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भारत और पाकिस्तान को एक होना ही पड़ेगा ः सुरेन्द्र हुड्डा

👤 | Updated on:9 May 2010 2:04 AM GMT
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वीर अर्जुन संवाददाता पानीपत। जिस वक्त बहुत से लोग नींद के आगोश में थे, या उनकी आंखों में नींद तैर रही थी, उस वक्त पानीपत की ऐतिहासिक धरती से सांपदायिक दृष्टिको ण से ऊपर उठकर इंसानियत के नारे बुलंद हो रहे थे। यह बात भी सबके दिल को कचोट रही थी कि जिस हिंदुस्तान को आजाद करवाने में हर उस इंसान ने अपने  पाणों की आहूति दी, जिसके लिए यह वतन ही सर्वोपरि था और तब वह न हिंदू था और न मुसलमान। फिर क्यों आज उसे हिंदू और मुसलमान या सिख के नजरिये से  देखा जा रहा है। उस वक्त वह सिर्प इंसान था और आजादी के बाद हर उस इंसान की औलाद का इस देश पर बराबर का हक है, जिसने कभी इस देश की एकता  और अखंडता पर आंच नहीं आने दी। जी हां, ऐसी ही बातें शुकवार की देर रात तक तीन लड़ाइयों के लिए पसिद्ध पानीपत की धरती पर हो रही थी और पाठ पढ़ाया  जा रहा था इंसानियत का।  `काजी सनाउल्लाह (रह.) एजुकेशनल सोयायटी' पानीपत की ओर से किया गया था, लेकिन इस मज़लिस का लब्बोलुआब यही रहा  कि कोई कौम देश से ऊपर नहीं है और किसी धर्म ने इंसान को इंसान से बैर रखना नहीं सिखाया।       मुस्लिम कौम के पिछडेक्वपन को इंगित करते हुए बच्चों की अच्छी  तालीम पर हर वक्ता ने पूरा जोर दिया। यूं तो विभिन्न संगठनों द्वारा धार्मिक या सामाजिक कार्यकमों का आयोजन किया जाता रहता है, लेकिन अगर कोई मुस्लिम संगठन किसी कार्यकम का आयोजन क रता है तो उस पर खूफिया एजेंसियों को भी हर वक्त शक रहता है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। शुकवार देर शाम सेक्टर 25 के पास आयोजित यह मज़लिस  लगभग चार घंटे चला। मज़लिस की अध्यक्षता कर रहे मौलाना मतलूब हसन नदवी ने कहा कि हमें कुरान की तालिमात और अल्लाह के रसूल के जानिसार सहाबा-ए-इकराम की जिंदगियों को अपने लिए नमूना बनाएं। उन्होंने शिक्षा की तरफ भी विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। कार्यकम के विशिष्ट अतिथि पहली ख़बर के मु य संपादक श्री सुरेन्द सिंह हुड्डा ने मुस्लिम समुदाय द्वारा आयोजित इस मज़लिस पर बधाई देते हुए कहा कि आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता।  यह दुर्भाग्य की बात है कि जिस व्यक्पि ने महात्मा गांधी को गोली से मारा, उसे किसी ने हिंदू नहीं कहा, जिस व्यक्पि ने राजीव गांधी को बम से उड़ाया, उसे किसी ने हिंदू नहीं कहा और न ही वे लोग हिंदू समुदाय का पतिनिधित्व करने वाले थे। लेकिन जब श्रीमती इंदिरा गांधी को उनके दो सुरक्षाकर्मियों ने मारा तो लोगों ने कहा कि सिखों ने इंदिरा को मारा है। इस तरह से एक पूरे धर्म को ही कलंकित किया गया।   इसी तरह जिन लोगों ने मुंबई पर आतंकी हमला  किया, उन्हें मुसलमान कहना गलत है। क्योंकि दहशतगर्दों का कोई धर्म और ईमान नहीं होता। वे लोग भी इस्लाम का पतिनिधित्व करने वाले नहीं थे। श्री हुड्डा ने हमलावरों में जिंदा बचे एकमात्र आतंकी अजमल कसाब को मंच से कायर कहा तो समस्त मुस्लिम समाज ने इसका पूरा समर्थन किया।   