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पज्ञा को प्रत्याशी बनाकर भाजपा को लेने के देने पड़े

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:18 May 2019 5:28 PM GMT
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साध्वी पज्ञा सिंह "ाकुर को भोपाल जैसे महत्वपूर्ण चुनाव क्षेत्र से जल्दबाजी में प्रत्याशी बनाना भाजपा की अतिवादी सोच का नतीजा है। यह ज्ञातव्य है कि भोपाल चुनाव क्षेत्र से भाजपा पिछले तीन दशकों से लगातार जीतती रही है तथा उस क्षेत्र से भाजपा के स्वर्गीय कैलाश जोशी जैसे कई दिग्गज नेता जीतकर आते रहे हैं लेकिन इस बार साध्वी पज्ञा को दिग्विजय सिंह के खिलाफ प्रत्याशी बनाना विवेकहीनता का पतीक था। वास्तव में पज्ञा को दिग्विजय सिंह के खिलाफ खड़ा करना भाजपा की मजबूरी भी थी क्योंकि दिग्विजय सिंह दस वर्षों तक मध्यपदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं तथा उन्हें मध्यपदेश का एक पखर नेता माना जाता है।

मध्यपदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद दिग्विजय सिंह से टकराना नहीं चाहते थे इसलिए एक सोची-समझी रणनीति के तहत सांप्रदायिक धुवीकरण को दृष्टिगोचर करते हुए पज्ञा को ही दिग्विजय से चुनाव लड़ाने का निर्णय किया गया। वैसे भी दिग्विजय सिंह भाजपा की सांप्रदायिक धुवीकरण करने के कटु आलोचक रहे हैं इसलिए भाजपा चाहती थी कि उन्हें ऐसे प्रत्याशी से लड़वाया जाए जो आसानी से सांप्रदायिक धुवीकरण को अंजाम दे सकें। यह सर्वविदित है कि साध्वी पज्ञा महाराष्ट्र में हुए मालेगांव धमाके की मुख्य आरोपी रह चुकी हैं तथा जमानत मिलने के बाद भी उन पर चल रहा मुकदमा खत्म नहीं हुआ है। साध्वी पज्ञा को आरोपी बनाए जाने के बाद ही तत्कालीन गृहमंत्री श्री पी. चिदम्बरम को भगवा आतंकवाद के जुमले को बोलने का अवसर मिला था। भाजपा एक तीर से दो शिकार करना चाहती थी क्योंकि साध्वी पज्ञा के प्रत्याशी बनते ही हिन्दुत्व का मुद्दा चुनाव पर स्वतः हावी हो जाएगा और दिग्विजय सिंह बैकफुट पर चले जाएंगे।

भाजपा की उपरोक्त सोची-समझी योजना तब खटाई में पड़ गई जब प्रत्याशी घोशित होते ही पज्ञा ने ऊलजुलूल बयान देने शुरू कर दिए। पज्ञा का पहला बयान स्वर्गीय हेमंत करकरे पर आया जिन्होंने 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में शहादत पाई थी। स्वर्गीय करकरे एक कर्मशील पुलिस ऑफिसर माने जाते थे और एटीएस का मुखिया होने के नाते उन्होंने ही पज्ञा को मालेगांव धमाके वाले केस में गिरफ्तार किया था। साध्वी पज्ञा अक्सर आरोप लगाती रही हैं कि स्वर्गीय करकरे ने उन्हें बहुत अधिक पताड़ित किया है। साध्वी ने करकरे को देशद्रोही करार देते हुए यहां तक कह डाला कि वे मेरे शाप के कारण ही 26/11 के आतंकी हमले में मारे गए थे। इस बयान पर पूरा भारत उबल पड़ा क्योंकि स्वर्गीय करकरे एक आदर्श पुलिस पदाधिकारी के रूप में विख्यात रहे। महाराष्ट्र में तो आक्रोश की लहर दौड़ गई जिसको देखकर भाजपा घबरा गई तथा साध्वी को तत्काल बयान के लिए खेद पकट करने का निर्देश दिया गया। उपरोक्त बयान का झमेला अभी रुका भी नहीं था कि साध्वी ने गर्वोक्ति करते हुए ऐलान किया कि उन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी जिसके लिए उन्हें अपने किए पर आज भी गर्व होता है। साध्वी के इस बयान पर चुनाव आयोग ने साध्वी को घेर लिया जिसके चलते भाजपा पुनः बैकफुट पर आ गई। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने साध्वी को मुंह बंद करने की सलाह देते हुए भविष्य में किसी भी बयान को जारी न करने का फतवा लगा दिया जिसके चलते वह चुनाव होने तक चुपचाप बै"ाr रहीं।

