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दुश्मन से किया देश का सौदा

👤 | Updated on:13 May 2010 1:37 AM GMT
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माध्gरी गुप्ता पिछले दो सालों से पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्च आयोग में द्वितीय श्रेणी की भारतीय विदेश सेवा अध्कारी थी। इसके पहले वह मलेशिया और अऱीका के भारतीय मिशनों में काम कर चुकी थी। माधुरी गुप्ता सीध्s विदेश सेवा के लिए नहीं चुनी गई थीं बल्कि पमोशन के जरिए यहां तक पहुंची थी। उसकी उर्दू में महारत थी और दक्षिण एशिया मामलों की वह जानकार थी। इसलिए सितम्बर 2007 में उनकी तैनाती नई दिल्ली स्थित भारतीय विदेश संबंध् परिषद से इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्च आयोग में की गई थी। माध्gरी गुप्ता का मुख्य रूप से काम पाकिस्तान के उर्दू अखबारों में भारत को लेकर छपने वाली खबरों और विश्लेषणों पर नजर रखना था। तेज तर्रार और खूब पढ़ी लिखी माध्gरी गुप्ता की उर्दू में जबरदस्त पकड़ है। साथ ही वह पफोरेंसिक साइंस में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी किया है। इस लिहाज से उनकी जासूसी के मामलों में भी गहरी रूचि थी। साथ ही माध्gरी गुप्ता ने साइकोलॉजी में भी डिग्री हासिल की है। अपनी इसी अकादमिक पश्ष्"भूमि के चलते नियमित पोन्नति से अलग हटकर उनका पमोशन किया गया और इस्लामाबाद जैसी संवेदनशील जगह में उन्हें नियुक्ति दी गई। एक और बात ध्यान देने की है, माध्gरी गुप्ता अविवाहित हैं। उनका एक भाई है वह अमरीका स्थित एक बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी में कम्प्यूटर पोग्रामर है। भाई के अलावा उनके निकट रिश्तों में और कोई नहीं है। इस बात का जिक्र यहां इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों या उच्चायोगों में अविवाहित महिला या पुरुषों को एक अघोषित नियम के चलते नियुक्ति नहीं दी जातीऋ लेकिन माध्gरी गुप्ता इसका अपवाद थीं। शायद माध्gरी गुप्ता अपवाद इसलिए भी थींऋ क्योंकि वह राजधनी नई दिल्ली में स्थित भारतीय विदेश संबंध् परिषद में अपनी तैनाती के दौरान अपनी जबरदस्त पतिभा का परिचय दिया था। साथ ही उनका उर्दू का ज्ञान और पाकिस्तानी मामलों में गहरी रुची अतिरिक्त बोनस प्वाइंट था। कहा जाता है कि जब वह आईसीआईआर के दफ्रतर सपू हाउस में तैनात थीं, तो वह पाकिस्तान में पोस्टिंग पाने के लिए अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की थी। कहा यह भी जाता है कि उनकी पहुंच उफपर तक थी। इसी की बदौलत पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुल्क में उनकी तैनाती पोटोकोल से हटकर हुई। बहरहाल यह उनकी योग्यता का रिफ्रलेक्शन भी था। 16 अपैल 2010 को नई दिल्ली से भारतीय उच्च आयोग पफोन गया कि सुश्री माध्gरी गुप्ता को अविलंब भारत भेजा जाए जिससे वह भूटान में होने वाली सार्क समिट के लिए शिखर नेताओं की माहौल बनाने वाली मीटिंग में हिस्सा ले सकें। माध्gरी गुप्ता 17 अपैल की देर रात भारत आ गईं और पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी इलाके में स्थित अपनी मकान में गईं। यहां उनका एक रिश्तेदार और एक केयर टेकर रहता है। एक दिन यहां रुक कर आराम करना था और पिफर अगले दिन उन्हें विभिन्न अध्कारियों के साथ मीटिंग करनी थीऋ क्योंकि उसी रात थिंपू के लिए रवाना हो जाना था, जहां दो दिन बाद सार्क समिट की मीटिंग शुरू होने वाली थी। माध्gरी गुप्ता एक-एक मिनट पहले से निश्चित था। यहां तक कि कब किसके पफोन आने हैं, किससे बात करनी है, किससे बात नहीं करनी यह सब भी उनके टाइट शिड्यूल में बिल्कुल पिफक्स था। 