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नोटबंदी करेगी मोदी के भाग्य का फैसला?

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:9 May 2019 6:22 PM GMT
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सन 2014 के चुनाव में मोदी जी की सुनामी आई हुई थी, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में किसी भी सुनामी का जिक्र नहीं है। लोग अंडर करंट की बात करते अवश्य दिखाई देते है। जो करंट मोदी जी को भी लग सकता है राहुल व महाग"बंधन को भी जला सकता है। मोदी जी ने आम जनता के जीवन को उ"ाने, सुधारने के लिए अनेक उज्जला, आयुष्मान, किसानों को 6 हजार फ्रतिवर्ष पेंशन जैसी योजना चलाई जो गरीबों के लिए वरदानी कही जा सकती है। मोदी जी विदेशों में लोकफ्रिय है। मोदी जी ने विश्व के वक्त व हालातों को सहीं ढंग से समझा है। जिस फ्रकार कभी नेहरू जी ने विश्व के दो महायुद्धों के घातक परिणामों से त्रस्त विश्व की जनता के दर्द को समझा था। जनता शांति चाहती थी। उस समय नेहरू जी ने शांति की बात कही और वो विश्व के चहेते बन गए थे।

उसी फ्रकार पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवाद से त्रस्त यूरोपीय, एशिया और खाड़ी के देशों के आतंकवाद के दर्द में अपना दर्द मिलाकर मोदी जी ने पाकिस्तान के घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की, जो सही वक्त पर पाकिस्तान के मुस्लिम आतंकवाद को सही चोट थी। जिससे पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवाद से घायल दुनिया अब सुखद महसूस कर रही है। मानव के जीवन में दो चीजें होती है।

एक होता है उसका शरीर, दूसरी होती है उसकी आत्मा और भावना। मोदी जी ने सर्जिकल स्ट्राइक करके दुश्मन के घर में घुसकर मारने की नामुमकिन सोच को आज मुमकिन तो बना दिया है और भारत के घायल मन को "ंडक भी पहुंचा दी है। पर जो शरीर के लिए आवश्यक रोजी, रोटी और रोजगार है के सवाल पर मोदी जी उखड़ते व भागते दिखाई देते है। जिसकों विपक्ष उनके विरूद्ध एक बड़े हथियार के रूप में आज फ्रयोग कर रहा है। उनकी समझ में यह भी नहीं आ रहा है कि उनकी 2014 की सुनामी की लहर 2019 के आते-आते अंडर करंट में कैसे बदल गई।

नोटबंदी के कुछ ही दिन बाद मैंने एक लेख नोटबंदी पर इस शीर्षक के साथ लिखा था कि (यह तो अभी नोटबंदी का सेमीफाइनल है) साथ ही मैंने इस लेख के माध्यम से यह भी बताने की कोशिश की थी कि नोटबंदी के दूरगामी दुष्परिणाम निकलेंगे। जिससे आने वाले समय में लम्बे समय तक भारत की अर्थ व्यवस्था मंदी की चपेट में आकर बेरोजगारी को जन्म दे देगी। एक शायर की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए मैंने लिखा था कि लम्हों ने खता की थी और सदियों ने सजा पाई। समाचार पत्रों में मेरा यह लेख छपा। मेरे इस लेख पर अनेक बुद्धि जीवियों, फ्रोफेसरों, बिजली के एसडीओ, डाक्टरों, अनेक संपादकों और महिला वकीलों के फोन आए। उन्होंने मुझसे पूछा कि अगर आप यह कहते है कि नोटबंदी का यह अभी सेमीफाइनल है तो आपके हिसाब से नोटबंदी का फाइनल कब होगा। तब मैंने उनकों उत्तर दिया था कि सन 2019 के लोकसभा के चुनावों के नतीजे नोटबंदी के गुण व अवगुणों का फाइनल तय करेंगे।

अमेरिका के भूतपूर्व फ्रेसीडेंट स्वर्गीय कैनेडी ने कुछ नई आर्थिक नीतियां अपने शासनकाल में अपने देश में बनाई थी। जिसकी अमेरिका के व्यापार व उद्योग जगत में भारी आलोचना हुई थी। कैनेडी उस आलोचना से विचलित नहीं हुए, ना ही उन्होंने इसे अपने सम्मान का विषय बनाया। कैनेडी ने आलोचना करने वाले अपने देश के उद्योगपतियों को अपने पास बुलाया और उनसे कहा कि सम्मानीय में कोई आर्थिक एक्सपर्ट (विशेषज्ञ) नहीं हूं, में तो एक राजनीतिज्ञ हूं। आप आर्थिक विषयों के ज्ञान के विशेषज्ञ है। इस क्षेत्र में आपका मुझसे कहीं अधिक अनुभव है। आप मुझे बतों कि अमेरिका के हित में कौन-सी आर्थिक नीतियां सही हैं।

हमारे फ्रधान मंत्री श्री मोदी जी एक लोकफ्रिय, कुशल व देशभक्त नेता है। उनकी राष्ट्रीयता पर कोई सवाल नहीं खड़े किए जा सकते। लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि वह आर्थिक विशेषज्ञ नहीं है। मोदी जी राष्ट्रीय आर्थिक नीतियां और व्यक्तिगत व्यापार के मूलभूत अंतर को शायद नहीं समझ पाए है। उन्होंने अमेरिका के महान आर्थिक विशेषज्ञ कींस के इस सिद्धांत को शायद नहीं पढ़ा है, जो कहता है कि धन के अभाव में लैस एफिसेंट फर्मे व उद्योग बंद हो जाते है।

