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विपक्ष के हर हमले पर मोदी का `ब्रह्मास्त्र'

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:23 May 2019 6:36 PM GMT
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कुछ हद तक विपक्षी एकता, एंटी-इन्कंबेंसी फैक्टर, जातीय समीकरण, राफेल और रोजगार को मुद्दा बनाए जाने के बाद भी वह नरेंद्र मोदी हैं, जिनके करिश्माई व्यक्तित्व के दम पर भाजपा शानदार जीत की तरफ बढ़ रही है। यह पीएम मोदी पर जनता और भाजपा का भरोसा ही है कि एग्जिट पोल्स देख पार्टी ने सहयोगी दलों के लिए डिनर रखा जबकि समूचे विपक्ष में खलबली मची हुई थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत हो गई है। एनडीए को और भाजपा को सीटें मिल गई हैं। इस जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया।

उन्होंने कहा, `सबका साथ+सबका विकास+सबका विश्वासृविजयी भारत।' हम साथ में बढ़ते हैं। हम साथ में समृद्ध होते हैं। हम मिलकर एक मजबूत और समावेशी भारत का निर्माण करेंगे। भारत फिर से जीता। भाजपा की ये जीत 2014 से भी बड़ी मिलती दिख रही है। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस जीत पर एक के बाद एक ट्वीट किए हैं। उन्होंने ट्वीट किया, `फिर एक बार मोदी सरकार-थैंक्यू इंडिया।' उन्होंने लिखा, `यह जीत पूरे भारत की जीत है। देश के युवा गरीब किसान की आशाओं की जीत है। यह भव्य विजय प्रधानमंत्री मोदी जी की 5 साल के विकास और मजबूत नेतृत्व में जनता के विश्वास की जीत है।

मैं भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं की ओर से श्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक बधाई देता हूं। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत से ऐसे में साफ है कि विपक्ष का कोई भी मुद्दा मोदी लहर 2.0 के आगे टिक नहीं पाया। 2014 की तरह इस बार भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव लड़ने वाली भाजपा शानदार जीत प्राप्त की है। यूपी बिहार महाराष्ट्र और बंगाल जैसे राज्यों में भी मोदी मैजिक देखने को मिला। आइए समझते हैं कि भाजपा के नेतृत्व में एनडीए को मिली बड़ी बढ़त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किस तरह देश के सबसे बड़े करिश्माई नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है। 2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी पहली बार केंद्र की राजनीति में आए थे। चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के पक्ष में लहर देखी गई और नतीजा भी वैसा ही रहा। इस बार एंटी-इन्कंबेंसी फैक्टर और तमाम मसलों पर विपक्षी हमलों के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा था कि नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर मिल सकती है। हालांकि जैसे-जैसे मोदी की रैलियां होती गईं देश में मोदी का मैजिक बढ़ता गया और पहले से बिखरा विपक्ष अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष करता दिखा। सात चरणों के चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल्स ने साफ कह दिया कि मोदी की सुनामी ने विपक्ष की सभी दीवारों को धराशायी कर दिया है। मोदी के नया भारत बनाने के संकल्प पर लोगों ने भरोसा जताया है। 80 सीटों वाले राज्य यूपी में एसपी-बीएसपी और आरएलडी के महागठबंधन बनाने के बाद भी वे मोदी के कद की वजह से ही भाजपा को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सके।

रैली में उमड़ने वाली भीड़ से ही साफ हो गया था कि 5 साल बाद भी जनता को मोदी पर भरोसा है। 2014 में नरेंद्र मोदी हिंदीभाषी राज्यों में जाति के आधार पर पार्टियों को मिलने वाले वोटों को साधने में कामयाब रहे थे। इस बार यूपी में भले ही एसपी बीएसपी और आरएलडी जैसी ठोस जनाधार वाली पार्टियों ने हाथ मिलाकर नया समीकरण तैयार करने की कोशिश की थी पर यह साफ है कि इनके पक्के वोटर्स ने भी भाजपा पर भरोसा जताया है। यह एक तरह से क्षेत्रीय पार्टियों और उन नेताओं के लिए खतरे की घंटी है जो अपना जातिगत वोट बेस लेकर चुनाव लड़ते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्प अपने पांच साल के विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा बल्कि वह कांग्रेस और यूपी में बुआ-बबुआ के गठजोड़ और बंगाल में ममता पर भी हमले करते दिखे। उनके सियासी हमलों का असर यह होता था कि विपक्षी दल अगले एक-दो दिनों तक खुद को डिफेंड करते ही दिखते थे। वंशवाद भ्रष्टाचार विदेश नीति राष्ट्रीय सुरक्षा कुछ प्रमुख मुद्दे थे जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर लगातार निशाना साधा। मोदी के पक्ष में मिले अपार जनसमर्थन का ही नतीजा है कि वह निर्विवाद रूप से 39 दलों के समर्थन वाले एनडीए में सबसे बड़े नेता के तौर पर बने हुए हैं। एक तरफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी भले ही एनडीए से बाहर हुई पर बिहार में जेडीयू वापस भाजपा के साथ आ गई। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से नाता तोड़कर भाजपा ने आतंकवाद पर सख्त नीति से समझौता न करने का संदेश दिया। एक समय ऐसा कहा जा रहा था कि भाजपा अपने दम पर अगर बहुमत हासिल नहीं कर पाती है तो हो सकता है कि सहयोगी दल किसी दूसरे नेता को प्रधानमंत्री पद देना चाहें पर जैसे-जैसे चुनाव प्रचार बढ़ा भाजपा और पूरे एनडीए में मोदी का विकल्प मोदी ही बनते गए।

