूब आलोचना हुई थी, लेकिन तब केजरीवाल को कोई फर्प नहीं पड़ा था और आज वह भाजपा की आलोचना कर रहे हैं।

आलोचना करना तो सही है, थप्पड़ मारना गलत है ये बात भी सही है, लेकिन जूता मारना भी तो गलत ही था। मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारना बुनियादी तौर पर लोकतंत्र और संविधान का अपमान भी है। बहरहाल थप्पड़बाज के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। ऐसे व्यक्ति की इतनी निंदा होनी चाहिए ताकि आगे कोई अन्य सिरफिरा ऐसा करने की सोच भी न सके। कहना न होगा कि राजनीति में राजनीतिक विचारधारा का विरोध या समर्थन समझ में आता है, लेकिन इस सीमा तक चला जाए कि हिंसा होने लगे तो यह स्वीकार्य नहीं है। इसका हर ओर से विरोध होना चाहिए।

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