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अपनी पोल खुली तो मिर्च लगी

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:14 May 2019 4:45 PM GMT
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नेहरू वंश तथा उससे हाथ मिलाने वाले अन्य फर्जी सेकुलरिए एवं फर्जी समाजवादी ऐसे तत्व हैं, जिन्होंने सत्तर साल से देश को लूट-लूटकर अपना खजाना भरा तथा देश का हर तरह से विनाश किया। अन्यथा भारत के बाद आजाद होने वाला चीन कब का महाशक्ति बन गया, जबकि हम विकासशील देश की श्रेणी में ही पड़े रह गए। विकसित देश बनने का सपना हमारे लिए `गूलर का फूल' हो गया था। दस वर्षें तक मनमोहन सिंह/सोनिया गांधी की सरकार ने तो देश को नरक बना डाला था। धरती, आकाश, पाताल, तीनों जगह उसने सिर्फ लूट की। उस समय महंगाई चरम पर पहुंच गई थी तथा लूट के साथ-साथ महंगाई का भी विश्व-कीर्तिमान स्थापित हो गया था। कल्पना की जा सकती है कि यदि वर्ष 2014 के चुनाव में मनमोहन सिंह/सोनिया गांधी की सरकार पुनः सत्ता में आ गई होती तो हमारा देश अब तक पूरी तरह कंगाल हो चुका होता तथा लुटेरे विदेशों में जमा कर लिए गए अपने अथाह धन का उपयोग करने भारत से भाग चुके होते।

देश को लूटने में महारत हासिल होने के साथ इन राष्ट्रघाती तत्वों की एक और बड़ी विशेषता यह है कि वे `उलटा चोर कोतवाल को डांटें' मुहावरा चरितार्थ करने में बड़े माहिर हैं। तभी तो पप्पू अपनी सभाओं में चमचों से पधानमंत्री मोदी के लिए `चोर है' के नारे लगवाता है, जबकि वह खुद महाचोर है। भारतीय राजनीति में बारबाला ने ही मोदी को अपशब्द कहने के साथ गालियों की शुरुआत की थी, जिसे पप्पू ने पूरे जोरशोर से आगे बढ़ाया। पियंका वाड्रा उर्फ पप्पी ने तो छोटे-छोटे बच्चों से मोदी को लक्ष्य करते हुए `चौकीदार चोर है' के नारे लगवाए तथा उस कुकृत्य के समय उसके चेहरे पर खुशी छलकी पड़ रही थी। हमारा निर्वाचन आयोग इन दोनों के लिए उसी पकार मुलायम पड़ जाता है, जैसे महात्मा गांधी जवाहर लाल नेहरू के पति मुलायम थे। अन्यथा इन दोनों को चुनाव लड़ने या पचार करने से कब का वंचित कर दिया जाता! पप्पी ने सार्वजनिक रूप से वन्यजीव कानून का उल्लंघन किया, किन्तु उसके विरुद्ध कोई दण्डात्मक कार्रवाई अब तक नहीं हुई। एक बार बुलंदशहर में `रंगभारती' के `सप्तरंग ऑरकेस्ट्रा' का `एक शाम किशोर कुमार के नाम' शीर्षक बहुत बड़ा कार्यकम आयोजित हुआ था, जिसमें एक कलाकार ने ऐसा नकली सांप धारण किया था, जो बिलकुल असली लग रहा था, किन्तु उस पर वन विभाग ने वन्यजीव कानून का उल्लंघन मानते हुए नोटिस जारी कर दिया था।

पप्पू ने मोदी के विरुद्ध नित्य जहर उगलना और एक से बढ़कर एक झू"s आरोप लगाना अपनी दिनचर्या बना ली थी। आजिज आकर नरेंद मोदी ने गत दिवस पप्पू को आईना दिखा दिया और राजीव गांधी ने अपने पारिवारिक मित्र क्वात्रोचि से मिलकर जो बोफोर्स घोटाला किया था, अपनी चुनावी सभा में उसका उल्लेख कर दिया। उक्त आईना सामने आते ही पप्पू-पप्पी को मिर्च लग गई। पप्पू एवं उसकी चमचा मंडली ने विरोध में ऐसा तूफान खड़ा किया, जैसे मोदी ने राजीव गांधी के बारे में झू" कहा है। राजीव गांधी का इटली-निवासी पारिवारिक मित्र क्वात्रोचि दिल्ली में पधानमंत्री के आवास पर ही "हरता था तथा उसने राजीव गांधी के साथ मिलकर जो भयंकर बोफोर्स घोटाला किया, उसकी कलई अब पूरी तरह खुल चुकी है। इसी पकार राजीव गांधी की सरकार ने `भोपाल गैस कांड' में सैकड़ों लोगों की जिंदगी नष्ट कर देने वाले एंडरसन को विशेष विमान द्वारा भोपाल से दिल्ली बुलाया और वहां से विदेश भगा दिया। ऐसा इसलिए किया कि एंडरसन की गिरफ्तारी न हो सके। राजीव गांधी के इस कुकृत्य को भी नहीं झु"लाया जा सकता है कि उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पांच हजार सिखों का अपनी सरकार के संरक्षण में निर्ममतापूर्वक नरसंहार कराया था।

