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उच्च रक्तचाप की समस्या

👤 | Updated on:16 May 2010 1:00 AM GMT
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अनियमित दिनचर्या के कारण होने वाला तनाव आज शहरी आबादी विशेषकर युवाओं में उच्च रक्तचाप की समस्या के रूप में तेजी से सामने आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जीवन शैली से इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। विशेषज्ञों को अनुमान है कि भारत के शहरी क्षेत्रों में 24 से 30 फ्रतिशत आबादी उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी आबादी 10 से 12 फ्रतिशत है। हालांकि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में इस समस्या को लेकर जागरुकता का बेहद अभाव है। राजधानी के गुरुतेगबहादुर अस्पताल के पूर्व वरिष्" चिकित्सक डॉ. राहुल गुलाटी के अनुसार चिकित्साशास्त्र में निम्न रक्तचाप की तुलना में उच्च रक्तचाप ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कई जटिलताएं पैदा होती हैं। उच्च रक्तचाप का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि अनियमित दिनचर्या, शहरी जीवन के तनाव इसका सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि भारत में यह समस्या फ्राय: 35 साल से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा पाई जाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं का इस समस्या से पीड़ित होना चिंताजनक बात है क्योंकि यही देश की उत्पादक आबादी है।  डॉ. गुलाटी ने कहा कि रक्तचाप अधिकतम दाब और न्यूनतम दाब में घटता बढ़ता रहता है। अधिकतम दाब को सिस्टोलिक और न्यूनतम दाब को डायस्टोलिक कहते हैं। सामान्य तौर पर यह अनुपात 130:80 रहता है। युवाओं में फ्राय: डायस्टोलिक बढ़ा होता है जबकि बुजुर्गों में सिस्टोलिक।  उच्च रक्तचाप के कारण पीड़ित व्यक्ति को हृदय संबंधी विकार, किडनी, तंत्रिका संबंधी समस्या सहित कई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि रक्तचाप बढ़ने से ब्रेन हेमरेज या स्मृति लोप होने जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। डॉ. गुलाटी के अनुसार रक्तचाप बढ़ने से तेज सिरदर्द, थकावट, टांगों में दर्द, उल्टी आने की शिकायत, चिड़चिड़ाहट जैसे लक्षण मिलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड फ्रेशर की समस्या जीवनशैली से जुड़ा रोग है लिहाजा महज दवाओं से ही इसका उपचार नहीं किया जा सकता।  

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