2019 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भी बड़े नेता के तौर पर उभरेंगे और कड़े फैसले ले सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां भी भाजपा के आंतरिक सर्वे के आधार पर तय की गई थीं। मोदी के फोकस में उत्तर प्रदेश के बाद बंगाल और ओडिशा जैसे राज्य थे, जहां उन्होंने सबसे ज्यादा रैलियां की। मोदी की पूरी कोशिश थी कि बंगाल की 42 सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटें भाजपा को दिलाई जाएं। यहां राजनीतिक हिंसा भी देखने को मिली पर पीएम मोदी की रैलियों का सकारात्मक असर पार्टी के पक्ष में जाती सीटों की संख्या से दिख रहा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जैसे चुनावी रणनीतिकार के साथ मिलकर पीएम मोदी ने सभी राज्यों के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की। हर राज्य में सहयोगी दलों के साथ नया जनाधार बढ़ाने और अपने वोटर्स को जोड़े रखने पर फोकस किया गया। करीब डेढ़ महीने तक चले चुनाव में एक तरफ जनता के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा करिश्माई नेतृत्व था तो वहीं विपक्ष की तरफ से असमंजस वाली स्थिति बनी रही। लोगों को भी यह समझ नहीं आया कि मोदी नहीं तो आखिर कौन? ऐसे में राहुल गांधी ममता बनर्जी मायावती अखिलेश यादव चंद्रबाबू नायडू आदि विपक्षी नेताओं के पक्ष में वोटर्स एकमत नहीं हो सके। शायद विपक्ष की इसी कमजोरी के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कद और भी बढ़ता चला गया। मोदी के खिलाफ कोई नहीं था। वैसे तो चुनावी नारे पोस्टर प्रचार पहले से होते आ रहे हैं लेकिन 2014 के बाद इसमें गजब की आधुनिकता दिखी। इस बार भाजपा उससे भी आगे जाकर युवा मतदाताओं को उनके प्लैटफॉर्म्स पर साधने में कामयाब रही।

कांग्रेस ने जब चौकीदार चोर है का नारा उछाला तो चुनाव से ठीक पहले मोदी ने ट्विटर पर खुद को चौकीदार लिखकर नया अभियान चला दिया। पीएम ने उल्टा विपक्ष पर हमला करते हुए अपने-अपने क्षेत्र में काम करने वालों से चौकीदार बनने को कहा। बड़ी संख्या में सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार में मैं भी चौकीदार कैंपेन सफल रहा। मोदी है तो मुमकिन है और आएगा तो मोदी ही जैसे कैंपेन ने मोदी के प्रति लोगों के भरोसे को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। जिस समय लोग मोदी के साथ उनके विकल्प के तौर पर तुलना करने की सोचते तो उन्हें उतना भरोसा किसी विपक्षी नेता में नहीं दिखता। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट में हवाई हमले कर बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी जनता को यह समझाने में कामयाब रहे कि भाजपा ही आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस पर काम करते हुए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे सकती है। अंतरिक्ष में स्ट्राइक करने जैसे बड़े फैसले लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को यह भरोसा दिया कि वह बड़े से बड़े फैसले ले सकते हैं। इस दौरान उज्जवला योजना, सबको बिजली, किसानों की दोगुना आय, धारा 35ए जैसे संकल्प-पत्र के मुद्दों पर भी भाजपा अपनी बात समझाने में कामयाब रही। वहीं कांग्रेस ने जब राजद्रोह कानून को खत्म और अफस्पा को कमजोर करने की बात कही तो भाजपा ने उस पर करारा हमला किया।

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