जिससे बेरोजगारी बढ़ती है। नोटबंदी ने मार्केट में आज धन का अभाव पैदा कर दिया है। बैंकों में भी जमा धन की राशि घट गई है। धन अभाव से उद्योग व व्यवसाय या तो बंद हो गए या बंद होने के कगार पर है। नोएडा में लगे सेमसंग उद्योग को छोड़कर भारत में शायद ही कोई नया उद्योग पांच वर्षों में लगा हो, या किसी उद्योग धंधे ने अपना विस्तार किया हो। विदेश में लोकफ्रिय फ्रधानमंत्री अनेक फ्रयासों के बावजूद किसी भी विदेशी कंपनी या भारतीय फ्रवासियों द्वारा भारत के उद्योंगो में धन लगाने में ना तो सफल ही हो पाए और ना ही उनकों फ्रेरित कर सके। ना ही उनकी लोकफ्रियता काम आ सकी। मोदी जी ने विदेशों में यात्रों भी खूब की। भारत में पूंजी लगाने की अपीले भी खूब की, पर नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला। जिससे आज बेरोजगारी चरम सीमा पर है। यहीं वह अंडर करंट है जिसको मोदी जी ने अपने हाथों से विपक्ष के हाथों में थमा दिया है। जिसको विपक्ष आज जमकर उछाल रहा है।

भाजपा और मोदी का सबसे बड़ा समर्थक व्यापारी वर्ग है। जो आज भी बेबसी में उनका झंडा उ"ाए हुए है पर मोदी जी कैनेडी नहीं बन सके। जो एक बार भी व्यापारियों को बुलाकर उनके घायल मन पर मरहम रख देते। उन्होंने व्यापारियों को शायद इसके योग्य नहीं समझा कि वह कैनेडी की तरह उनसे सलाह लेते। उन्होंने सलाह भी ली तो अपने फाइनेंस मंत्री अरुण जेटली से जो जन्म से ब्राहमण व पेशे से वकील है, जिनका व्यापार से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

भारत में कर्जे से दबे किसानों को तो धन अभाव में आत्महत्या करते हुए तो अनेक बार देखा है, पर व्यापारियों का ट्रेनों के आगे कूदकर कर्जे के कारण आत्महत्या करते हुए हम पहली बार देख रहे है। उनका व्यवसाय चौपट है, उनके उद्योग धंधे बंद हैं। वह तिल-तिलकर जल और मर रहे है। किसी व्यापारी से पूछिए तो वह यहीं कहेगा की धंधा मंदा है। नौकरी मिल नहीं सकती, धंधा चौपट है, फिर भी यही व्यापारी अपने कंधे पर मोदी जी आपका झंडा आज भी उ"ाए हुए है। मशहूर कवि गोपाल दास नीरज की कुछ पंक्तियां मोदी जी आपको समझाने के लिए काफी हैö

कि तन की हवस,

मन की हवस को

गुनाहगार बना देती है,

भूखे पेटों को देशभक्ति

सिखाने वालों, भूख

इंसान को गद्दार बना देती है।

मोदी जी पाकिस्तान के मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करा करआज आपने भले ही अपने 36 इंच के सीने को 56 इंच का करके दिखा दिया हो, पर इससे भारत के बेरोजगार नौजवानों, कर्जे में डूबे व्यवसायी, चौपट होते हुए धंधे करने वालों को आप उबार नहीं सकते।

वैसे भी कहा जाता है जिस सरकार ने भी जिस देश में नोटबंदी की है, वह सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आई है। इतिहास अपनी इस सच्चाई को नहीं दोहरायेगा, मोदी जी आप यह कैसे कह सकते हो। इससे राहुल गांधी व महाग"बंधन को खुश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि अंडर करंट दो मुखा सर्प है। जो किसी को भी डस सकता है। यदि सर्जिकल स्ट्राइक ने नौजवानों की भावनाओं को उद्वेलित कर दिया तो वो राहुल, विपक्ष और महाग"बंधन को डस लेगा और यदि बेरोजगारी, दम तोड़ते व्यवसाय, उजड़ते उद्योग के घाव से भारत की जनता नहीं उभर पाई तो नोटबंदी व बेरोजगारी का सर्प मोदी जी आपको डस लेगा।

2019 का चुनाव बेरोजगारी बनाम पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवाद और नोटबंदी बनाम राष्ट्रवाद के बीच होना है या हुआ है। राहुल जी का चौकीदार चोर है का राफेल पर भजन-कीर्तन और मोदी जी का देश पर दर-पीढ़ी-दर कुर्बानी देने वाले राहुल गांधी के परिवार पर जमानतों पर होने का अलाप जनता के लिए तो बेमायने-सा लगता है। अब हमें सिर्प यह कहना है किö

अब हवाएं ही करेंगी

रोशनी का फैसला,

जिन दियों में तेल होगा

वो दिया रह जाएगा।

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