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लोकतंत्र का महापर्व जोर पकड़ रहा है

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:29 April 2019 6:14 PM GMT
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लोकतंत्र के महापर्व का बिगुल बज चुका है। 11 अफ्रैल से शुरू होकर 19 मई तक चलने वाले इस आम चुनाव में 7 चरणों में देश की जनता अपनी नई सरकार चुनेंगी। 23 मई को एक साथ सभी सीटों पर मतगणना होगी। बेशक चुनाव को लोकतंत्र का पर्व, असहमति का उत्सव मानते हैं, लिहाजा चुनाव ही बुनियादी तौर पर लोकतंत्र को परिभाषित करते हैं। इस बार कुछ तथ्य गौरतलब हैं। मसलन 2019 के चुनाव में 8.43 करोड वोटर अधिक होंगे और 18-19 साल की उम्र के वोटर 1.5 करोड होंगे। वे पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। देशभर में कुल 90 करोड मतदाता 10.35 लाख से ज्यादा बूथों पर मतदान करेंगे। पहली बार ऐसा होगा कि अब ईवीएम में दलों के चुनाव चिह्न के साथ-साथ उम्मीदवारों की फोटो भी होगी, ताकि मतदाता अपने पसंदीदा फ्रत्याशी को अच्छी तरह पहचान सकें। सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल भी किया जाएगा। करीब 17.4 लाख वीवीपैट की जरूरत होगी। पूरी चुनाव फ्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। देश की जनता किसके गले में विजय की माला पहनाएगी ये तो आने वाला वक्त बताएगा। यह चुनाव फ्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से बाहर करने और गैर-मोदीवादियों की सरकार बनाने के मद्देनजर होगा। यह तो साफ है, लेकिन गैर-मोदीवादी कौन हैं, यह अभी न तो तय है और न ही अभी परिभाषित है। लिहाजा कथित `महाग"बंधन' आकार नहीं ले पाया है। बेशक मंच पर विपक्षी दलों के नेता एकजुटता की बात कर रहे हों, लेकिन चुनाव अलग-अलग लड रहे हैं, ये कड़वी सच्चाई है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के साथ महाराष्ट्र में एनसीपी और तमिलनाडु में द्रमुक का ग"बंधन होता रहा है। बिहार में कांग्रेस और राजद साथ में ग"जोड कर सकते हैं। सवाल है कि एकजुट विपक्ष की तस्वीर कहां गायब है? 2014 में आजादी के बाद पहली बार केंद्र में विशुद्ध गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। कांग्रेस सत्ता से हटी ही नहीं 44 के आंकड़े पर सिमटकर मान्यता फ्राप्त विपक्षी दल की हैसियत से भी वंचित हो गई। बीते पांच साल में देश ने बहुत कुछ अच्छा-बुरा देखा। सरकार की सफलताओं और विफलताओं को लेकर अंतहीन बहस भी चलती रही। राजनीतिक घटपाम भी अत्यंत रोचक रहा जिसका सार यदि निकाला जाए तो भले ही कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार न हो सका हो किन्तु भाजपा ने अपने आपको सही अर्थों में राष्ट्रीय दल के रूप में स्थापित कर लिया जो 2014 के पहले तक अकल्पनीय माना जाता था। इसका श्रेय निश्चित रूप से फ्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को देना होगा लेकिन इसी के साथ ये कहना भी गलत नहीं होगा कि इस अंधी दौड़ में भाजपा ने अपनी सैद्धांतिक फ्रतिबद्धता से काफी समझौते किए जो सफलता के शोर में भले ही उपेक्षित हो गए हों किन्तु सत्ता की चाहत में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाते-लगाते कांग्रेस युक्त भाजपा जैसी स्थिति भी बनती गई। बावजूद उसके बतौर फ्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे पांच साल अपने को फ्रासंगिक बनाए रखा और ये कहना गलत नहीं होगा कि ये चुनाव भी पूरे देश में मोदी समर्थन और मोदी विरोध पर आकर सिमट गया है। हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों मध्यपदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के बाद भाजपा की परेशानी पर पसीने की बूंदें साफ देखी जा सकती थीं।