हिंदू और मुस्लिम भाईचारे का संदेश देते हुए श्री हुड्डा ने कहा कि आज हिंदुस्तान को खतरा पाकिस्तान से कम, चीन से ज्यादा है। चीन ने तो हिमाचल के सीमावर्ती  जिले किन्नौर के साथ लगते अपपे गांव शिपकी तक ऐसी सड़पें बना दी हैं जिस पर हवाई जहाज उतारे जा सपें और रेलगाड़ी से कोई भी सामग्री पहुंचाई जा सके। यानी अगर चीन को हिंदुस्तान पर हमला करना पड़े तो उसे किसी पकार की कोई दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने खेद जताया कि हमारे देश का अधिकांश पैसा कश्मीर में केवल इसलिए खर्च हो रहा है कि उस पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपना हक जता रहे हैं, लेकिन इस समस्या का आज तक कोई हल नहीं निकल सका है। उन्होंने कहा कि जितना पैसा इस विवाद पर दोनों देश खर्च कर रहे हैं, उसको अगर अपने देश की गरीबी को दूर करने में लगाया जाए तो ये देश स्वयं खुशहाल हो  जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की जनता स्वार्थी नेताओं के दुखों का बोझ झेल रही है, जबकि दोनों देशों की जनता अमन और शांति चाहती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के हालात बनते जा रहे हैं, उसको देखते हुए वह दावा कर सकते हैं कि आने वाली चार पीढ़ियों के उपरांत दोनों देशों को फिर से एक हो जाने  के लिए विवश होना पड़ेगा और इन दोनों देशों का एक होना ही फिर से पूरी जनता की खुशहाली का मार्ग पशस्त करेगा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय का आ"ान करते  हुए कहा कि इस कौम के लोग कारीगरी में बहुत कुशल हैं, लेकिन शिक्षा में इस वर्ग को बहुत ध्यान देने की जरूरत है। कार्यकम के विशेष अतिथि मजहबी अमुर कमेटी पंजाब वक्फ बोर्ड के चेयरमैन एवं शिरोमणि अकाली दल (बादल) के संयुक्प सचिव तथा पंजाब के शाही इमाम  मौलाना हबीबुर्रहमान के सुपुत्र मोह मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने मुसलमान कौम को सच्चा इंसान बनने की नसीहत देते हुए कहा कि आज मुस्लिम कौम के कुछ  लोग पूरी तरह चमचागिरी पर उतर आए हैं जिस कारण न केवल आम मुस्लिम लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है, बल्कि इस्लाम को भी ऐसे लोगों द्वारा बदनाम  किया जा रहा है। उन्होंने मुस्लिम लोगों को ऐसे गद्दारों से सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि इस हिंदुस्तान पर जितना हक दीगर जाति के लोगों का है, उतना  ही हक मुस्लिमों का भी है। मुसलमान कहीं बाहर से नहीं आए थे और उन्होंने भी इस देश की आजादी में बराबर का योगदान दिया था। परंतु दुर्भाग्य से आज भी इस  देश के मुसलमानों को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है और अपने ही देश में एक मुस्लिम को यह एफीडेविट देना पड़ता है कि वह हिंदुस्तानी है। उन्होंने कहा कि कोई  भी मजहब आपस में बैर रखना नहीं सिखाता और सभी सच्ची इंसानियत का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्पि अपने मजहब का पक्का नहीं हो सकता, वह व ढभी अपने मुल्क का भी नहीं हो सकता।  मदरसों में दल नहीं दिल बनाते हैंः नदवी इस दौरान कैराना से आए मौलाना अबिद हुसैन नदवी ने कौम के साथ गद्दारी करने वाले लोगों को चेताते हुए कहा कि ऐसे लोग अपनी कौम और देश के हितैषी नहीं  हैं। ये लोग कभी अपने मंसूबो में सफल नहीं होंगे। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहा कि वे अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी तालीम दिलाएं। उन्होंने कहा कि  मदरसों में दल नहीं दिल यानी सच्चे इंसान बनाए जाते हैं, जबकि कुछ लोग मदरसों को भी बदनाम करने में कसर बाकी नहीं छोड़ते। इनेलो के वरिष्ठ नेता सुबेदार पताप सिंह ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की पेरणा देते हुए कहा कि डॉ. अब्दुल कलाम ने अत्यंत गरीबी  के बावजूद शिक्षा के बल पर ही न केवल देश को विज्ञान के क्षेत्र में गौरवशाली उपलब्धि दिलाई, बल्कि देश के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मिसाल कायम की। ए sसे महापुरुषों से हम सभी को पेरणा लेनी चाहिए।  

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