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हांगकांग चुनाव स्थगित, छात्र नेता हिरासत में

👤 manish kumar | Updated on:1 Aug 2020 7:05 AM GMT

हांगकांग चुनाव स्थगित, छात्र नेता हिरासत में

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लॉस एंजेल्स। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इशारे पर शुक्रवार को हांगकांग में अगले महीने छह सितंबर को होने वाले चुनाव को एक वर्ष के लिए टाल दिया गया है।लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले छात्र नेताओं को हिरासत में लिया गया है और लोकतंत्र की पैरवी करने वाली सिविक पार्टी के एक दर्जन जन प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के अंतर्गत जेलों में ठूँस दिया गया है। हांगकांग प्रशासन ने चुनाव टाले जाने का कारण कोरोना संक्रमण बताया है। चीनी सरकार के इस निर्णय की पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय देशों में भारी निंदा हो रही है।

हांगकांग में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष कर रहे 'स्टूडेंट लोकलिज्म' के चार नेताओं को बुधवार को हांगकांग पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनके विरुद्ध आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर चुनाव में हांगकांग की आज़ादी का परचम लहराने की बात की थी। हांगकांग पुलिस ने इसे भड़काऊ बयान के रूप में ले कर चारों छात्र नेताओं को हिरासत में डाल दिया। इनमें एल्विन येयूँग, डेनिस क्वोक और केनिथ लीअंग लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए पिछले एक वर्ष से संघर्षरत थे। चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून पारित किए जाने के बाद पिछले दिनों हांगकांग पुलिस में रद्दोबदल कर साम्यवादी सिद्धांतों में कड़ी आस्था रखने वाले पुलिस अधीक्षक चेयोंग यंकसोंग की नियुक्ति की थी। इस रद्दोबादल के बाद हांगकांग यूनिवर्सिटी में क़ानून पढ़ाने वाले एक प्राध्यापक बेनी ताई को भी हिरासत में ले लिया गया है। बेनी ताई पर भी फ़ेसबुक पर आनलाइन कमेंट करने का आरोप था।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने चुनाव टाले जाने से मात्र एक दिन पूर्व अपने रेडियो इंटरव्यू में कहा था कि हांगकांग की जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से आवाज़ उठाने का पूरा अधिकार है। चीनी सरकार पिछले दिनों हांगकांग के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून की आड़ में लोगों की आवाज़ दबाती है और उनके अधिकारों को कुचलने का प्रयास करती है तो उसका यह कृत्य हांगकांग को एक अन्य कम्युनिस्ट शासित शहर के रूप में संचालित करना होगा।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रमुख प्रवक्ता वांग बेन बिन ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण एक वर्ष के लिए चुनाव का ताला जाना ज़रूरी था। अब हांगकांग प्रशासन नई तिथियों के बारे में स्वयं फ़ैसला लेने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी ताक़तें चीन को डरा धमका कर अपने निर्णय चीनी प्रशासन पर थोप नहीं सकती।

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