-सौरभ जैन,

शादीपुर, दिल्ली।

पाकिस्तान से "ाsस कार्रवाई की दरकार

पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर पड़ रहे अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण भले ही उसने विश्व को दिखाने के लिए आतंक के खिलाफ अभियान चलाने का ऐलान किया हो। उसने फ्रतिबंधित संग"नों द्वारा चलाए जा रहे 180 से ज्यादा धार्मिक स्कूल को बंद करने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई में उसने 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। इस बार पाकिस्तान ने दुनिया को दिखाने के लिए जमात उद दावा के फ्रमुख हाफिज सईद को जुमे की नमाज पर लोगों को संबोधित करने से रोका है। इसे पाकिस्तान की लाचारी कहें या विश्व का दबाव जिसके कारण वह हाफिज सईद को संबोधित करने से रोक पाया है। भारत लगातार विश्व के देशों में यह संदेश देने में कामयाब रहा है कि भारत की लड़ाई आतंक से है। जो भी देश भारत में आतंक फैलाने के लिए आतंकियों की सहायता करेगा भारत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। भारत का शुरू से मानना है कि आतंकवाद का समर्थन या सहयोग करने से उस देश का कभी भला नहीं हो सकता। यह आतंकवादी किसी न किसी तरह से उस देश को बर्बाद कर देंगे और यह बात पाकिस्तान पर बिल्कुल सही बै"ती है। अब पाकिस्तान को समझ जाना चाहिए कि आतंकवाद को बढ़ावा देने से वह कभी शांति से नहीं रह पाएगा। पाकिस्तान कई सालों से विश्व के देशों को आतंकवाद के मामले में गुमराह करता रहा है अब समय आ गया है कि विश्व के सभी देश पाकिस्तान के खिलाफ क"ाsर कदम उठाए जिससे कि पाकिस्तान आतंकवादियों का सहयोग करना बंद करे और विश्व में अमन-चैन का माहौल कायम हो। भारत भी चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पालन पोषण बंद करे और अपने देश में रह रहे उन आतंकवादियों के खिलाफ क"ाsर कार्रवाई करे जो भारत में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। अब पाकिस्तान के फ्रधानमंत्री इमरान खान ने दोहराया है कि पाकिस्तान की वक्त को आतंकी गतिविधियों को भड़काने के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। पाकिस्तान बार-बार कहता आया है कि वह आतंकवादियों को अपने देश की वक्त इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा लेकिन उसके बावजूद भी वहां से आतंकवाद लगातार फलता फूलता रहता है। अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को अपनी बात पर पूरी तरह से अमल करना होगा नहीं तो यह उसके लिए ही घातक सिद्ध हो सकता है। भारत का समर्थन करते हुए विश्व के कई देशों ने भी पाकिस्तान के ऊपर दबाव बनाया है। अमेरिका के न्यूयॉर्प टाइम्स में छपी खबर में कहा गया है कि पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने वाले आतंकवादी समूहों के खिलाफ कभी भी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की है। उसने चेतावनी दी है कि दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध का खतरा बरकरार है और इसका दीर्घकालिक समाधान बिना अंतर्राष्ट्रीय दबाव के संभव नहीं है। बीते सप्ताह दोनों देशों के बीच तनातनी के बाद रिश्तों में शांति समाधान नहीं है। इस लेख में आगे कहा गया है कि अगली बार इस तरह की तनातनी को शांतिपूर्ण तरीके से नहीं सुलझाया जा सकेगा। पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने वाले आतंकवादी समूहों पर कभी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। अब पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि है उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई समेत विभिन्न सशस्त्र समूहों के 121 सदस्यों को हिरासत में लिया है और संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में शामिल आतंकवादियों की संपत्ति जब्त करने की योजना बनाई है, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसे वादों पर शायद ही कभी अमल किया हो। बिना अंतर्राष्ट्रीय दबाव के दीर्घकालिक समाधान की संभावना संभव नहीं है और परमाणु हथियारों का खतरा बना हुआ है। चीन पाकिस्तान का फ्रमुख सहयोगी है और उसे कर्ज देता है। अमेरिकी कांग्रेस उसका साथ देने के लिए खड़ी है।

-अजय चौहान,

रोहिणी, दिल्ली।

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