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चालीस से पहले हो जाएँ चौकन्नें

👤 | Updated on:23 May 2010 1:35 AM GMT
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डॉ. योगेश शाह यूँ चालीस की उम्र पार करने के साथ ही कई समस्याएँ शुरू हो जाती हैं लेकिन उनका असर देर से सामने आता है। इसलिए आजकल हेल्थ का नया फंडा है कि चालीस से पहले ही चौकन्ने हो जाएँ। सेहत भी बेहतर रहे और जिंदगी भी। यही सही होता है कि बीमारी के आने से पहले ही उससे सतर्क रहते हुए सावधानी रखी जाए। कई बीमारियाँ ऐसी होती हैं जो उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर में घर करती जाती हैं। चालीस के होते ही यह तय करना चाहिए कि हर साल पूरे शरीर की सभी जाँचें और परीक्षण करा लें। लेकिन चालीस के होने से पहले खान-पान की आदतें बदलें और अनुशासन तथा संयम से रहने की आदत डाल लें। अपनी सेहत के प्रति सभी को सदैव जागरूक रहना चाहिए, परंतु उम्र का चालीसवाँ पड़ाव आने से पहले इस मामले में जागना सबसे जरूरी है। युवावस्था में जहाँ व्यक्ति अपने करियर व गृहस्थी के मामले में सेटल होने के लिए हैरान रहता है वहीं वह सेहत को सबसे ज्यादा उपेक्षित करता है।  यही वजह है कि चालीस की उम्र लगते ही उसे बीमारियाँ घेरने लगती है। चालीस साल का होने पर काम का दबाव, बच्चों के भविष्य की चिंता, जीवन में स्थायित्व लाने का तनाव आदि उसकी हेल्थ के लिए 'स्ट्रेस' का काम करते हैं। साथ ही शरीर युवावस्था की सक्रियता व ऊर्जा से वंचित होने लगता है। विभिन्न शारीरिक क्रियाएँ व मांसपेशियों की मजबूती कम होने लगती है, अत? इस अवस्था के आने के पहले ही जागना जरूरी है। याद रखें यदि आपकी हेल्थ में सेंध लग गई तो आप न केवल उस परिवार पर बोझ बन जाएँगे जो आप पर निर्भर है बल्कि आप उस आराम और सुकून से भी वंचित हो जाएँगे जिसे हासिल करने के लिए आपने जी-तोड़ मेहनत की है। इसलिए जरूरी है कि आप उन चेतावनी के संकेतों, अलार्म सिग्नल्स को पहचानें और साथ ही अपनी सेहत को बरकरार रखने के लिए सावधानियाँ बरतें। अपनी उम्र व क्षमता के हिसाब से अपने रहन-सहन, खान-पान व दिनचर्या को ढालें, यह सबसे जरूरी है। जीवनशैली का स्ट्रेस या दबाव, तनाव व सीडेन्ट्री लाइफ स्टाइल यानी शारीरिक श्रम रहित जीवनशैली से गहरा संबंध है।  

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