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चीनी कम्पनियों का नया ठिकाना बन रहा है वियतनाम

👤 manish kumar | Updated on:7 July 2020 5:40 AM GMT

चीनी कम्पनियों का नया ठिकाना बन रहा है वियतनाम

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नई दिल्ली। पूरी दुनिया में रियल एस्टेट उद्योग पिट रहा है, लेकिन चीन के पड़ोसी देश वियतनाम में रियल एस्टेट जबर्दस्त उछाल पर है। सबसे अधिक डिमांड वियतनाम की राजधानी हनोई में आँफिस स्पेस की है। इसका कारण यह सामने आ रहा है कि चीन से बाहर जा रही फ़ैक्टरियों की पहली पसंद अब वियतनाम ही है। आँफिस स्पेस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हनोई में अतिरिक्त 93,000 वर्ग मीटर के एरिया वाली कमर्शियल इमारतों का निर्माण किया जा रहा है ,जो अगले साल तक तैयार हो जाएंगी।

वियतनाम न्यूज़ के अनुसार कोविड 19 के समय भी हनोई की रियल एस्टेट प्राइस में जबर्दस्त तेजी देखी गई। 2019 की पहली तिमाही और 2020 की पहली तिमाही के बीच ए ग्रेड के आँफिस रेंट में 5 .8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अगर तुलना ए ग्रेड आँफिस और बी ग्रेडआँफिस के बीच करें तो यह बढ़ोत्तरी काफी अधिक है। इसका कारण यह है कि हनोई में ए ग्रेड आँफिस स्पेस की काफी कमी है।

वियतनाम में आँफिस स्पेस की डिमांड बढ़ने का मुख्य कारण चीन में स्थापित बिज़नेस का वहां से पलायन करना और वियतनाम को अपना नया बेस बनाना है। वियतनाम न्यूज़ का कहना है कि पिछले दो साल के दौरान आँफिस स्पेस की मांग लगभग स्थिर थी, औसत अकुपेंसी 93 प्रतिशत थी। इसलिए दो साल में सिर्फ 50 हजार वर्ग मीटर अतिरिक्त आँफिस स्पेस का निर्माण हुआ। इस समय वियतनाम में कुल 18 लाख वर्ग मीटर आँफिस स्पेस उपलब्ध है। कोरोना वायरस के फैलाव के बावजूद वियतनाम के बिजनेस पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। क्योंकि वियतनाम ही संभवतः दुनिया का एकमात्र देश है , जहां कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या सबसे पहले जीरो हुई। वियतनाम ने चीन से पहले ही कोरोना पर विजय प्राप्त कर लिया। इसलिए जहां पूरी दुनिया में विकास दर निगेटिव बताई जा रही है वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 2020 में भी वियतनाम की जीडीपी में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया है।

चीन की तरह वियतनाम में भी कम्युनिस्ट सरकार है और वहां भी बिज़नेस एन्वॉयरनमेंट चीन ने मिलता जुलता है। अभी हाल ही में वियतनाम ने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है जिसके अनुसार यूरोप के इनवेस्टमेंट की सुरक्षा की गारंटी और आयात में भारी छूट देने का प्रावधान है। चीन इस एग्रीमेंट से काफी परेशान है और यह घौंस देने की कोशिश कर रहा है कि वियतनाम चीन का विकल्प बनने का प्रयास ना करे। अभी तक वियतनाम काफी हद तक चीन के साये में रहकर अपनी आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रहा था। अब वियतनाम धीरे धीरे चीन से दूर होता जा रहा है और अपनी स्वतंत्र आर्थिक नीतियों को लागू कर रहा है।

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