18 अपैल को दिन में लगभग 12.30 बजे जब वह सुबह देर से उ"ने के कारण तैयार होकर अभी कॉपफी की चुसकियां ही ले रही थीं, तभी उनका पर्सनल सेक्रेटरी उनके पास आया और उन्हें एक कार्ड दिखाकर पूछा यह साहब आपसे मिलने आए हैं। माध्gरी गुप्ता ने कार्ड देखा। कार्ड विदेशमंत्राालय से संबंध्ति, एक अध्कारी का था। यह देखकर माध्gरी गुप्ता के माथे पर बल पड़ गए। उसे समझ नहीं आया कि जब कल मीटिंग होना ही है तो पिफर ये एक दिन पहले मिलने क्यों आ गए हैं? पिफर खुद ही सवाल का जवाब दिया, हो सकता है कुछ पोग्राम में तबदीली हो गई हो। इसलिए उन्होंने कहा आने दो। कुछ ही मिनटों में जिस अध्कारी का वह विजिटिंग कार्ड था, वह माध्gरी गुप्ता के सामने एक सहायक के साथ खड़ा था। हाय, हैलो के बाद बातचीत शुरू हुई तो अचानक माध्gरी गुप्ता को लगा कि शायद वह अध्कारी उससे थिंपू में होने वाले सार्क समिट पर कोई बातचीत नहीं करना चाहता बल्कि कुछ दूसरी ही चीजों पर पफोकस कर रहा है है और ऐसी चीजें जिनसे उन्हें दिक्कत होने लगी। इसलिए वह कुछ रूखे अंदाज में बोली, मुझे इस सब बारे में आपसे कोई बात नहीं करनी। कल मंत्राालय में मैं आपके साथ बात करूंगी। `नहीं मैडम। आपको इसी समय और यहीं पर हमारी बातों का जवाब देना होगा।' `व्हॉट यू मीनकृ' माध्gरी गुप्ता को गुस्सा आ गया थाऋ लेकिन वह अध्कारी उसके गुस्से के पभाव में नहीं आया और अपनी जेब से अपना आईकार्ड निकालकर सामने कर दिया। उसके आईकार्ड से माध्gरी गुप्ता को पता चल गया कि वह कोई छोटा मोटा विदेश मंत्राालय का अधिकारी नहीं बल्कि भारतीय खुपिफया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो का क्लास वन ऑपिफसर था और उसके साथ आया दूसरा व्यक्ति भी भारतीय खुपिफया एजेंसी से ही तालुकात रखता था। सिपर्फ इतना ही नहीं था, जैसे ही बातचीत का लहजा थोड़ा सख्त हुआ, वहां एक दो नहीं बल्कि कई रॉ ;रिसर्च एंड एनालिसिस विंगद्ध और आईबी के अध्कारी ध्ड़ध्ड़ाकर पहुंच गए और कुछ ही मिनटों बाद भारतीय विदेश सेवा की 30 साल पुरानी वरिष्" अध्कारी माध्gरी गुप्ता आईबी और रॉ के शिकंजे में थी। माध्gरी गुप्ता पर जासूसी का गंभीर आरोप है। आईबी के अध्कारी पिछले 9 महीने से उस पर नजर रख रहे थे और एक ऐसे मौके की तलाश में थे जब हाथ "ाsस सबूत लग जाए तो इस जासूस को गिरफ्रतार करके पुलिस के हवाले कर दिया जाए। वह "ाsस सबूत हाथ लग चुका था। इसी वजह से माध्gरी गुप्ता को होशियारी से इस्लामाबाद से थिंपू में सार्क समिट में हिस्सेदारी करने के बहाने बुलाया गया था। अब यह गद्दार जासूस आईबी के अध्कारियों के हाथ में थी। उन्होंने इसे पकड़कर दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच को सौंप दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच और आईबी तथा रॉ के अध्कारियों ने कई घंटे तक अलग-अलग दौर में उससे कड़ी पूछताछ की। इस पूछताछ में 6-7 घंटे के अंदर ही माध्gरी गुप्ता वह सब कुछ कबूल कर लिया जिसका उस पर शक था। अगले दिन अखबार की सुर्खियां टेलिविजन चैनलों की बेकिंग न्यूज में एक ही महिला छाई थी और वह थी माध्gरी गुप्ता। माध्gरी गुप्ता पर आईबी के अध्कारियों को शक तो 2008 के दिसम्बर माह में ही हो गया था। लेकिन वह बिना "ाsस सबूत के उस पर हाथ नहीं डालना चाहते थे। इसलिए उन्होंने तब तक इंतजार किया जब तक माधुरी रंगे हाथों न पकड़ ली गई। माध्gरी ने स्वीकारा है वह महत्वपूर्ण गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान की खुपिफया एजेंसी आईएसआई तक पहुंचाया करती थी। ये सूचनाएं वह आईएसआई के एजेंट मुदस्सिर राणा के हनीट्रैप में पफंस कर देना शुरू किया था। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक माध्gरी न्यायिक हिरासत में थी। उसके पास से अभी तक 7 दस्तावेज, 2 मोबाइल पफोन जिसमें वह भारत और पाकिस्तान के अलग-अलग सिम इस्तेमाल करती थी। साथ ही एक दर्जन से ज्यादा संदिग्ध् लोगों के पफोन नम्बर उससे मिले हैं जिनसे माध्gरी गुप्ता के कारनामों को जानने की कोशिश की जा रही है। मीरा राय  

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