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हार्मोन्स भी हैं मधुमेह का कारण

👤 | Updated on:16 May 2010 1:01 AM GMT
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डायबटीज यानी मधुमेह इस बीच घर-घर की बीमारी जरूर है, लेकिन डॉक्टर और वैज्ञानिक अब भी पूरी तरह नहीं जानते कि यह बीमारी क्यों और कैसे होती है। अब पता चला है कि सेक्स हार्मोन भी डायबटीज की बीमारी में अहम किरदार निभाते हैं। इतना तय है कि यदि कोई मोटा-तगड़ा है और चलने-फिरने से जी चुराता है, तो वह मधुमेह को न्योता दे रहा है। डॉक्टर लंबे समय से यह भी जानते हैं कि जिसे मधुमेह रोग है, वह अधिकतर न केवल स्वयं भारी भरकम है, उसका लिवर यानी यकृत भी सामान्य से बड़ा और भारी होता है। अब तक समझा जाता था कि शरीर के साथ-साथ यकृत का भी भारी होना शायद मोटापे का ही एक अनुषंगी प्रभाव है। लेकिन, जर्मनी में हुई एक खोज से संकेत मिलता है कि यकृत का बढ़ जाना और भारी हो जाना ही शायद मधुमेह रोग को जन्म देता है। इस में एक खास प्रोटीन तथा स्त्राr-पुरुष हार्मोनों की भी निर्णायक भूमिका होती है। टय़ूबिंगन विश्वविद्यालय अस्पाताल के प्रधान डॉक्टर नोर्बर्ट स्टेफान इस बीच यही मानते हैं कि यकृत का मोटापा ही मधुमेह को जन्म देने वाला निर्णायक कारक है, 'मधुमेह के होने में लिवर के मोटापे की निर्णायक भूमिका की ओर संकेत करने वाले प्रथम आंकडे हमें एक साल पहले मिले थे। हम यह सिद्ध कर सके थे कि ऐसे लोग, जो मोटापे से ग्रस्त तो हैं, पर जिन के लिवर में वसा यानी चर्बी नहीं है, उन्हें कम आयु में ही धमनी में कठोरता आ जाने की आर्टेरियोस्क्लेरोसिस और इंसुलिन प्रतिरोध की शिकायत नहीं होती। दूसरे शब्दों में, शरीर मोटा होते हुए भी यदि लिवर मोटा नहीं है, तो धमनी काठिन्य और मधुमेह की बीमारी नहीं होती।' आम तौर पर यह बताया जाता है कि जिनके यकृत में वसा की अधिक मात्रा नहीं होती, उन के भीतर एस. एच. डबल्ल्यू. जी. नाम के एक प्रोटीन की अधिकता होती है। यकृत में वासा का जमाव होने पर इस प्रोटीन का अनुपात तेजी से घट जाता है। यह प्रोटीन पुरुषों में टेस्टेस्टेरॉन और महिलाओं में ऐस्ट्रोजन जैसे लिंगसापेक्ष यौन हार्मोनों का नियमन करता है। डॉक्टर काफी समय से जानते हैं कि मधुमेह होने में इन हार्मोनों की भी भूमिका होती है। अमेरिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता भी इसी नतीजे पर पहुँचे हैं कि रक्त में इस खास प्रोटीन की अधिक मात्रा मधुमेह की रोकथाम करती है। डॉ. नोर्बर्ट स्टेफान बताते हैं कि अब शोध का विषय यह है कि एस.एच. डबल्ल्यू. जी. प्रोटीन, यौन हार्मोन और मधुमेह आपस में एक दूसरे को कैसे प्रभावित या नियंत्रित करते हैं, 'यह अभी पता नहीं है कि रक्त में रहने वाला एस.एच. डबल्ल्यू जी. प्रोटीन हमारे यौन हार्मोनों को किस तरह नियंत्रित करता है। ठीक इस समय इन हार्मोनों पर फिर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह सारा अंतरसंबंध इतना पेचीदा है कि वैज्ञानिकों ने कुछ समय पहले इस बारे में आगे खोज करना छोड़ दिया था, हालाँकि यह बात कापी कुछ साफ हो गई थी कि यौन हार्मोनों के नियमन और निर्माण की भी मधुमेह में एक प्रमुख भूमिका होती है।    

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