उपर्युक्त बातों का उल्लेख कर मोदी ने झू" नहीं कहा, बल्कि तथ्य का उल्लेख किया है। फिर भी पप्पू को मिर्च लगी और उसने नौटंकी करते हुए कहा कि मोदी जी के मन में उसके लिए चाहे जितनी अधिक नफरत भरी हो, लेकिन उसके दिल में उनके लिए प्यार है और इसीलिए उसने लोकसभा में उनके पास जाकर उन्हें गले लगाया था। पप्पू ने यह भी कहा कि मोदी जी उसे चाहे जितनी गाली दें, लेकिन उसके मां-बाप को कुछ न कहें। पप्पू को झू", भ्रष्टाचार, नौटंकी आदि में बहुत पक्की खानदानी विरासत मिली है, जिसके बल पर वह अपने खानदान की तरह देशवासियों को मूर्ख बनाने की चेष्टा कर रहा है। अन्यथा वह अपने उद्गार व्यक्त करते हुए यह भी बताता कि लोकसभा में वह मोदी के पास गले लगने नहीं गया था, बल्कि उनके गले पड़ने गया था और इसी से अपनी सीट पर लौटकर उसने शोहदों की तरह धूर्ततापूर्वक आंख मारी थी। दूसरी बात यह कि मोदी पप्पू को गाली नहीं देते हैं, बल्कि पप्पू व पप्पी ही मोदी के लिए नित्यपति झू"ाr व अनर्गल बकवास किया करते हैं। इतना ही नहीं, हाल में पप्पू ने मोदी के लिए अपशब्दों का पयोग तो किया ही था, उनके माता-पिता के लिए भी बहुत अनुचित बात कही थी। पप्पू की चमचा-मंडली मोदी को `नीच' आदि अनर्गल गालियों से अलंकृत कर चुकी है तथा पप्पू के पतिनिधि के रूप में मणिशंकर अय्यर ने तो पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने में पाकिस्तान का सहयोग मांगा था। आश्चर्य है कि पप्पू यह भूल गया है कि उसकी मां ने मोदी को `मौत का सौदागर' कहा ही था तथा स्वयं उसने भी मोदी को `जवानों के खून की दलाली करने वाला' कह दिया था।

असली गलती देश की जनता की है। यदि वह लुटेरे एवं ढोंगी नेहरू वंश की असलियत समझकर उसके मोहजाल में फंसने की गलती न करती और उस वंश की छुट्टी कर चुकी होती तो हमारा देश पिछड़ा बना रहने के बजाय कबका पगति के शिखर पर पहुंचकर भारत विश्व की सबसे महत्वपूर्ण महाशक्ति बन चुका होता। इस बात पर भी आश्चर्य होता है कि पप्पू व पप्पी अपने पिता एवं दादी को शहीद कहते हैं। शायद उन्हें `शहीद' की परिभाषा नहीं मालूम। यदि वे देश की आजादी के लिए दर-दर भटकने वाले, क"ाsरतम जीवन व्यतीत करने वाले एवं पाण तक निछावर कर देने वाले शहीदों के बारे में विवरण पढ़ लें तो उन्हें पता लग जाएगा कि शहीद किसे कहते हैं? क्या इंदिरा गांधी व राजीव गांधी ने भगत सिंह, चंदशेखर आजाद, नेताजी सुभाषचंद बोस, वीर सावरकर आदि जैसे अतिमहान स्वतंत्रता सेनानियों की तरह त्यागमय जीवन व्यतीत किया था? इसके विपरीत जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक समूचे नेहरू वंश ने बिना किसी त्याग के अधिकतम सुखों का उपभोग किया एवं अय्याशी भरा जीवन व्यतीत किया। लोगों का तो यह भी कहना है कि यदि नेहरू वंश के लोग शहीद थे तो वैसी शहादत के लिए वे भी तैयार हैं।

इंदिरा गांधी एवं राजीव गांधी को शहीद कहकर वास्तविक शहीदों का अपमान किया जा रहा है। जनता को इस ढोंगी वंश के कुकृत्यों को समझकर वर्तमान लोकसभा के चुनाव में पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से निर्वासित कर देना चाहिए। मोदी ने बहुत अच्छा किया कि पप्पू के अपशब्दों को बर्दाश्त करते रहने के बजाय अपनी सार्वजनिक सभा में पप्पू को खुली चुनौती दी है कि राजीव गांधी के सवाल पर वह लोकसभा के शेष बचे दो चरणों का चुनाव लड़ ले। चतुर मोदी जानते हैं कि यदि पप्पू उस विषय पर मैदान में आएगा तो उसे इस बहाने नेहरू वंश की पूरी पोल व कलई खोल देने का स्वर्ण अवसर मिल जाएगा।

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