जैसे ही भोपाल में लोकसभा के चुनाव सम्पन्न हो गए तो उन्होंने पुनः अपना मुखारबिंद खोल दिया और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे को पखर देशभक्त होने का पमाण पत्र दे डाला। साध्वी ने यह भी कहा कि गोडसे देशभक्त थे, हैं और हमेशा देशभक्त के रूप में याद किए जाते रहेंगे। इतना कहना था कि न केवल विपक्ष अपितु भाजपा भी गंभीर धर्मसंकट में पड़ गई। भाजपा हाई कमान ने पज्ञा को तत्काल अपना बयान वापस लेने एवं माफी मांगने का निदेश जारी किया जिसे पज्ञा ने तत्काल परवान चढ़ा तो दिया लेकिन विपक्ष साध्वी के इस बयान पर चुप नहीं बै"ा और कांग्रेस ने तो भाजपा को घेरते हुए उसे नाथू राम गोडसे का वंशज तक कह डाला। दिनांक 17 मई 2019 को हुई भाजपा की पेस कांफ्रेंस में पत्रकारों का उत्तर देते हुए भाजपाध्यक्ष अमित शाह को कहना पड़ा कि साध्वी पज्ञा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है तथा उन पर क"ाsर कार्रवाई की जाएगी। इतना कहना भाजपा के लिए पर्याप्त नहीं था।

क्योंकि खुद पधानमंत्री को एक साक्षात्कार वार्ता में कहना पड़ा कि वे साध्वी पज्ञा के बयान को कभी माफ नहीं कर सकते। शायद यही कारण है कि पधानमंत्री जी को अपने चुनाव अभियान के आखिरी संबोधन में कहना पड़ा कि भारत की नीतियां चक्रधारी कृष्ण एवं चरखाधारी महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर ही चलती रहेंगी।

महात्मा गांधी को महिमामंडित करने के बावजूद भाजपा इस कलंक से पीछा नहीं छुड़ा सकती क्योंकि उसके द्वारा चयनित एक प्रत्याशी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को देशभक्त होने का पमाण पत्र जारी करता है। इस आलोक में यदि गोडसे देशभक्त हैं तो निश्चित रूप से उसने महात्मा गांधी की हत्या करके देशभक्ति का पमाण दिया होगा। साध्वी पज्ञा का बयान चुनाव परिणामों के बाद भी भाजपा को बुरी तरह सालता रहेगा। प्रत्याशी चयन में भाजपा द्वारा ऐसी नादानी किए जाने को देखकर भारत के एक मनीशी कवि की निम्नांकित पंक्तियां बरबस याद हो आती हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि,

बिना विचारे जो करे

सो पाछे पछताए।

काम बिगाड़े आपनो

जग में होत हंसाए।।

इस आलोक में साध्वी पज्ञा यदि भोपाल से चुनाव जीत भी जाती हैं तो वे भाजपा के लिए स्थायी रूप से सरदर्द बनी ही रहेंगी क्योंकि उनके अनोखे बोल जनता के सामने आते ही रहेंगे। उपरोक्त दोहे के अनुसार बिना विचार किए हुए कोई कदम उ"ाना जहां जग हंसाई को जन्म देता है वहीं पश्चाताप करने पर भी विवश होना पड़ता है। दिग्विजय सिंह को सबक सिखाने के लिए भाजपा द्वारा जल्दबाजी में साध्वी पज्ञा को प्रत्याशी बनाना उसे लंबे समय तक जलील करता रहेगा। दिग्विजय सिंह जी ने भी नहला पर दहला मारते हुए भाजपा के साध्वी पज्ञा के ब्रह्मास्त्र को रोकने के लिए मध्यपदेश के संत कम्प्यूटर बाबा को अपने खेमे में शामिल कर लिया जिन्होंने हजारें साधुओं का समूह इकट्ठा करके दिग्विजय सिंह की विजय के लिए एक यज्ञ का आयोजन कर दिया जिसमें दिग्विजय सिंह सपत्निक शामिल हुए। वास्तव में दिग्विजय सिंह का यह कदम साध्वी के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का अनोखा जवाब था।

चुनाव आयोग ने जहां कम्प्यूटर बाबा पर आचार संहिता उल्लंघन का केस दर्ज करवा दिया है वहीं यज्ञ में हुए खर्चे को दिग्विजय सिंह के चुनाव खर्च में जोड़ने का निदेश जारी किया है। लोग भूले नहीं हेंगे कि कम्प्यूटर बाबा को शिवराज सिंह चौहान ने राज्यमंत्री का दर्जा दे रखा था लेकिन मध्यपदेश में सत्ता बदलते ही उन्होंने भी अपना पासा बदल लिया है।

(लेखक लोकसभा के पूर्व सांसद हैं।)

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