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कान का मवाद न करें अनदेखा

👤 | Updated on:30 Sep 2012 12:38 AM GMT
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 डॉ. डीपी अग्रवाल मनुष्य के कान एक महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रिय हैं, जो मुख्यत दो कार्य करते हैं ः 1.सुनना या शब्द श्रवण 2.शरीर को बैलेंस करना कान के शरीर रचना की दृष्टि से तीन भाग हैं ः (1)बाह्य कर्ण, (2) मध्य कर्ण व (3) अंतकर्ण। अंतकर्ण की रचनाओं में विकार आने पर प्रमुखत चक्कर आना, चलने में परेशानी एवं उल्टी होना या उल्टी होने की इच्छा होना तथा विभिन्न प्रकार की आवाजें कान में आना जैसे लक्षण सामने आते हैं। कान के प्रत्येक अंग की सामूहिक ठीक ािढया के द्वारा मनुष्य ठीक प्रकार से सुनता है। इन अंगों में से कान के पर्दे से लेकर मध्य कर्ण एवं अंतकर्ण के अंगों में विकार होने पर विभिन्न प्रकार की श्रवणहीनता की स्थिति उत्पन्न होती है।  कान से मवाद आने का स्थान मध्य कर्ण का पांमण है। मध्य कर्ण में सूजन होकर, पककर पर्दा फटकर मवाद आने लगता है। मध्य कान में पांमण पहुँचने के तीन रास्ते हैं, जिसमें 80-90 प्रश कारण गले से कान जोड़ने वाली नली है। इसके द्वारा नाक एवं गले की सामान्य सर्दी-जुकाम, टांसिलाइटिस, खाँसी आदि कारणों से मध्य कर्ण में पांमण पहुँचता है। बच्चों की गले से कान को जोड़ने वाली नली चूँकि छोटी एवं चौड़ी होती है, अत दूध पिलाने वाली माताओं को हमेशा बच्चे को गोद में लेकर सिर के नीचे हाथ लगाकर, सिर को थोड़ा ऊपर उठाकर ही बच्चे को दूध पिलाना चाहिए। ऐसी माताएँ जो लेटे-लेटे बच्चो को दूध पिलाती हैं उन बच्चों में भी कान बहने की समस्या उत्पन्न होने की ज्यादा आशंका रहती है। आयुर्वेदीय दृष्टि से सर्दी-जुकाम आदि हों तो निम्न उपाय तत्काल प्रारंभ कर देना चाहिए। सरसों के तेल को गर्म कर पेट, पीठ, छाती, चेहरे, सिर पर सुबह-शाम मालिश कर दो-दो बूँद सरसों तेल नाक के दोनों छिद्रों में डालना चाहिए। एक कप पानी उबालकर उसमें चुटकीभर नमक डालकर छानकर रखें तथा यह नमक मिला पानी ड्रॉपर से नाक में 2-2 बूँद 3-4 बार डालना चाहिए, जिससे नाक तत्काल खुल जाती है। संजीवनी वटी (125 मिग्रा), छ माह से छोटे बच्चों को चौथाई गोली सुबह-शाम तथा छ माह से एक वर्ष के बच्चों को आधी-आधी गोली सुबह-शाम शहद एवं अदरक के रस के साथ मिलाकर देने से सर्दी ठीक होती है। सर्दी-जुकाम ही बच्चों में कान बहने का एक प्रमुख कारण है, अत उसकी चिकित्सा परम आवश्यक है। यदि कान बहने ही लगें तो-साफ रुई लगी काड़ी से कान को दिन में तीन-चार बार साफ कर गुलाब जल या समुद्र फेन चूर्ण कान में डालते हुए सर्दी-जुकाम आदि हेतु वर्णित चिकित्सा भी अवश्य करना चाहिए। प्राय 10-15 दिनों में कान बहना बंद होकर कान का पर्दा भी फिर सेजुड़ जाता है, किंतु बारम्बार जुकाम या अन्य कारणों से कान बहे तो कान के पर्दे का यदि अधिकतर भाग नष्ट हो जाए तो बच्चे की सुनाई देने की क्षमता प्रभावित होकर बहरापन भी उत्पन्न होता है,अत छोटे बच्चे जो बैठ नहीं सकते, उनकी सर्दी-जुकाम आदि की चिकित्सा तुरंत कराते हुए सावधानी रखना चाहिए। कर्णशरीर का महत्वपूर्ण अंग है।इसकी रचना जटिलऔर अत्यंत नाजुक है। कान दर्द (ाaraम्प) का मुख्य कारण युस्टेशियन नली में अवरोध पैदा होना है। यह नली गलेसेशुरु होकर मध्यकर्ण को मिलाती है। यह नली निम्न कारणों से अवरुद्ध हो सकती है-- 1)  सर्दी लग जाना। 2) लगातार तेजऔर कर्पशध्वनि 3) कान में चोंट लगना 4) कान में कीडाघुस जाना या पांमण होना। 5) कान में अधिक मैल(वाक्स) जमा होना। 6) नहाते समय कान में पानी प्रविष्ठ होना।    बडों के बनिस्बत छोटे बच्चों को कान दर्द अक्सर हो जाता है। बच्चों मे प्रतिरक्छा तंत्र अविकसित रहता हैऔर युस्टेशियन नलीभी छोटी होती है अतःइसकेआसानी से जाम होने के ज्यादा अवसर होते हैं। रात के वक्त कान दर्द अक्सर बढ जाया करता है। कान में किसी प्रकार का पांमण होने से पहिले तो कान की पीडा होती है और इलाज नहीं करने पर कान में पीप पडने का रोग हो जाता है।      कान दर्द निवारक कुदरती पदार्थों के उपचार नीचे लिखे जाते हैं- 1)  दर्द वाले कान में हायड्रोजन पेराक्साइड की कुछ बूंदे डालें। इससे कान में जमा मैल( वाक्स) नरम होकर बहार निकल जाता है। अगर कान में कोइ पांमण होगा तोभी यह उपचार उपकारी रहेगा। हायड्रोजन में उपस्थितआक्सीजन जीवाणुनाशक होती है। 2)  लहसुन संस्कारित तेल कान पीडा में हितकर है। 10 मिलि तिल के तेल में 3 लहसुन की कली पीसकर डालेंऔर इसे किसी बर्तन में गरम करें। छानकरशीशी मेंभरलें। इसकी 4-5 बूंदें रुग्ण कान में टपकादें। रोगी 10 मिनिट तक लेटा रहे। ]िफर इसी प्रकार दूसरे कान मेंभी दवाडालें। कान दर्द में लाभ प्रद नुस्खा है। 3)  जेतुन का तेल मामूली गरम करके कान में डालने से दर्द में राहत होती है। 4)  मुलहठी कान दर्द में उपयोगी है। इसेघी मेंभूनें । बारीक पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे कान के बाह्यभाग में लगाएं। कुछ ही मिनिट में दर्द समाप्त होगा। 5)  बच्चों के कान में पीप होने पर स्वस्थ स्त्राr के दूध की कुछ बूंदें कान में टपकादें।स्त्राr केदूध में प्रतिरक्छा तंत्र को मजबूत करने के गुण विध्यमान होते हैं।उपकारी उपचार है।    

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